मप्र / राज्य सरकार हर जिले में नदी किनारे बनाएगी गौ-वंश अभयारण्य

मप्र सरकार गौवंश के लिए अभ्यारण्य बनाएगी। मप्र सरकार गौवंश के लिए अभ्यारण्य बनाएगी।
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मप्र सरकार गौवंश के लिए अभ्यारण्य बनाएगी।मप्र सरकार गौवंश के लिए अभ्यारण्य बनाएगी।

  • विदिशा में गौशाला निर्माण की समीक्षा पशुपालन मंत्री लाखन सिंह यादव ने दी जानकारी 
  • प्रदेश में 15 दिसंबर तक 1 हजार गौशालाओं का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा 

दैनिक भास्कर

Nov 07, 2019, 07:25 PM IST

विदिशा. मप्र सरकार राज्य के हर जिले में नदी किनारे की जमीन पर गौ-वंश अभयारण्य बनाएगी। विदिशा में गौशाला निर्माण कार्य का जायजा लेने पहुंचे पशुपालन मंत्री लाखन सिंह यादव ने ये जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निराश्रित गौ-वंश की देखभाल के लिए प्रदेश में एक हजार गौ-शालाओं का निर्माण कराया जा रहा है।

 

लाखन सिंह यादव ने कहा कि कुल 3 हजार गौ-शाला निर्माण के लिये भूमि चिन्हित की जा रही है। प्रथम चरण में 15 दिसंबर तक 1000 गौ-शालाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि गौ-शाला निर्माण कार्य में सरपंचों द्वारा व्यय की गई राशि उन्हें वापस दिलाएंगे। यदि कोई सरपंच फिर से चुनकर नहीं आता है, तो भी धनराशि वापस की जाएगी।

 

उन्होंने जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देशित किया कि गौ-शालाओं में जलापूर्ति के लिये ट्यूबवेल खनन कराएं। मनरेगा योजना में गौ-शाला निर्माण में राशि की कमी होने पर पंच-परमेश्वर योजना में पशुओं के लिये पीने के पानी की नालनुमा नाली बनवाई जाये। 

 

गौशालाओं में सोलर ऊर्जा पैनल लगाए जाएंगे

उन्होंने गौ-शालाओं में बिजली आपूर्ति के लिये बिजली कनेक्शन लेने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन गौ-शालाओं में सुगमता से बिजली की आपूर्ति संभव नहीं है, उनमें सोलर ऊर्जा सिस्टम से बिजली की व्यवस्था की जाए। उन्होंने निर्देश दिए गौ-शालाओं में बिजली की सुगम आपूर्ति की दृष्टि से गौ-शालाओं के समीप 25 केवी के ट्रांसफार्मर्स स्थापित किए जाएंगे।


पराली (नरवाई) न जलाए, उससे खाद बनाएं : कमलनाथ 

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने किसानों से पराली (नरवाई) नहीं जलाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अतिवृष्टि से आपकी फसलों को काफी नुकसान हुआ है और उसकी भरपाई के लिए शासन अपने स्तर पर निरंतर प्रयासरत है। हमने केंद्र सरकार से इसके लिए मदद भी मांगी हैं। सीएम कमलनाथ ने किसानों से अपील करते हुए अपील करता हूं कि आप किसान भाई प्रदेश के पर्यावरण की चिंता करते हुए खेत में पराली (नरवाई) न जलाएं। फसल के बाद डंठल या ठूंठ जिन्हें हम पराली कहते हैं, जलाने से चौतरफा नुकसान है। पराली जलाने से जमीन के पोषक तत्वों के नुकसान के साथ प्रदूषण भी फैलता है और ग्रीनहाउस गैंसे भी पैदा होती है जो वातावरण को बेहद नुकसान पहुंचाती है। 

 

 

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