मप्र / भोपाल, इंदौर और विदिशा सीट पर कांग्रेस की नजर; दिग्विजय को भोपाल से चुनाव लड़ाने की तैयारी



Digvijay prepares to contest from Bhopal
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Digvijay prepares to contest from Bhopal

  • तीन दशक से जहां पार्टी को नहीं मिली जीत, वहां जीतने का खोजा जा रहा फॉर्मूला
  • प्रदेश में टिकट वितरण का काम तीन-चार दिन में शुरू होगा

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 11:06 AM IST

भोपाल .  मप्र में कांग्रेस पार्टी को ‘विन-29’ फॉर्मूले के तहत 22 से 23 सीटें जीतने की उम्मीद है। पार्टी का फोकस ऐसी सीटों पर है, जहां कांग्रेस पार्टी 1989 के बाद नहीं जीती है। ये सीटें भोपाल, इंदौर और विदिशा हैं। कांग्रेस की रणनीति इन सीटों पर जीतने की है। सीएम कमलनाथ ने भी इस बात के संकेत दिए हैं कि वे इन सीटों से दिग्गज नेताओं को मैदान में उतारेंगे। इसी फाॅर्मूले के तहत दिग्विजय सिंह को कांग्रेस भोपाल से मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है। पार्टी आलाकमान दिग्विजय से चर्चा के बाद अंतिम फैसला लेगा। 

 

दिग्विजय ऐसी सीट से लड़ें, जहां कांग्रेस 30-35 साल से नहीं जीती : मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शनिवार को छिंदवाड़ा में कहा है कि दिग्विजय सिंह को कहां से चुनाव लड़ना है वे खुद तय करेंगे, लेकिन मैंने उनसे निवेदन किया है कि मप्र की तीन-चार ऐसी कठिन सीटें हैं, जहां से हम 30 से 35 साल से चुनाव हार रहे हैं।

 

वहां से वे चुनाव लड़ें। नाथ ने दिग्विजय को भोपाल से चुनाव लड़ाने के संकेत 8 से 10 दिन पहले दोनों के बीच हुई चर्चा में दे दिए थे। प्रदेश में भोपाल, इंदौर और विदिशा ही ऐसी सीटें हैं, जहां से कांग्रेस 1989 के बाद नहीं जीती। नाथ से हुई चर्चा के बाद दिग्विजय ने भोपाल और इंदौर से पार्टी के विधायकों से चर्चा भी की है।  कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश में टिकट वितरण का काम तीन-चार दिन बाद चालू होगा, क्योंकि मध्यप्रदेश में चौथे चरण में चुनाव हैं। 


अभी उन प्रदेशों के टिकट बांटे जा रहे हैं, जहां पहले और दूसरे चरण में चुनाव होना है। इस बार भोपाल लोकसभा सीट को कांग्रेस इसलिए भी फाइट में मान रही है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में यहां से तीन विधायक चुनाव जीते हैं। इसी के चलते यहां से दिग्विजय भी जीत के समीकरण बिठाने में लग गए हैं।

 

मेरी कोई च्वाइस नहीं, पार्टी बताए कहां से लड़ना है : दिग्विजय सिंह
सवाल : सीएम चाहते हैं आप कठिन सीट से चुनाव लड़ें? 
दिग्विजय :  पार्टी जहां से कहेगी, वहां से लड़ूंगा।   
सवाल : भोपाल, इंदौर या विदिशा?   
जवाब : मेरी कोई पसंद नहीं है। जहां से कहेंगे वहां से लड़ लूंगा। 
सवाल : राजगढ़ तो आपकी सीट है?  
जवाब : राजगढ़ से लड़ लेंगे। राजगढ़ नहीं तो जहां से कहा जाएगा, वहां से लड़ लेंगे। 
सवाल : आप ही बताएं कहां से चुनाव लड़ेंगे? 
जवाब : सीट को लेकर मेरी कोई च्वाइस नहीं है। पार्टी बताए तो कहां से चुनाव लड़ना है। मैं हर जगह से तैयार हूं।

 

इधर, भाजपा में भोपाल को लेकर असमंजस 

इंदौर से सुमित्रा महाजन, खंडवा से नंदकुमार, जबलपुर से राकेश सिंह, सतना से गणेश सिंह के नाम तय : कमलनाथ की संसदीय सीट रही छिंदवाड़ा में भाजपा दमदार चेहरा उतारने की तैयारी में है। यहां से कमलनाथ के बेटे नकुल कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार हैं, जबकि कमलनाथ इसी विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा में यहां लोकसभा चुनाव के लिए बड़े व बाहरी चेहरे के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते के नाम की चर्चा है। स्थानीय चेहरे के रूप में बंटी साहू और कन्हई राम रघुवंशी के नाम आए हैं। दो दिन की कवायद में भाजपा ने खंडवा से नंदकुमार सिंह चौहान, इंदौर से सुमित्रा महाजन, सतना से गणेश सिंह, जबलपुर से राकेश सिंह का सिंगल नाम रखा है। भोपाल को लेकर अभी असमंजस बरकरार है। 


