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फूट सकता था गांधी सागर डैम, रूस के चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र जैसा हादसा हो जाता

9 महीने पहले
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  • जल संसाधन मंत्री कराड़ा का बड़ा खुलासा, राजस्थान के परमाणु संयंत्र में पानी घुसने का खतरा था
  • भिंड-मुरैना की तरफ पानी मोड़कर तबाही को रोका

शाजापुर . नीमच-मंदसौर जिले में सितंबर में हुई भीषण बारिश के दौरान गांधी सागर डैम के गेट खोलने के मामले में प्रदेश के जल संसाधन मंत्री हुकुमसिंह कराड़ा ने बड़ा खुलासा किया। उन्होंने पहली बार माना की बांध के गेट यदि समय रहते नही खोले जाते तो इसके फूटने का खतरा बढ़ गया था। और यदि ये फूट जाता तो राजस्थान स्थित रावतभाटा परमाणु ऊर्जा संयंत्र में पानी घुस जाता। इससे रेडिएशन फेल सकता था और यह हादसा रूस में चेर्नोबिल परमाणु हादसा जैसा हो जाता।
 
कोटा सहित कई शहरों में तबाही मचती और हालात बेेकाबू हो जाते। कराड़ा ने मीडिया से बात करते हुए आगे कहा कि लगातार डेम में पानी आने की स्थिति को लेकर लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला (कोटा सांसद), प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर मप्र व राजस्थान सरकारों की सांसे फूल गई थीं। परमाणु त्रासदी होने से बचाने के लिए तत्काल डैम के गेट खोलकर पानी को भी भिंड-मुरैना की तरफ मोड़ दिया गया। इससे वहां के तीन जिलोंं में बगैर बारिश हुए बाढ़ झेलना पड़ी और कई मकान पानी में बह गए। उल्लेखनीय है सितंबर में हुई तेज बारिश के दौरान मंदसौर-नीमच जिले के कई गांव उजड़ गए। 25 हजार लोगों को रेस्क्यू कर बचाना पड़ा। 

बांध बने 59 साल पूरे
गांधी सागर बांध देश के 4 बड़े बांध में एक है। जो मप्र व राजस्थान की सीमा पर चंबल नदी मंे मंदसौर-नीमच जिलों में स्थित है। यह एक चिनाई वाला गुरुत्वाकर्षण बांध है। इस बांध की नींव 7 मार्च 1954 में पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी। 6 साल में यह डेम बनकर तैयार हो गया। 6 साल बाद 19 नवंबर 1960 को पूरा हो गया था। इस बांध को बने पूरे 59 साल हो चुके है।
 

रूस में गई थी 4000 से ज्यादा की जान
1986 में रूस में हुए हादसे में 4000 लोगों की जान चली गई थी और 40 हजार से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हुए थे। कई लोग अब भी रेडिएशन के शिकार हो रहे हैं। 

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