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पति का आरोप- पत्नी को झूठे मामले में फंसाया व उसे बिना महिला आरक्षक के किया गिरफ्तार

Dainik Bhaskar

May 03, 2018, 01:33 AM IST

बेंच में सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि पुलिस को रात में महिला को अरेस्ट नहीं करना चाहिए था।

First time hearing in Women Commission bench on man application

भोपाल. महिला आयोग की बेंच में बुधवार को पहली बार किसी पुरुष के द्वारा दिए गए आवेदन पर सुनवाई हुई। पीड़ित ने पुलिस पर झूठे केस में पत्नी को आरोपी बनाने और बिना महिला आरक्षक उसे गिरफ्तार करने का आरोप लगाया है। इस पर आयोग ने अनावेदक थाना प्रभारी प्रज्ञा नाम जोशी को फटकार लगाई। साथ ही आवेदक को राहत देते हुए मामले में डीजीपी भोपाल और एसपी से जांच रिपोर्ट तलब की है। बेंच में मामले की सुनवाई सदस्य अंजू बघेल और गंगा उइके ने की।


महिला आयोग में अनिल कुमार सिंह ने 26 फरवरी 2018 को शिकायती आवेदन दिया था। इसमें बताया था कि उसकी पत्नी संगीता सिंह को पुलिस ने झूठे केस में अरेस्ट किया था। उसकी पत्नी को जब गिरफ्तार किया था उस समय महिला आरक्षक नहीं थी, सभी पुरुष आरक्षक रात को थाने में थे। पत्नी को महिला थाने में रात को शिफ्ट नहीं किया गया था। महिला थाना प्रभारी लॉकअप में उनकी पत्नी को छोड़कर घर चली गई थीं।

आयोग ने आवेदन पर संज्ञान लेते हुए अवधपुरी थाना प्रभारी को तलब कर लिया। बेंच में सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि पुलिस को रात में महिला को अरेस्ट नहीं करना चाहिए था। यदि अरेस्ट किया गया था तो उसे महिला थाने में रखा जाना चाहिए था। महिला आयोग की सदस्य अंजू बघेल ने मामले में तर्क दिया कि पीड़ित पुरुष अपनी पत्नी के संबंध में न्याय मांगने आया था, इसलिए मामले को ग्राह्य किया गया।

मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत मकान दिलाने के नाम पर 17 लोगों से की ठगी

सुनवाई के दौरान तत्कालीन थाना प्रभारी जोशी ने आयोग को बताया कि संगीता और अन्य महिला कविता पर आरोप है कि उन्होंने मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत मकान दिलाने के नाम पर 17 लोगों से 2 से ढाई लाख रुपए की ठगी की। मामले में दोनों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज है । दोनों को गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया था, जहां से जेल भेज दिया।

आयोग का अपना संविधान होता है, पुरुष आवेदक की सुनवाई करने का अधिकार नहीं
महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष उपमा राय का कहना है उनके कार्यकाल में भी कई पुरुष आवेदन लेकर आते थे, लेकिन उनके मामलों को कभी ग्राह्य नहीं किया गया। आयोग का अपना संविधान है, इसके अनुसार केवल महिलाओं के आवेदन को ग्राह्य करने का प्रावधान हैं। पुरुष के आवेदन पर सुनवाई नहीं की जा सकती है।

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