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बिना अनुमति लगाई गई थी गेंट्री, निगम के सर्वे ने पहले ही बताया था कंपनी कर रही है गड़बड़ी

बाणगंगा चौराहे की जो गेंट्री आंधी के दौरान गिरी वह लापरवाही पूर्ण तरीके से लगाई गई थी।

Bhaskar News | Last Modified - May 03, 2018, 12:23 AM IST

  • बिना अनुमति लगाई गई थी गेंट्री, निगम के सर्वे ने पहले ही बताया था कंपनी कर रही है गड़बड़ी

    भोपाल.एक बेमौसम आंधी से धराशायी गेंट्री ने शहर भर में हुए इस भारीभरकम प्रयोग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गेंट्री लगाने वाली यूनिकॉर्प कंपनी की ओर से नियमों की खुलकर अनदेखी और नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई है। निगम की एक सर्वे रिपोर्ट पहले ही यह जाहिर कर चुकी थी कि कई जगहों पर बिना अनुमति के मनमाने ढंग से गेंट्री लगाई जा रही हैं। मगर किसी ने कंपनी की ओर उंगली नहीं उठाई।

    मंगलवार को बाणगंगा चौराहे पर जो गेंट्री गिरी वह भी बिना अनुमति के लगी थी। इतने व्यस्त चौराहे पर लग रही विशाल गेंट्री की पूरी जानकारी अफसरों को थी। निगम की ओर से 20 फरवरी को कंपनी को नोटिस जारी किया गया था। बेखौफ कंपनी ने इसका जवाब तक नहीं दिया। ऐसे में निगम की ओर से गेंट्री को हटाना था, लेकिन नोटिस का रिमाइंडर तक नहीं दिया।

    4 बड़ी लापरवाही.... हर स्तर पर हुई सिर्फ और सिर्फ अनदेखी

    1- तय शर्तों के मुताबिक कंपनी को गेंट्री की मजबूती का थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन कराना था। कंपनी ने ऐसा नहीं कराया।

    2- स्ट्रक्चर इंजीनियर से गेंट्री के बेस, पोल सहित तमाम स्ट्रक्चर की मजबूती की जांच कराना थी। ऐसा होता ताे यह हादसा नहीं होता।

    3- जांच में पास होने पर इसकी रिपोर्ट निगम को देना अनिवार्य था। अफसरों ने यह देखना उचित नहीं समझा कि रिपोर्ट आई या नहीं।

    4- शहर में पिछले डेढ़ साल में 150 से ज्यादा गेंट्री लगी हैं। निगम नेे निर्माण की गुणवत्ता को लेकर पूछताछ तक नहीं की गई।

    सर्वे में ही खुल गई थी पोल, बावजूद सब खामोश रहे

    निगम ने असिस्टेंट इंजीनियर अर्चना बाखले समेत 4 असिस्टेंट इंजीनियरों की टीम से गेंट्री का सर्वे कराया था। इस दौरान पाया गया था कि शहर में एक दर्जन स्थानों पर बिना अनुमति गेंट्री लगाई गई हैं। रिपोर्ट सबमिट होने के बाद होर्डिंग शाखा को कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उल्टा गेंट्री गिरने के बाद फिर सर्वे कराने की बात हो रही है।

    पोल पर लगा था 60 फीट का स्ट्रक्चर

    बाणगंगा चौराहे की जो गेंट्री आंधी के दौरान गिरी वह लापरवाही पूर्ण तरीके से लगाई गई थी। इसकी लंबाई 60 फीट थी। इसे दोनों किनारों पर पोल के भरोसे टिका दिया गया। यहां बीच में सपोर्टिंग पोल भी लगाया गया होता तो यह तेज हवा का दबाव सह पाती।

    ...और ये दलील

    यूनिकॉर्प एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर आशीष कुलश्रेष्ठ ने बताया कि बाणगंगा चाैराहे की गेंट्री को इंस्टाल करने का काम अभी पूरा नहीं हुआ था। गेंट्री की मजबूती के लिए सस्पेंशन रोप तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। रात के वक्त कांग्रेसियों ने गेंट्री पर अपना बैनर लगाया। इस कारण सस्पेंशन टाई खुल गई। यही वजह रही कि आंधी के कारण गेंट्री गिरी।

    नगर निगम गेंट्री प्रभारी पीके जैन ने बताया कि गेंट्री लगाने वाली कंपनी को नोटिस जारी किया है। पूरे शहर की गेंट्री का फिर सर्वे किया जा रहा है। इस आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    खामियों से भरपूर और खतरनाक
    मैनिट के असिस्टेंट प्रोफेसर एसपीएस राजपूत ने बताया कि इस तरह के स्ट्रक्चर जो जमीन से ऊपर होते हैं उनके लिए विंड प्रेशर टेस्ट होता है। इसके तहत हवा का अधिकतम प्रेशर डालकर मजबूती जांच जाती है। हवा का प्रेशर कम करने के लिए स्ट्रक्चर मजबूत और बोर्ड में होल किए जाते हैं। लेकिन, गेंट्री में न तो यह टेस्ट किया गया और न कोई उपाय किए गए।



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