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पैसों की अर्थव्यवस्था ने ही नष्ट कर दी हैं संस्कृतियां

3 वर्ष पहले
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पैसों की अर्थव्यवस्था ने संस्कृतियों को नष्ट करने मंे बड़ी भूमिका निभाई है। मैंने विजयवाड़ा से 40 किमी दूर उक्कलपाडू गांव मे धान के क्षेत्रों मे बिखरे आर्टिफैक्ट्स को संग्रहित कर पंचायत की सहायता से संग्रहालय बनाया, तो ऐसे ही संग्रहालय अन्य जगहों में क्यों नहीं बनाए जा सकते। यह कहना है एन श्रीधरन का जो मानव संग्रहालय में गुरुवार को विंटर स्कूल के शुभारंभ अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि संस्कृति के सभी पक्षों को जो जहां पर है, जैसी स्थिति में है, उसी जगह संरक्षित करने पर जोर दिया जाना चाहिए और विंटर स्कूल से मिलने वाले प्रायौगिक ज्ञान को पूरे भारत भर में फैलाने का अनुरोध किया ताकि लोग जागरूक हों।

मानव जाति की समझ को समझना ही है उद्देश्य

विंटर स्कूल का परिचय देते हुए कल्चरल क्यूरेटर रॉल्फ किल्लियस ने कहा कि परस्पर संवादात्मक कार्यक्रम है इसमें पहले हम लोग आपस में संवाद करेंगे आप लोग अपने-अपने क्षेत्र का अनुभव साझा करेंगे और मैं अपने क्षेत्र का अनुभव साझा करूंगा। मानव संग्रहालय निदेशक प्रो. सरित कुमार चौधुरी ने कहा विंटर स्कूल का उद्देश्य मानव जाति की समझ को समझने के संदर्भ मंे किया गया है।

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