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भोपाल / जो खुलकर नहीं बोलते, मुंहफट नहीं होते उन्हें लीडर नहीं माना जाता :कक्कड़



एड गुरु प्रह्लाद कक्कड़। एड गुरु प्रह्लाद कक्कड़।
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एड गुरु प्रह्लाद कक्कड़।एड गुरु प्रह्लाद कक्कड़।

  • बच्चों पर भरोसा करो, तभी वो खुद पर भरोसा कर पाएंगे, बेबाकी ही क्रिएटिविटी का कायदा 

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2018, 11:53 AM IST

भोपाल. जब तक आप खुल कर अपनी बात नहीं कहते, मुंहफट नहीं होते, जो सच है वो नहीं बोलते तो आपको लीडर नहीं माना जाता। यही वजह है कि देश में एड गुरु कम हैं। जो कहा उसकी जिम्मेदारी लेना कोई नहीं चाहता। बेबाकी ही क्रिएटिविटी का कायदा है।

 

यह कहना है एड गुरु प्रह्लाद कक्कड़ का। अपने पैशन-प्रोफेशन, एडवरटाइजिंग और लाइफ पर उन्होंने भास्कर से बात की। 

 

Q. आप स्कूबा डाइवर हैं, होटेलियर, डायरेक्टर और एड गुरु भी। आपके लिए क्या सबसे खास है? 

 

A. ये तो वही हुआ कि मां के चार बच्चे हैं और उससे पूछा जाए कि क्या ज्यादा प्यारा है? डाइविंग, एड, फूड और डायरेक्शन चारों ही मेरे लिए पैशन है। सभी ने मुझे वो सब चीजें मुहैया करवाई जो जीने के लिए जरूरी थीं। 

 

Q. आपने पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों के लिए एड बनाए। उनमें क्या अलग है? 


A. पाकिस्तान और बांग्लादेश का कल्चर लगभग हमारे जैसा है तो उनके एड भी हमारे जैसे ही हैं। पाकिस्तान में हमारे पंजाब से ज्यादा पंजाबी हैं। वो वैसे ही गाली बकते हैं जैसे हमारे यहां के पंजाबी। 

 

Q. आपने कहा कि आइडिया चोरी हो जाना एड वर्ल्ड में न्यूकमर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, क्यों? 


A. जूनियर्स चार आइडियाज लेकर आते हैं... उन्हें ये नहीं पता होता कौन सा दौड़ेगा, कौन सा नहीं। यह सीनियर अपने अनुभव के मुताबिक बता पाता है। कई बार सीनियर कहता है मैं चमकाता हूं इसे और वह आइडिया उसका हो जाता है।

 

ब्रांड मोदी कैम्पेन ही था जिसने उन्हें जिताया 
Q. एक रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल भाजपा सबसे बड़ी एडवेटाइजर है। क्या राजनीति और चुनाव में एड मददगार हो सकते हैं? 


A. आपका प्रोडक्ट अच्छा होगा तो ही एड काम का है। बुरे प्रोडक्ट के लिए एड कोई काम नहीं आता। अगर खुद की छाती पीटकर कहोगे कि मैं इतना अच्छा, तो लोग उसे पसंद नहीं करेंगे। लेकिन अगर एड में लोग कहेंगे कि इसने अच्छा काम किया है तो उसे समझेंगे। इस जगह भाजपा प्रोडक्ट है तो वह खुद अपने बारे में नहीं कह सकते कि मैं अच्छा हूं। वरना इंडिया शाइनिंग के बाद वह क्यों हार गए? सरकारी एड अब बदल गए हैं। ब्रांड मोदी कैम्पेन ही था, जिसने उन्हें जिताया। भाजपा के एड के चलते ही वह युवाओं तक पहुंच पाए। 

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