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राजस्व भरपाई / शराब सिर्फ 5 रुपए महंगी कर दें सरकार तो 3.30 रु. लीटर सस्ता हो सकता है पेट्रोल



साल भर में शराब सिर्फ एक बार महंगी, पेट्रोल-डीजल 100 बार से ज्यादा। साल भर में शराब सिर्फ एक बार महंगी, पेट्रोल-डीजल 100 बार से ज्यादा।
Government fulfill revenue deficit by license fee of liquor
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साल भर में शराब सिर्फ एक बार महंगी, पेट्रोल-डीजल 100 बार से ज्यादा।साल भर में शराब सिर्फ एक बार महंगी, पेट्रोल-डीजल 100 बार से ज्यादा।
Government fulfill revenue deficit by license fee of liquor

  • एक साल में डीजल 11.82 रु, और पेट्रोल 10.16 रु. महंगा
  • देशी शराब सिर्फ 1.75 रु. और विदेशी 3 रुपए ही महंगी की

Dainik Bhaskar

Sep 14, 2018, 05:30 AM IST

भोपाल.  मध्यप्रदेश सरकार अगर शराब की लाइसेंस फीस केवल 9.30 फीसदी बढ़ा दे तो वह पेट्रोल 3.30 रुपए तक सस्ता कर सकती है। इससे शराब की सबसे छोटी बोतल (175 एमएल) के दाम केवल 5 रुपए ही बढ़ेंगे। राज्य में रोजाना 7 लाख लीटर शराब बिकती है। इस हिसाब से सालाना बिक्री करीब 25.50 करोड़ लीटर है। लीटर के हिसाब से यह बढ़ोतरी 30 रुपए के आसपास होगी।

 

सरकार की रोजाना कमाई 2.10 करोड़ ज्यादा होगी। यानी हर साल इससे 766 करोड़ मिलेंगे। इस अतिरिक्त राजस्व से सरकार पेट्रोल पर 3.30 रुपए का एडिशनल टैक्स घटाने की स्थिति में आ जाएगी। अभी वह हर लीटर पर 4 रुपए एडिशनल टैक्स ले रही है। राज्य में हर साल 230 करोड़ लीटर पेट्रोल बिकता है। इस फिक्स टैक्स से उसे 920 करोड़ मिलते हैं।

 

एडिशनल टैक्स 70 पैसे घटने से सरकार की कमाई घटकर 154 करोड़ ही रह जाएगी। घटे राजस्व की भरपाई वह शराब के राजस्व से हो जाएगी। पूर्व वित्त मंत्री समेत आर्थिक विशेषज्ञ यह मानते हैं कि सरकार को ऐसा करने में काेई परेशानी नहीं आनी चाहिए। पिछले 7 साल में सरकार की शराब से कमाई उतनी नहीं बढ़ी जितनी पेट्रोल डीजल से बढ़ी है।

 

ऐसे में उसके पास यह करने के अधिकार हैं। सरकार तर्क दे सकती है कि शराब की लाइसेंस फीस एक बार ही तय होती है। उसे दोबारा कैसे बढ़ाया जा सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर पेट्रोल के दाम एक साल में 100 बार बढ़ाए जा सकते हैं तो शराब की लाइसेंस फीस एक और बार बढ़ाने में क्या परेशानी?

-5 साल पहले तक सरकार को शराब से ज्यादा राजस्व मिलता था, लेकिन अब कमाई पेट्रो पदार्थों से ज्यादा हो रही है
-शराब की खपत 6 फीसदी और पेट्रोल-डीजल की खपत 5 फीसदी की दर से बढ़ती है


सरकार नहीं जानती तेल का अर्थशास्त्र :  शहर में ज्यादातर लोग अपने वाहन से चलते हैं। क्योंकि यहां का पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम पूरी तरह असफल है। ऐसे में सरकार को यह समझ में नहीं आता कि बढ़ते तेल के दाम से आम आदमी की बचत घट रही है। उसके लिए घर चलाना मुश्किल हो रहा है।

ऐसे में पेट्रोल के दाम घटाकर सरकार एक बड़ी आबादी को राहत प्रदान करेगी। बेशक वह अपनी लाइसेंस फीस बढ़ाकर शराब से कमाई बढ़ाए। - राजेंद्र कोठारी, औद्योगिक मामलों के जानकार
 

शराब की खपत बढ़ी :  राज्य सरकार ने शराब की खपत कम करने के कई उपाय जरूर किए हैं, लेकिन ये ज्यादा कारगर नहीं रहे। सालाना आधार पर शराब की खपत 8 फीसदी की दर से बढ़ रही है।  2016-17 तक शराब की खपत 25  करोड़ लीटर हो गई। एक वर्ष में सरकार ने विदेशी शराब के दाम 9.83 फीसदी ही बढ़ाए।


राजस्व की यह है हकीकत : शराब, पेट्रोल-डीजल और अन्य वैट वाली वस्तुओं सबमें बढ़ रही कमाई 

2016-17 के अंत तक सरकार को गैर पेट्रो पदार्थों से 16 हजार करोड़ रुपए की आय हुई थी। जीएसटी आने के बाद केंद्र सरकार इसमें 14 फीसदी कंपनसेशन दे रही है। 2017-18 में सरकार को 18.24 हजार करोड़ रुपए मिले हैं। इस साल भी इतने ही मिल जाएंगे।

