लोकसभा चुनाव / पहले बूथ लूटे जाते थे, अभी वादों से चुनाव लूटा जा रहा है, गंगा पर वादे नहीं हो रहे, क्योंकि इस मुद्दे पर वोटर्स को अब मूर्ख नहीं बना सकते : राजेंद्र

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2019, 05:46 AM IST



First booths were looted, elections are now being looted by promises
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First booths were looted, elections are now being looted by promises
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  • वॉटरमैन के नाम से प्रख्यात राजेंद्र सिंह ने जारी किया घोषणा पत्र

भोपाल | देशभर में वॉटरमैन के नाम से प्रख्यात और जल-जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक राजेंद्र सिंह भी इस लोकसभा चुनाव में घोषणा पत्र लेकर आए हैं। मंगलवार को भोपाल के गांधी भवन में जनता का घोषणा पत्र जारी करते हुए उन्होंने राजनीतिक दलों के घोषणा पत्रों में पानी के मुद्दों की अनदेखी का मामला उठाया।

 

जंगल की जमीन उद्योग को देना बंद नहीं हुई तो धरती को बुखार आ जाएगा

 

हमारे राजनेताओं की आंखों का पानी नदियों और जलाशयों के लिए सूख जाएगा तो धरती भी बेपानी होने लगेगी। हमारे नेता वोट तो मांग रहे हैं, लेकिन उनके मुद्दों में पानी की कहीं कोई बात नहीं है। इनके घोषणापत्रों में पानी की कोई चिंता नजर नहीं आती। पहले चुनाव में बूथ लूटे जाते थे, अब लोक-लुभावने वादे कर चुनाव लूटा जा रहा है। गंगा की सेहत पर अब वादे नहीं हो रहे, क्योंकि अब नेता इस मुद्दे पर मतदाताओं को मूर्ख नहीं बना सकते। इस बार जब लोग अपना प्रतिनिधि चुनें, तो यह जरूर देखें कि उनका प्रतिनिधि या पार्टी पानी को लेकर कुछ सोचते भी हैं या नहीं। लोगों को पानी के मुद्दों से अवगत कराने के लिए जल जन जोड़ो अभियान और जल बिरादरी की ओर से चुनावी घोषणा पत्र जारी किया है। यह चुनावी घोषणा पत्र हम देश के अलग-अलग राज्यों में ले जा रहे हैं, ताकि लोगों को पता हो कि वे अपने राजनेताओं से क्या सवाल पूछें। आज देश के 17 राज्य और 366 जिले सूखे के खतरे पर हैं। जंगलों की जमीन वहां के लोगों से छीनकर इंडस्ट्रियलिस्ट् को देना बंद नहीं किया, तो धरती को बुखार आएगा ही। मैंने 42 सालों में 12 नदियों को जिंदा किया है। लोग भी कर सकते हैं, लेकिन राह में मुश्किलें कम आएं, इसलिए जरूरी है कि राजनेता भी वो ही चुनें, जो पानी को बचाने और नदियों को संरक्षित करने के लिए अापके जितना ही गंभीर हो। मैं अकेले काम कर रहा था, इसीलिए मेरे खिलाफ 377 मुकदमे हुए।

 

यह होने चाहिए जनता के मुद्दे : 

 

  • पर्यावरण संरक्षण के लिए एक मजबूत कानून बने, जिसको लागू कराने के लिए स्वतंत्र, सशक्त प्राधिकरण की स्थापना की जाए। 
  • नदियों में गिरने वाले अपशिष्टों को पूरी तरह से रोका जाए। नदियों के तट से हो रहे अवैध खनन को रोकने के लिए कानून बनाए जाए। नदी-घाटी संगठनों का निर्माण किया जाए। {भारत में वन कानून को फिर से परिभाषित किया जाए, स्थानीय समुदायों को वन और वन संसाधनों का संरक्षक बनाया जाए। 
  • तालाबों के संरक्षण के लिए एक राष्ट्रीय स्तर पर ईकाई बनाई जाए, जो तालाबों के संरक्षण के लिए पूर्णत: जवाबदेह हो।

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