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भोपाल / काम वो करना चाहिए, जो आप दिन में 19 घंटे भी करें तो अहसास न हो कि काम कर रहे थे : प्रह्लाद कक्कड़



एड गुरु प्रह्लाद कक्कड़। एड गुरु प्रह्लाद कक्कड़।
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एड गुरु प्रह्लाद कक्कड़।एड गुरु प्रह्लाद कक्कड़।

  • TSVS फाउंडर्स-डे संस्कारोत्सव पर एड गुरु प्रहलाद कक्कड़ ने इंस्पायर किया बच्चों और पेरेंट्स को 
  • इस कहानी से लर्निंग- पेरेंट्स बच्चों को उनके ड्रीम्स फॉलो करने दें, अपनी इच्छाएं उन पर न थोपें 
  • जिमी चू का उदाहरण देकर कहा, उन्हें मोची बनना था, इंजीनियर नहीं, आज उनके एक जोड़ी सैंडल 12 हजार यूएस डॉलर में बिकते हैं 

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2018, 11:36 AM IST

भोपाल. प्रह्लाद कक्कड़ की स्पीच उन्हीं की जुबानी- मैंने अपने स्कूल की शुरुआत सपने देखने से की थी। क्लासरूम में आंखें खोलकर सपने देखता... कभी ड्रैगन के तो कभी घोड़ों के। स्पेशली फिजिक्स और मैथ्स की क्लास में। मैं डे ड्रीमर था और इसके लिए मुझे कई बार पनिश्मेंट भी मिली। आज उन्हीं सपनों के कारण पूरी दुनिया मुझे पूछती है। कोई भी एक बच्चा दूसरे सा नहीं होता, हर बच्चे के अपने सपने होते हैं और उन्हें उनके सपने देखने देने चाहिए।

 

(कक्कड़ ने एक कहानी शुरू की) 
एक लड़का था, बेस्ट इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट के फोर्थ ईयर में। छुट्‌टी पर घर आया और बोला- पढ़ाई से ड्रॉप लेना चाहता हूं। घरवाले शॉक्ड थे। पिता ने पूछा- अगर तुम इलेक्ट्रिकल इंजीनियर नहीं बनना चाहते, तो क्या बनना चाहते हो। बेटे ने जवाब दिया- मैं एक मोची बनना चाहता हूं। पिता को ऑलमोस्ट माइल्ड अटैक आ गया, एम्बुलेंस बुलानी पड़ी। मां ने कहा- हमने तुम्हारे लिए कितने सपने देखे थे, कि तुम अगले साल इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हो जाओगे और हमें पहली विदेश यात्रा का मौका दोगे, हमने पासपोर्ट भी रेडी करवा लिए थे। यह कैसा लड़का है, जो मां-बाप को खुशियां नहीं देना चाहता। आपको पता है, उस लड़के का नाम क्या था? ... जिमी चू। जी हां, यह वही जिमी चू है, जिसकी ब्रांड के लेडीज सैंडल करीब 12 हजार यूएस डॉलर्स में बिकते हैं। 


हम क्यों अपने बच्चों के साथ अपाहिजों की तरह व्यवहार करते हैं और इतनी केयर और सिक्योरिटी देना चाहते हैं कि मानो वे अपने पैरों पर खुद खड़े ही नहीं हो पाएंगे। बच्चों पर भरोसा करना शुरू करेंगे, तभी वो खुद पर भरोसा कर पाएंगे।  काम वो करना चाहिए, जो आप दिन में 19 घंटे भी करें, तो अहसास न हो कि आप काम कर रहे थे। मुझे मर्फी की एक बात याद आती है, If any thing can go wrong, it will go wrong. अपने बच्चे को वर्स्ट के लिए तैयार करना, न कि बेस्ट के लिए।

 

आज अगर आप बच्चों को प्रेशर में डालकर उन पर अपनी इच्छा थोपेंगे, तो 35 की उम्र में वे अपने काम से बोर हो जाएंगे, लेकिन उस वक्त उनके पास लौटने का ऑप्शन नहीं होगा। अपने एम्बिशंस को बच्चों पर न थोपें, पेरेंट्स जो खुद नहीं बन पाते, वे अपने बच्चों को बनाना चाहते हैं। हकीकत यह है कि 12वीं क्लास तक अधिकतर बच्चे इतने मैच्योर नहीं होते कि तय कर सकें आखिर वे क्या बनना चाहते हैं। 12वीं के बाद स्टूडेंट्स को एक साल का गैप ईयर मिलना चाहिए, जब वे दुनियाभर की यूनिवर्सिटीज में एक-एक महीने का समय बिताएं, दुनिया देखें और फिर फैसला लें। 

 

मैं इस मामले में खासा लकी रहा, शुरुआत से ही डफर था, इसलिए जो भी करता था, वहीं ब्रिलिएंट वर्क माना जाता था। जब मेरा बेटा भी मेरी तरह डफर निकलने लगा, तब हमने उसका टेस्ट करवाया और तब पता चला कि उसे डिसलेक्सिया है, और जब यह पता चला कि यह हैरिडिट्रिकल है, तो सबने मेरी तरफ देखा। दुनिया में जो भी गिने-चुने जीनियस हैं, वे डिसलेक्सिक हैं। मैं तो यह जानकर बड़ा वॉव फीलिंग में था कि अब मैं उस क्लब का हिस्सा हूं, जहां सबसे ज्यादा जीनियस हैं। 

 

अाज के समय में बच्चों में सबसे ज्यादा डर फेल होने का है। मैं अपने स्कूल में लोगों का डर ऐसे ही निकालता हूं। जिनको सांप से डर लगता है, उनको सांपों के बीच एक हफ्ते के लिए छोड़ दो, वे खुद सीख जाएंगे कि 96% सांप तो पॉइजनस नहीं होते। हर जानवर में डर को सूंघ लेने की शक्ति होती है, आप किसी जानवर से जीतना चाहते हैं तो अपने डर पर कंट्रोल करें। 

 

समुद्र सबसे बड़ा टीचर 
मैंने स्कूबा डाइविंग भी ऐसे ही शुरू की थी। मुझे लगता है कि समुद्र ही सबसे बड़ा टीचर है। आप उसके नियमों पर चलते हैं, तो आपको अपनी ही तरह मजबूत बना देता है। नियमों के खिलाफ चलेंगे, तो आप मर भी सकते हैं। नेचर हमें सबकुछ सिखाती है, हम लालच में उसी नेचर को खराब कर रहे हैं। 

 

वैल्यू क्रिएट करो 
आपको पता है, पैसा आता-जाता रहता है। बेहतर है वैल्यू क्रिएट करो, जब आप खुद को वैल्यूएबल बनाएंगे, तो पैसा खुद ही आपके पीछे जाएगा। 


 

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