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जुनून के साथ खेलकर ही सफल हुए हैं धोनी और विराट : श्रीकांत

जीवन में सफलता के लिए जुनून होना बहुत जरूरी है, तभी उपलब्धियों को हासिल किया जा सकता है। दुनिया में जितने महान...

Dainik Bhaskar

Sep 12, 2018, 02:11 AM IST
Bhopal - जुनून के साथ खेलकर ही सफल हुए हैं धोनी और विराट : श्रीकांत
जीवन में सफलता के लिए जुनून होना बहुत जरूरी है, तभी उपलब्धियों को हासिल किया जा सकता है। दुनिया में जितने महान व्यक्ति हुए हैं उन्होंने लीक से हटकर अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए जुनून के साथ कार्य किया, तभी वो सफल एवं महान व्यक्ति बने। चाहे फिर वो महेंद्र सिंह धोनी हों या विराट कोहली। यह कहना है भारतीय टीम के पूर्व कप्तान कृष्णमाचारी श्रीकांत का। वे मंगलवार को राजीव गांधी प्रौद्योगिकी संस्थान (आरजीपीवी) में आयोजित कार्यक्रम "उदय' में विशेष रूप से उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि लोग क्या कहेंगे, यह मत सोचो। सचिन तेंदुलकर ने 100 शतक अपने पॉजिटिव एप्रोच और जुनून के कारण ही लगाया। इस मौके पर स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री दीपक जोशी ने कहा है कि हिन्दी में परीक्षा देने वाले स्टूडेंट्स को बेहतर कम्युनिकेशन के लिए अंग्रेजी सिखाई जाएगी। इस दौरान ए.ए. एजुटेक और क्रिस्प के बीच एमओयू पर साइन भी किए गए।

RGPV में "उदय' कार्यक्रम में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान श्रीकांत ने किया स्टूडेंट्स से संवाद

Leadership Talk

आलोचनाओं से घबराएं नहीं

श्रीकांत ने कहा कि कॉम्पिटीशन के इस युग में आलोचनाओं से घबराए नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच के उद्देश्य के प्रति समर्पित रहें। आज स्टूडेंट केवल कुछ पाने के लिए पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि शिक्षा जीवन का अभिन्न अंग है, शैक्षणिक ज्ञान के साथ व्यक्तित्व का प्रभावी होना संवाद की कुशलता को दर्शाता है और अभिव्यक्ति की क्षमता ही व्यक्ति को जीवन में आगे ले जाती है। स्टूडेंट्स को आज इसके प्रशिक्षण की आवश्यकता है।

मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

कुलपति प्रो. सुनील कुमार ने कहा कि शैक्षणिक ज्ञान के अलावा कमजोर वर्ग के स्टूडेंट्स के लिए "उदय' कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इसके माध्यम से व्यक्तित्व विकास एवं कम्युनिकेशन स्किल का प्रशिक्षण स्टूडेंट्स को दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण क्रिस्प के माध्यम से दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कम्युनिकेशन स्किल के दो महत्वपूर्ण भाग हैं, सुनना और बोलना, संवाद का संदेशक वह व्यक्ति हो सकता है जिसमें सुनने एवं सीखने की पर्याप्त क्षमता हो।

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