सिंधिया-भूरिया को हराने के लिए रणनीति : भाजपा इस बार गुना-शिवपुरी, रतलाम और राजगढ़ सीट पर भी नजर रखे हुए है। हाईकमान ने साफ किया है कि इस बार कांग्रेस के किसी भी दिग्गज मसलन, ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्विजय (यदि चुनाव लड़ते हैं तो), अरुण यादव और कांतिलाल भूरिया को वॉकओवर नहीं दिया जाएगा।      


गुना-शिवपुरी से भी इस बार स्थानीय व दमदार उम्मीदवार को मौका देने की तैयार है। खंडवा संसदीय सीट से कांग्रेस के संभावित प्रत्याशी पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव के खिलाफ भाजपा पूर्व प्रदेश नंदकुमार सिंह चौहान को ही मैदान में उतारेगी। हालांकि नामों को अंतिम मंजूरी देने से पहले पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस के नाम पर भी एक बार विचार होगा। दिग्विजय सिंह की उम्मीदवारी तय होने के बाद भाजपा का नाम घोषित होगा। नरेंद्र सिंह तोमर और प्रहलाद पटेल सीट बदल सकते हैं। 


19 मार्च को प्रदेश चुनाव समिति की बैठक है। इसमें सभी 29 सीटों के नामों पर चर्चा होगी। इसके बाद सूची लेकर प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह दिल्ली जाएंगे। दिल्ली में केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक 22 को प्रस्तावित है, जिसमें मप्र के नामों पर फैसला होगा। इसी दिन पहली सूची आने की संभावना है। 


 शिवराज-राकेश सिंह के बीच चर्चा : इधर, शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान के निवास पर राकेश सिंह व उनकी चर्चा हुई। इसमें 29 सीटों को लेकर तैयार फीडबैक व संभावित नामों पर बात हुई। इसी दौरान पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस, राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष लता वानखेड़े, बालाघाट सांसद बोध सिंह भगत, पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू, पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ला, महापौर आलोक शर्मा भी पूर्व मुख्यमंत्री के निवास पर पहुंचे। दोपहर बाद शिवराज सिंह दिल्ली रवाना हो गए। इससे पहले मीडिया से बातचीत में उन्होंने चुनाव लड़ने पर कहा कि यह पार्टी तय करेगी। मैं विनम्र कार्यकर्ता हूं। जो पार्टी कहेगी, उसका पालन करूंगा। 


साधना सिंह का विदिशा से नाम : शिवराज सिंह की पत्नी साधना सिंह की विदिशा संसदीय सीट से दावेदारी तेज हो गई है। शुक्रवार को इस सीट के सभी जिलाध्यक्ष, पूर्व मंत्री रामपाल सिंह व सुरेंद्र पटवा समेत अन्य विधायक भोपाल में शिवराज सिंह के निवास पर पहुंचे। यहां टिकट की दावेदारी की गई। शनिवार को रामपाल सिंह ने दोहराया कि यहां आए कार्यकर्ताओं ने संगठन के सामने साधना सिंह को प्रत्याशी बनाने से आसपास की सभी सीटों फायदा पहुंचेगा। 


अब भोपाल महापौर ने किया बाहरी का विरोध : बाबूलाल गौर और उमाशंकर गुप्ता के बाद महापौर आलोक शर्मा ने  भी बाहरी उम्मीदवार का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि दोनों वरिष्ठ नेताओं ने सही कहा है। स्थानीय कार्यकर्ता को ही उम्मीदवार बनाया जाना चाहिए। खुद की दावेदारी पर कहा कि पार्टी आदेश देगी तो चुनाव लड़ेंगे। टिकट में परिवार वाद पर शर्मा ने कहा कि नेता के बेटे ने यदि कार्यकर्ता के रूप में काम किया है तो उसे टिकट मिलना चाहिए। विश्वास सारंग, दीपक जोशी, सुरेंद्र पटवा संघर्ष करके ही यहां तक पहुंचे हैं। उधर, पार्टी से नाराज चल रहे पूर्व विधायक और भाजपा नेता जितेंद्र डागा ने शिवराज सिंह और राकेश सिंह से मुलाकात की। साथ ही कहा कि सर्वे में जो जितने लायक हो उसे टिकट दिया जाए। टिकट मिला तो मैं भी चुनाव लड़ सकता हूं। 


उमा भारती ने फिर कहा, चुनाव नहीं लड़ेंगी : केंद्रीय मंत्री व भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को पत्र लिखने की जानकारी ट्वीट करके दी। उन्होंने इस ट्वीट में लिखा है कि वे चुनाव नहीं लड़ने की बात पूर्व में घोषित कर चुकी हैं। उसी को दोहराते हुए अमित शाह को पत्र लिखा है ताकि पार्टी आधिकारिक तौर पर मेरे चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर दे। उन्होंने यह भी लिखा कि अगले डेढ़ साल तक ज्यादातर समय गंगा के किनारे बिताना चाहती हूं। इस अवधि के दौरान भाजपा के कहे अनुसार लोकसभा चुनाव प्रचार में भाग लेंगी और जो जिम्मेदारी मिलेगी, उसे संभालेंगी। यह फैसला राजनीति से रिटायर होने के नहीं है। मरते दम तक राजनीति जारी रहेगी।

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