मप्र / दरिंदे को जल्द फांसी दी जाए, ताकि किसी और बेबी के साथ ऐसा न हो



drowsiness should be hanged soon so that it does not happen with any other baby
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drowsiness should be hanged soon so that it does not happen with any other baby

Dainik Bhaskar

Jul 12, 2019, 04:01 AM IST

भोपाल . कमला नगर की मांडवा बस्ती में रहने वाली 9 साल की बेबी को गुरुवार को इंसाफ मिल गया। अदालत ने 32 दिन में सुनवाई पूरी कर फैसला सुना दिया। विशेष लोक अभियोजक मनीषा पटेल ने बताया कि इस मामले में पीड़िता के ब्लड सैंपल डीएनए जांच के लिए  रीजनल फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (आरएफएसएल) में भेजे गए थे। इसके बाद मिलान के लिए आरोपी के ब्लड सैंपल सागर स्थित राज्य वैज्ञानिक प्रयोगशाला भेजे गए थे।

 

पीड़िता की विसरा रिपोर्ट की जांच भी पुलिस ने कोर्ट में पेश की थी। रिपोर्ट से बेबी से आरोपी विष्णु द्वारा ज्यादती और हत्या की पुष्टि हो चुकी थी। इन्हीं रिपोर्ट के आधार पर चालान पेश किया गया था। अदालत ने पेश गवाहों और सबूतों के आधार पर विष्णु को फांसी की सजा सुनाई।  इधर, मनुआभान टेकरी पर पीड़िता के साथ हुई ज्यादती और हत्या के मामले में पुलिस अब तक चालान पेश नहीं कर पाई है।

 

वो पड़ोसी था... लेकिन क्या पता था वो ऐसी हरकत करेगा : मैं अदालत के फैसले खुश हूं। हम भी चाहते थे कि उसे फांसी से कम सजा न मिले। ऊपर वाले ने इंसाफ कर दिया है। अब उस दरिंदे को जल्दी फांसी दी जाए, जिससे और लोगों में भी डर पैदा होगा। हमारी बच्ची के साथ जो हुआ वह और किसी की बच्ची के साथ न हो। वो हमारा पड़ोसी था। पड़ोसी ही सुख-दुख में काम आते हैं। किसी के दिल में बेइमानी रहे तो वो कोई क्या पता करे। शुरू में पुलिस का रवैया ठीक नहीं था, लेकिन बाद में पुलिस ने अच्छा काम किया तभी आरोपी को फांसी की सजा मिली। - जैसा बेबी की मां ने बताया

 

....अौर इधर अब भी इंसाफ का इंतजार : ऐसी ही घटना 30 अप्रैल को 12 साल की बच्ची के साथ मनुआभान की टेकरी पर हुई थी। दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज गया, लेकिन 72 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस अभी भी चालान पेश करने की स्थिति में नहीं है।

 

हमें तो डर लगने लगा है कि पुलिस सबूत ही नष्ट न कर दे... पुलिस ने पहले कहा था कि पर्याप्त सबूत मिल चुके हैं, एक महीने में चालान पेश कर देंगे। लेकिन तीन महीने होने को आ गए। कभी कहते हैं डीएनए रिपोर्ट आ गई है, एक-दो दिन में चालान पेश कर देंगे। कभी कहते हैं कि अभी सागर से रिपोर्ट नहीं आई है। डीआईजी कहते हैं कि भरोसा रखो, लेकिन जब अपनों ने ही धोखा दिया तो भरोसा किस पर करें। हमें  चिंता इस बात की है कि पुलिस कहीं सबूत ही नष्ट न करे दे। बच्चियांें से घिनौनी हरकत करने वालों को तो बीच रास्ते में फांसी देनी चाहिए। 
(जैसा मनुअाभान की टेकरी पर दुष्कर्म और हत्या की पीड़िता की मां ने बताया)

 

 पुलिस से सवाल : मनुआभान टेकरी मामले का चालान कब सबमिट होगा? शाहजहांनाबाद सीएसपी, एनके पटेरिया का जवाब: सागर से डीएनए रिपोर्ट आना बाकी है। रिपोर्ट आने के बाद चालान पेश किया जाएगा। चालान पेश करने में एक पखवाड़े का समय अभी और लग सकता है। 

 

भोपाल कोर्ट से पहले भी हो चुकी है फांसी की सजा : 

 

  • जून 2007: बच्चियों से ज्यादती और  हत्या करने वाले दिलीप बनकर को फांसी की सजा सुनाई। मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
  • मार्च 2013 : नंदकिशोर को को फांसी की सजा सुनाई । हाईकोर्ट ने बरकरार रखी।सुप्रीम कोर्ट ने सजा 25 साल कर दी। 
  • कोहेफिजा में बेटी से दुष्कर्म व हत्या करने वाले पिता को  फांसी की सजा सुनाई, लेकिन हाईकोर्ट ने उसे 30 साल की सजा में बदला। 
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