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जीएसटी जमा करने में देरी- 50 हजार व्यापारियों को 300 करोड़ का ब्याज चुकाने के नोटिस

6 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो।
  • अपनी टैक्स क्रेडिट से जीएसटी जमा कराने वाले व्यापारियों ने नहीं चुकाया देरी की अवधि का ब्याज
  • व्यापारियों का तर्क- हमारा पैसा पहले ही सरकार के पास जमा, जिसका ब्याज ले रही सरकार
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भोपाल. राजधानी में देरी से जीएसटी जमा कराने वाले दो तिहाई व्यापारियों को केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईटीसी) से नोटिस मिले हैं। राजधानी में कुल 75 हजार जीएसटी में पंजीकृत व्यापारी हैं। इनमें से 50 हजार व्यापारियों पर 300 करोड़ रुपए से ज्यादा की देनदारी निकली है। प्रदेश में इस तरह के व्यापारियों की संख्या 3 लाख से ज्यादा है और उन पर 1000 करोड़ रुपए से अधिक का टैक्स बन रहा है।

यह था भ्रम: विभागीय सूत्रों ने बताया कि ये ज्यादातर वे लाेग हैं जो इस भ्रम में थे कि सरकार के पास पहले से ही जमा टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) से देय जीएसटी की बकाया देनदारी पर कोई ब्याज नहीं लगेगा। भले ही यह टैक्स देरी से ही क्यों न जमा कराया गया हो। लेकिन सरकार ने यह माना है कि भले से ही टैक्स क्रेडिट लेजर में जमा टैक्स क्रेडिट से ही क्यों न जमा कराया गया है, लेकिन यह देरी से जमा हुआ है तो इस पर दिन के हिसाब से देय टैक्स पर ब्याज देना होगा।

नियम लागू नहीं- जीएसटी काउंसिल ने 1 फरवरी 2019 को यह नोटिफिकेशन जारी कर दिया था कि टैक्स क्रेडिट से जीएसटी चुकाने पर ब्याज नहीं लगेगा। लेकिन अब तक यह नियम लागू नहीं किए गए। नतीजतन व्यापारियों पर लगातार देनदारियां निकल रहीं हैं। सीबीआईटीसी का मानना है कि पूरे देश में व्यापारियों पर विलंब से टैक्स जमा कराने पर 46 हजार करोड़ रुपए की ब्याज की देनदारियां निकली हैं। 

व्यापारी हर माह की 20 तारीख को जीएसटी आर, 3बी का मासिक रिटर्न भरकर पिछले माह का जीएसटी चुकाता है। मान लीजिए किसी व्यापारी पर 1 लाख रुपए की टैक्स की देनदारी है। इसमें एक साल का विलंब हो गया। उसकी टैक्स क्रेडिट 90 हजार रुपए की थी। इससे उसने 90% टैक्स जमा कराया। शेष 10 हजार रुपए की देय टैक्स राशि का भुगतान उसने विलंब शुल्क के साथ नकद किया। लेकिन विभाग ने टैक्स क्रेडिट से जमा की गई राशि पर 18% के ब्याज की दर से 10,800 रुपए की टैक्स देनदारी निकाल दी।

ब्याज लगाना बिलकुल उचित नहीं
मप्र, एफएमपीसीसीआई के अध्यक्ष डॉ. आरएस गोस्वामी- अगर व्यापारी के पास टैक्स क्रेडिट है तो साफ है कि यह राशि पहले से ही सरकार के बैंक खातों पर जमा है। उस पर ब्याज भी सरकार को मिल रहा है। ऐसे में इस क्रेडिट का उपयोग करके अगर व्यापारी अपनी नई टैक्स देनदारी भले ही विलंब से चुकाए तो उस पर ब्याज लगाना बिलकुल उचित नहीं। क्योंकि सरकार तो पहले ही उस पर ब्याज बैंक से ले चुकी है। सरकार को इस बारे में नियम साफ करना चाहिए। 

खामियाजा तो व्यापारी भुगत रहे हैं
भोपाल टैक्स लॉ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एस कृष्णन- जीएसटी काउंसिल ने 1 फरवरी 2019 को नोटिफिकेशन जारी करके कहा था कि व्यापारी भले ही विलंब से जीएसटी का भुगतान करे, लेकिन वह टैक्स क्रेडिट से यह भुगतान कर रहा है तो उस पर ब्याज नहीं लगाया जाएगा। लेकिन अब तक उसे लागू नहीं किया गया। इसका खामियाजा व्यापारी भुगत रहे हैं।

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