-10 फीसदी आबकारी राजस्व में बढ़ोतरी का अनुमान है। यानी 9000 करोड़ रुपए यहां मिल सकते हैं।
-पेट्रोल पर 4 रुपए एडिशनल टैक्स घटाने से सरकार को 920 करोड़ और सेस घटने से 500 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। यानी सरकार की आय घटकर 8000 करोड़ रुपए रह सकती है।
-तीनो मदों को मिलाकर सरकार को कुल 33 हजार करोड़ रुपए मिलेंगे। अगर सरकार पेट्रोल-डीजल से एडिशनल टैक्स और सेस घटा ले।
-जीएसटी के पहले सरकार की कुल आय 30 हजार करोड़ रुपए के आसपास ही थी। फिर भी सरकार शराब महंगी करके इसकी भरपाई कर सकती है।

-हमने कलेक्टर को पत्र लिखकर कहा है कि शराब एक सामाजिक बुराई है। इस पर लाइसेंस फीस और बढ़ानी चाहिए। यह बेहद हैरानी वाली बात है कि शराब पर लाइसेंस फीस इतनी कम दर से बढ़ रही है। सरकार लाइसेंस फीस की आय से पेट्रोल पर एडिशनल टैक्स खत्म कर दे।- अंशु गुप्ता, महिला समाजसेवी
 

शराब लॉबी का दबाव ही एक वजह हो सकती है : हो सकता है राज्य सरकार पर शराब लॉबी का दबाव हो। अन्यथा शराब पर लाइसेंस फीस बढ़ाने का उसे पूरा अधिकार है। शराब के दाम बढ़ने से किसी को कोई परेशानी नहीं। लेकिन पेट्रोल के बढ़ते दाम तो जनआंदोलन खड़ा कर रहा है। बेहतर हो सरकार पेट्रोल सस्ता करे। भले ही भरपाई शराब से कर ले। - डॉ. श्रीराम तिवारी, अर्थशास्त्री

 

पेट्रोल-डीजल से कमाई शराब से ज्यादा :  पहले सरकार को शराब से ज्यादा राजस्व मिलता था पेट्रो पदार्थों पर टैक्स के जरिए होने वाली आय कहीं कम थी। लेकिन पिछले चार साल में यह स्थिति बिलकुल बदल गई है। 2017-18 में सरकार को शराब से 1100 करोड़ रुपए से ज्यादा की आय हुई। देखिए कैसे:-
             

 

वर्ष पेट्रोल-डीजल शराब
2011-12 4000  4317
2012-13         5000 5083
2013-14         5700 5908
2014-15 6832 6697
2015-16 7631 7926
2016-17  9160    7519
2017-18 9380    8223

 *राशि करोड़ रुपए में
स्रोत: पेट्रोलियम मंत्रालय और मप्र सरकार 

 

शराब पर टैक्स बढ़ाकर कैसे सस्ता हो सकता है पेट्रोल-डीजल

- अगर सरकार पेट्रोल डीजल पर 3.30 एडिशनल टैक्स घटा दे तो उसकी सालाना कमाई 920 करोड़ से घटकर 154 करोड़ रह जाएगी। यानी 766 करोड़ रुपए कम।

- इसकी भरपाई के लिए शराब की लाइसेंस फीस 9.30% बढ़ा देती है तो उसे 766 करोड़ रुपए की कमाई होगी। इसका भार एक शराब की बोतल पर 5 रुपए ही आएगा। -पूर्व मित्त मंत्री राघवजी के अनुसार

 

सरकार का दावा-पेट्रो पदार्थों का राजस्व 2000 करोड़ घटा, तेल कंपनियों के आंकड़े बता रहे 520 करोड़ ज्यादा कमाई : प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया ने कहा था कि पेट्रोल-डीजल से मिलने वाला राजस्व पिछले साल 2000 करोड़ रु. तक घट गया। लेकिन सरकारी क्षेत्र की तीनों तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के आंकड़ों से पता चलता है कि  कि 2017-18 में सरकार को पेट्रोल-डीजल से 220 करोड़ रु.ज्यादा मिले।

 

वह भी बिना एलपीजी के। क्योंकि एलपीजी सिलेंडर को जीएसटी में शामिल कर लिया गया है। सरकार को हर साल करीब 300 करोड़ रु. एलपीजी से मिलते थे। इसे भी शामिल कर लिया जाए तो तीनों पेट्रोल पदार्थों की बिक्री से सरकार को करीब 520 करोड़ रुपए ज्यादा मिले। इस बीच सरकार घटे टैक्स की भरपाई के लिए 1-1 फीसदी टैक्स सेस लगा चुकी है। इससे सरकार को इस बार 500 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय होने वाली है।

 

हम घाटा उठाने की स्थिति में नहीं : हम पेट्रोल-डीजल के दाम घटाने की स्थिति में नहीं हैं। सरकार ने पहले पेट्रोल-डीजल के दाम घटाए थे। उससे सरकार को 2000 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। - जयंत मलैया, वित्त मंत्री

शराब की लाइसेंस फीस बढ़ाओ : हम वित्त मंत्री थे तब शराब से  ज्यादा कमाई होती थी, पेट्रोल-डीजल से कम। सरकार को तुरंत पेट्रोल सस्ता करना चाहिए। वह शराब की लाइसेंस फीस बढ़ा सकती है। - राघवजी, पूर्व वित्त मंत्री

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