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मप्र / एसीएस वित्त के कक्ष में पीएस सहकारिता को बुलाकर दिग्विजय ने तुरंत कराया शुगर मिल बेचने का फैसला

Digvijay made a decision to sell the sugar mill immediately by calling PS Cooperative in the room of ACS Finance
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Digvijay made a decision to sell the sugar mill immediately by calling PS Cooperative in the room of ACS Finance

  • 40 करोड़ रुपए के घाटे में है गुना जिले की मिल, किसानों का भी 12 करोड़ बकाया

दैनिक भास्कर

Oct 10, 2019, 05:50 AM IST

भोपाल . फरवरी 2019 से बंद व घाटे वाली गुना जिले की नारायणपुरा शुगर मिल को अब जल्द ही बेचा जाएगा। इसकी कवायद शुरू करने और टेंडर जारी करने का फैसला बुधवार को ले लिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह व नगरीय विकास मंत्री जयवर्धन सिंह शुगर मिल की समिति के सदस्यों के साथ मंत्रालय में वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग जैन के कक्ष में पहुंचे। आनन-फानन में सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव अजीत केसरी को बुलवाया गया।

 

सभी पहलू सामने रखे गए अंतत: तय हो गया कि इसे बेचकर किसानों, कर्मचारियों और बाकी देनदारी निपटाई जाए। एेसा इसलिए कि लगातार शुगर मिल का घाटा बढ़ रहा है, जो 40 करोड़ तक पहुंच गया है। बताया जा रहा है कि जून में शुगर मिल को निजी हाथों में सौंपे जाने की मंजूरी बनी थी, लेकिन शुगर मिल समिति लगातार इसे संचालित करने की बात कहती रही।

 

इसी वजह से वह बिक नहीं पाई। बाद में समिति के लोगों से दिग्विजय ने बात की और अब इसे बेचे जाने पर सहमति बन गई। दोपहर 12 बजे करीब दिग्विजय सिंह सभी लोगों के साथ मंत्रालय में एसीएस वित्त के पास पहुंचे और बकाया के साथ देनदारी पर बात की। सूत्रों के मुताबिक पूर्व में यह तय हो चुका है कि देनदारी का निपटारा किया जाएगा। इसलिए अब शुगर मिल का बिकना तय है।

 

किसानों ने मिल को गन्ना तो दिया, लेकिन उन्हें भुगतान नहीं मिला : गुना जिले की इस शुगर मिल के बकायादारों में बड़ा वर्ग स्थानीय किसानों का है। जिले के करीब तीन हजार एेसे किसान हैं, जिन्होंने शुगर मिल को गन्ना बेचा, लेकिन उसका पैसा नहीं मिला। यह राशि करीब 10 से 12 करोड़ रुपए है। जब भुगतान बंद हुआ और शुगर मिल घाटे में जाने लगी तो किसानों ने न केवल गन्ना देना बंद किया, बल्कि उत्पादन भी करना छोड़ दिया। किसानों का वर्ष 2016-17 और 2017-18 का बकाया है।

 

4.50 करोड़ रुपए वेतन भी देना है - डेढ़ साल से शुगर मिल के 250 कर्मचारियों काे वेतन नहीं मिला है। कई जगहों पर गुहार लगाने के बाद भी उन्हें तनख्वाह नहीं मिली तो वे इस बात का लगातार विरोध करते रहे कि शुगर मिल बंद न हो। अब जब इसे बेचने का फैसला हुआ है तो यह कहा जा रहा है कि खरीदार निजी क्षेत्र की संस्था से कहा जाएगा कि वह मौजूदा कर्मचारियों के साथ ही शुगर मिल शुरू करे।

 

 

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