भोपाल / विसर्जन के दौरान हादसे में बचा कमल, भाई की हुई मौत; घटना की पूरी कहानी उसी की जुबानी



हादसे में बचे कमल राना (बीच में) को भाई का अंतिम संस्कार कराने के लिए ले जाते परिचित। हादसे में बचे कमल राना (बीच में) को भाई का अंतिम संस्कार कराने के लिए ले जाते परिचित।
भाई हरि की चिता को अग्नि देने के बाद बाद कमल को संभालते बस्ती के लोग। भाई हरि की चिता को अग्नि देने के बाद बाद कमल को संभालते बस्ती के लोग।
कमल के भाई हरि के शव के पास बैठे परिजन। कमल के भाई हरि के शव के पास बैठे परिजन।
कमल को ढांढस बंधाते परिजन एवं अन्य। कमल को ढांढस बंधाते परिजन एवं अन्य।
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हादसे में बचे कमल राना (बीच में) को भाई का अंतिम संस्कार कराने के लिए ले जाते परिचित।हादसे में बचे कमल राना (बीच में) को भाई का अंतिम संस्कार कराने के लिए ले जाते परिचित।
भाई हरि की चिता को अग्नि देने के बाद बाद कमल को संभालते बस्ती के लोग।भाई हरि की चिता को अग्नि देने के बाद बाद कमल को संभालते बस्ती के लोग।
कमल के भाई हरि के शव के पास बैठे परिजन।कमल के भाई हरि के शव के पास बैठे परिजन।
कमल को ढांढस बंधाते परिजन एवं अन्य।कमल को ढांढस बंधाते परिजन एवं अन्य।

  • हादसे में कमल राना खुद तो बच गए लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी अपने भाई हरि को नहीं बचा सके
  • कमल ने बताया- रात करीब 3 बजे खटलापुरा घाट पहुंचे, वहां पुलिस का कोई जवान नहीं था

Dainik Bhaskar

Sep 13, 2019, 05:07 PM IST

भोपाल. राजधानी भोपाल स्थित छोटे तलाब के खटलापुरा घाट पर शुक्रवार तड़के गणेश विसर्जन के दौरान नाव डूबने से 11 युवकों की मौत हो गई। इस हादसे में 6 युवक बच गए। इनमें एक है कमल राना। हालांकि, कमल खुद तो बच गए लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी अपने भाई हरि को नहीं बचा सके। हरि की इस हादसे में डूबने से मौत हो गई। कमल ने पूरी घटना के बारे में विस्तार से बताया।

 

100 क्वाटर इलाके में रहने वाले कमल राना ने बताया- हम लोग रात करीब 3 बजे खटलापुरा घाट पर पहुंचे। यहां पुलिस का कोई जवान नहीं था। कोई किसी को रोकने टोकने वाला नहीं था। हमने घाट पर मौजूद नाव वालों से गणेश प्रतिमा विसर्जन की बात की। उन्होंने पहले दो हजार रुपए मांगे। बाद में एक हजार रुपए में बात तय हुई। नाविकों ने दो नावों को जोड़ने के लिए दो लोहे की चद्दर वाले पटले रख लिए। 


उन्होंने बताया, 'प्रतिमा विसर्जन के लिए बस्ती से करीब 70-80 लोग आए थे। सभी ने आरती के बाद प्रतिमा को नाव में रख दिया। इसके बाद हम 19-20 लड़के नाव में प्रतिमा विसर्जन के लिए बैठ गए। नाव कुछ दूर ही गई होगी कि प्रतिमा वाली साइड से नाव में पानी भरने लगा।'

 

'जब हम लोगों ने यह बात नाविक को बताई तो उसने दूसरी तरफ बैठने को कहा। कुछ लोग दूसरी नाव में आकर बैठ गए। जैसे ही हम लोग दूसरी नाव में बैठे इसमें भी तेजी से पानी भरने लगा। हम लोगों ने नाविक को बताया तो उसने कहा कुछ नहीं होगा।' 


कमल बताते हैं, 'फिर कुछ मिनट बाद नाविक ने हमसे प्रतिमा विसर्जित करने को कहा। हमने प्रतिमा को धक्का दे दिया। जैसे ही प्रतिमा को धक्का दिया नाव का बैलेंस बिगड़ गया और नाव डूबने लगी। हमारे साथी नाव में बैठे-बेठे ही डूबने लगे। कुछ कूद गए। मैं भी तैरकर दूसरी नाव तक पहुंचा। लेकिन वो भी डूबने लगी।'

 

'मेरे दोस्त मेरे सामने डूब गए। मुझे तैरना आता था। थोड़ी देर तालाब में तैरता रहा। लेकिन कुछ कर नहीं सका। इसके बाद एक नाव आई उसमें चढ़ गया। तब तक सभी डूब गए थे। नाव में मेरे साथ मेरा भाई हरि भी सवार था। मैंने थोड़ी देर उसे तैरकर इधर-उधर देखा लेकिन तब तक वह डूब गया था।'

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