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  • Do not expect the Olympic medal; But eyes on the target, we have to bring the remaining two quota from the Berlin World Cup

भोपाल / ओलिंपिक मेडल की उम्मीद मत कीजिए; लेकिन निगाहें लक्ष्य पर, हमें बर्लिन वर्ल्ड कप से शेष दो कोटे लाने ही हैं: दीपिका

तीरंदाज दीपिका कुमारी शुक्रवार को प्रांतीय ओलिंपिक खेलों का उद्घाटन करने भोपाल पहुंचीं। तीरंदाज दीपिका कुमारी शुक्रवार को प्रांतीय ओलिंपिक खेलों का उद्घाटन करने भोपाल पहुंचीं।
मप्र के खेल संचालक के साथ पद्मश्री दीपिका कुमारी। मप्र के खेल संचालक के साथ पद्मश्री दीपिका कुमारी।
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तीरंदाज दीपिका कुमारी शुक्रवार को प्रांतीय ओलिंपिक खेलों का उद्घाटन करने भोपाल पहुंचीं।तीरंदाज दीपिका कुमारी शुक्रवार को प्रांतीय ओलिंपिक खेलों का उद्घाटन करने भोपाल पहुंचीं।
मप्र के खेल संचालक के साथ पद्मश्री दीपिका कुमारी।मप्र के खेल संचालक के साथ पद्मश्री दीपिका कुमारी।

  • प्रांतीय ओलिंपिक गेम्स का आगाज करने भोपाल आईं दिग्गज तीरंदाज दीपिका कुमारी
  • बोलीं- हमें ओलिंपिक गेम्स दूसरे टूर्नामेंट के जैसे ही खेलने दीजिए

दैनिक भास्कर

Feb 01, 2020, 12:35 PM IST

भोपाल. टोक्यो ओलिंपिक-2020 में पहले तीरंदाजी पदक की सबसे बड़ी उम्मीद और पद्मश्री दीपिका कुमारी ने कहा है कि ओलिंपिक में मुझसे पदक की उम्मीद मत रखिए, मुझे ओलिंपिक दूसरे टूर्नामेंट के जैसे ही खेलने दीजिए। क्योंकि मैं खुद, किसी टूर्नामेंट में पदक की उम्मीद नहीं रखती हूं। मेरा फोकस सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर होता है।

वे प्रांतीय ओलिंपिक गेम्स का आगाज करने शुक्रवार को भोपाल आईं। शाम को वह खिलाड़ियों के बीच तात्या टोपे स्टेडियम पहुंची और उनसे चर्चा की। दीपिका ने खेल विभाग द्वारा संचालित विभिन्न खेल अकादमियों और सेंटर्स की सुविधाओं को जाना और समझा। इसी बीच दीपिका ने दैनिक भास्कर से संक्षिप्त चर्चा की।

दीपिका शनिवार को खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2020 के पदक विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कृत करेंगी। जब उनसे ओलिंपिक पदक की उम्मीद पर सवाल किया गया तो दीपिका ने हंसते हुए जवाब दिया कि पदक की उम्मीद मत करिए। हमें ओलिंपिक गेम्स दूसरे टूर्नामेंट के जैसे ही खेलने दीजिए। दीपिका का तर्क था कि उम्मीदों से अतिरिक्त दबाव बढ़ता है। खुद की तैयारियों पर वे कहती हैं कि मैं अपनी मेंटल टफनेस पर काम कर रही हूं।

जून माह में बर्लिन में होने जा रहे वर्ल्ड कप को लेकर वो कहती हैं कि बर्लिन से हमें शेष दो ओलिंपिक कोटे लाने ही हैं। हमने चार कोटे हासिल कर लिए हैं, दो कोटे ही शेष हैं। हमारे लिए बर्लिन वर्ल्डकप हमारी महिला रिकर्व टीम के लिए ओलिंपिक टिकट हासिल करने का आखिरी मौका होगा। पुरुष वर्ग के कोटे हमारे खिलाड़ी पहले ही हासिल कर चुके हैं। जबकि महिला वर्ग के व्यक्तिगत इवेंट का कोटा दीपिका ने नवंबर माह में बैंकॉक में आयोजित 21वीं तीरंदाजी एशियन चैंपियनशिप के दौरान हासिल किया था। अब शेष कोटे के लिए महिला रिकर्व टीम का क्वालीफाई करना जरूरी है। 

विदेशी कोच लाने के सवाल पर दीपिका कहती हैं कि मुझे नहीं पता कि यह कितना सही होगा और कितना गलत। क्योंकि ओलिंपिक को कुछ ही महीने बचे हैं और इतने कम समय में वे कितना अच्छा कर पाएंगे। जहां तक मुझे पता है सभी खिलाड़ी अपने-अपने कोच से ट्रेनिंग ले ही रहे हैं और उनमें बॉन्डिंग भी अच्छी है। मुझे लगता है खिलाड़ियों को अपनी मानसिक मजबूती पर काम करना चाहिए। हम सभी चाहते हैं कि इस बार तीरंदाजी में ओलिंपिक मेडल आए। उसके लिए हम बहुत मेहनत कर रहे हैं और ओंलिपिंक में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे।

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