छतरपुर / बुंदेलखंड में लॉकडाऊन असर, भूखे-प्यासे बस स्टैंड पर फंसे यात्री

छतरपुर बस स्टैंड पर शनिवार देर रात से बैठे हैं यात्री। छतरपुर बस स्टैंड पर शनिवार देर रात से बैठे हैं यात्री।
बस स्टैंड पर बैंच पर सोती युवती। बस स्टैंड पर बैंच पर सोती युवती।
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छतरपुर बस स्टैंड पर शनिवार देर रात से बैठे हैं यात्री।छतरपुर बस स्टैंड पर शनिवार देर रात से बैठे हैं यात्री।
बस स्टैंड पर बैंच पर सोती युवती।बस स्टैंड पर बैंच पर सोती युवती।

  • गाड़ियां ने चलने की वजह से वह गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं लोग

दैनिक भास्कर

Mar 22, 2020, 10:14 AM IST

छतरपुर(राजेश चौरसिया)। बुंदेलखंड में लॉकडाऊन असर साफ देखने को मिल रहा है। यहां देशभर से आए लोग अपने परिवार सहित छतरपुर में फंस गए हैं। गाड़ियां न चलने की वजह से अपने परिवार के साथ छतरपुर के श्यामाप्रसाद मुखर्जी अन्तर्राजीय बस स्टैंड पर खुले में डेरा डाले हैं। यहां खाने-पीने की दुकान न खुलने से कोई सामान भी नहीं मिला रहा जिससे भूखे-प्यासे हैं। गाड़ियां ने चलने की वजह से वह गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। देर रात से रात भर बस स्टैंड पर बसर कर रहे हैं।


लोगों का कहना है कि वह कोरोना के डर से बड़े शहरों (दिल्ली, नोएडा, हरियाणा, पंजाब, चंड़ीगढ़ जम्मू, राजस्थान, जयपुर, आगरा, बनारस, इंदौर, भोपाल, कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद, सहित कई जगहों से अपने गृहनगर, गांव, घरों को वापस आये हैं। बड़े शहरों में कोरोनो के ख़ौफ से काम बंद है हम लोग रोज कमाते और खाते थे जिससे हैम लोग भूखों मरने के कगार पर आ गए थे साथ ही कोरोना का डर भी सता रहा था तो हम लोग हर हाल में अपने घर, गांव, शहर वापस लौटना चाहते थे। वापस आने को हुए तो गाड़ियों में 4 गुना ज्यादा किराया देकर जानवरों से बदतर हालात में आये हैं। जहां बसों में 50-60 सवारियां बनतीं हैं वहां 200 सवारियां आई हैं 2 ल9गों के स्लीपर पर 10 लोग बैठकर आये हैं। अंदर नहीं बने तो बसों की छत पर बैठकर आये हैं। क्या करते हर हाल में हमें आजान जो था। इतना ही नहीं ज़ब देर रात और तड़के सुबह यहां पहुंचे तो अब छतरपुर में आकर फंस गए हैं। 


अन्तर्राजिय बस स्टैंड पर कई सैकड़ों की संख्या में खुले में पड़े लोगों की हालत खराब है। उनका कहना है कि जैसे-तैसे छतरपुर तक तो पहुंच गये पर अपने घरों तक नहीं पहुंच पा रहे। यहां से गाड़ियां, टैक्सी, ऑटो, लोडर, वाहन, कुछ भी नहीं चल रहे। कुछ ऑटो वाले हैं जो 40 से 50 किलोमीटर दूरी तय करने का 10 गुना किराया वसूल रहे हैं। पूर्व किराए के मुताबिक 10 गुना पैसा लग फाहा है। हम करें भी तो क्या हमें देना पड़ रहा है घर जो जाना है। जान से बड़ी कीमत तो नहीं है पैसों की। हमनें बाहर रहकर मेहनत मजदूरी कर जितना कमाया वह वापस आने में किराए में ही चला गया।


छतरपुर से अन्य शहरों पन्ना सतना, रीवा, दमोह, टीकमगढ़, महोबा, सागर, झांसी, जाने के लिये लोग इंतज़ार में है कि कोई वाहन किसी भी कीमत पर मिल जाये जिससे आने घर, शहर, नगर, जा सकें। पर बंद की वजह से नहीं मिल पा रहा।

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