मप्र / 160 रुपए प्रति एकड़ में फसल होगी सुरक्षित, सरकार देगी कीटनाशक



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  • मध्यप्रदेश सरकार मार्कफेड के माध्यम से उपलब्ध कराएगी कीटनाशक
  • सरकार ने निर्णय लिया कि किसानों को 50 फीसदी अनुदान पर दवाई उपलब्ध कराई जाएगी

Dainik Bhaskar

Jul 23, 2019, 05:17 PM IST

भोपाल। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तरप्रदेश सहित देशभर में अमेरिकी कीड़ा फॉल आर्मी वर्म वायरस का अटैक पैर पसार रहा है। यह कीड़ा पत्ती के हरे भाग को खुरज-खुरज के सेवन करती है इससे पत्ती में सफेद रंग का धब्बा बन जाता है। यह कीड़ा मक्का के अलावा धान, कपास, गन्ना समेत 180 पादप प्रजातियों को बर्बाद कर देता है। 

 

इससे बचाने के लिए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को अलर्ट जारी कर कृषि वैज्ञानिकों को सलाह देने संबंधित निर्देश भी जारी कर दिए हैं। यह कीड़ा व्यापक स्तर पर छिंदवाड़ा जिले के अमरवाड़ा, परासिया, चैरई और बिछुआ विकासखंड के क्षेत्र में देखने को मिला है। इसके बाद मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने निर्णय लिया कि किसानों को 50 फीसदी अनुदान पर दवाई उपलब्ध कराएगा। उधर, जैविक पद्धति या घरेलू उपाय से भी इस कीट का प्रकोप खत्म किया जा सकता है। इसके लिए सेंधा नमक या राख से फसल को बर्बाद होने से रोका जा सकता है। 

 

प्रदेश सरकार मार्कफेड के माध्यम से एमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी 100 मिली और 250 मिली की बोतल का पैक खरीद लिया है। इसे सरकार ने प्रभावित जिलों को भेज भी दिया है। सूत्रों के अनुसार 100 मिली की बोतल 320 और 250 मिली की बोतल की कीमत 760 रुपए है, जो किसानों को सिर्फ 160 रुपए और 380 रुपए में मिल जाएगी। यह दवाई पहले उन किसानों को प्राथमिकता से दी जाएगी, जहां पर इस कीट का प्रकोप अधिक है। 

 

एक हजार तक देती है अंडे 
अंडा : बारिश के शुरुआत में ही इस कीट प्रौढ़ बड़ी संख्या में दिखती है। ये शीत निष्क्रियता तथा ग्रीष्म निष्क्रियता कर रहे कृमिकोषों से निकलने के बाद ही ये मैथुन करते हैं। मादा कीट फसलों, जंगली घासों, खरपतवारों आदि की पत्तियों की निचले सतह पर अंडे देते हैं। मादा प्राय: अंडे 50-100 तक के झुंडों में देती है। एक मादा अपने जीवनकाल में लगभग 1000 अंडे देती है। 

 

शरीर बाल से ढंका रहता है 
सुंडी : अंडों से निकलने के बाद ही सुंडियां शुरुआत में तथा बाद में इधर-उधर फैलकर पत्तियां खाती है। यह समय यह 10-15 मिमी लंबी होती है। शरीर पर बाल होते हैं। पूर्ण विकसित गिडार छह बार त्वचा निर्माेचन करने के बाद लंबी हो जाती है। इसे पूर्ण विकसित होने पर उचित वातावरण मिलने पर 15 से 20 दिन का समय लगता है। इसके बाद यह कोषावस्था में बदलती है। 

 

ये उपाय करें किसान 

  • लार्वा अवस्था को नष्ट करने के लिए क्विनालफॉस 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। 
  • इल्ली के नियंत्रण के लिए इन्डॉक्साकार्ब 14.5 एससी 400 मिली प्रति हेक्टेयर या लेमडा सायहेलोथ्रिन 4.9 ईसी 750 मिली प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी में चिपको के साथ घोलकर छिड़काव करें। 
  • संभव हो तो खेत के आस-पास एक फीट गहरी नाली खोदें। 

 

इधर, कई फसलों में कामलिया कीट का प्रकोप बढ़ा 
बारिश न होने से सोयाबीन, तिल, मूंग, उड़द, अलसी, सरसों में कामलिया कीट का प्रकोप बढ़ रहा है। इस कीट की केवल सुंडी ही हानि पहुंचाती है, प्रौढ़ कीट क्षति नहीं करते, केवल संतति बढ़ाने में सहायक होते हैं। सुंडी के काटने तथा चबाने वाले मुखांग होते हैं। यह पौधे के कोमल भागों विशेषकर पत्तियों को खाते है। नवजात सुंडियां झुंड में पत्तियों की सतह को खाती है। इससे उनकी हरी परत खत्म हो जाती है। इसके जीवन चक्र में चार अवस्थाएं अंडा, सुंडी, कृमिकोष तथा प्रौढ़ मिलती है। 

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