मप्र / जीएसटी कलेक्शन घटा, केंद्र से मप्र को 4097 करोड़ रु. कम मिलने की आशंका



GST collection reduced, Rs 4097 crore from center to MP Less likely to meet
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GST collection reduced, Rs 4097 crore from center to MP Less likely to meet

  • इस वित्तीय वर्ष में एेसा दूसरी बार  कलेक्शन ग्राेथ सितंबर में 10% नीचे आई
     

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2019, 06:43 AM IST

अनिल गुप्ता | भोपाल . जीएसटी लागू होने के बाद से हर साल मप्र को मिलने वाले 14 फीसदी क्षतिपूर्ति का पैसा करीब 4 हजार 97 करोड़ रुपए इस बार मिलने में मुश्किल आ सकती है। ऐसा जीएसटी कलेक्शन में लगातार हो रही कमी के कारण हो रहा है। ऐसे संकेत शुक्रवार को भारत सरकार के कैबिनेट सचिव व राजस्व सचिव के साथ पीएमओ के अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में दिए। ऐसी स्थिति बनती है तो मप्र सरकार द्वारा चलाई जा रही कर्जमाफी, किसानों को हुए फसल के नुकसान का मुआ‌वजा और महंगाई भत्ता समेत जनता से जुड़ीं कई योजनाएं बजट संकट में फंस सकती हैं।

 

यह अंदेशा है कि इसकी भरपाई के लिए केंद्र या राज्य सरकार जनता पर टैक्स का कोई नया भार सेस के रूप में डाल दे। मप्र को वर्ष 2019-20 में 4097 करोड़ रु. क्षतिपूर्ति मिलनी है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में केेंद्र ने स्पष्ट किया है कि इस बार एेसा कोई स्रोत अलग से नहीं दिखाई दे रहा, जिससे जीएसटी कलेक्शन को बढ़ाया जा सके। ऐसे में मप्र सरकार को लग रहा है कि क्षतिपूर्ति की यह राशि अगले वित्तीय वर्ष में शिफ्ट हो जाएगी, लेकिन मप्र सरकार के सामने यह संकट है कि जनहितैषी योजनाओं को कैसे इस संकट से दूर रखा जा सके। 

 

इधर, आंकड़े बता रहे हैं कि पहली छमाही में सितंबर का महीना एेसा गुजरा है, जहां जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) कलेक्शन की ग्रोथ देश में पिछले साल की तुलना में माइनस (-2.67) में चली गई है। मप्र में भी स्थिति यही बनी कि वर्ष 2019-20 के सितंबर माह में दस फीसदी से कम हो गई।


यह पहली छमाही में दूसरी बार हुआ है। सितंबर से पहले जून में जीएसटी कलेक्शन की ग्रोथ 9.22 प्रतिशत रह गई थी। चालू वित्तीय वर्ष के 6 माह में लगातार ग्रोथ दो अंकों में रही। स्पष्ट है कि मप्र से सेंट्रल जीएसटी, इंटीग्रेटेड जीएसटी, स्टेट जीएसटी और सेस का कलेक्शन घटा है। मप्र सरकार का कहना है कि 2015-16 में तय हुआ था कि जीएसटी कलेक्शन की क्षतिपूर्ति के तौर पर हर साल मिलने वाली राशि में 14 फीसदी की बढ़ोतरी होगी, लेकिन इस साल एेसे संकेत नहीं मिल रहे।


असर : कर्जमाफी, राज्य कर्मचारियों का डीए, अतिवृष्टि से पीड़ित किसानों काे मुआवजा राशि वितरण में हो सकती है दिक्कत अटक सकते हैं ये काम  प्रदेश में किसान कर्जमाफी का दूसरा चरण शुरू करना है। बजट में आठ हजार करोड़ का प्रावधान है, लेकिन केंद्र से पैसा नहीं मिला तो दिक्कत होगी।  मप्र सरकार को अपने 10 लाख (कर्मचारी, अध्यापक, पंचायत सचिव और पेंशनर्स) को डीए देना है। इसमें हर माह 228 करोड़ रुपए भार आना है।  कन्यादान में 78 करोड़ रुपए बंटना बाकी है।

 

  •  अतिवर्षा से प्रभावित किसानों को मुआवजा और सड़कों की मरम्मत होना है। 16 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है।
  •  संविदा व अतिथि विद्वानों को नियमित करने और बेरोजगारों को भत्ता भी देना है।
  • प्रदेश में कलेक्शन की ग्रोथ (राशि करोड़ रु. में)

माह अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर
2018-19 2344.17 1863.64 2004.56 2068.61 1962.55 1898.97
2019-20 2625.70 2251.29 2189.35 2281.68 2254.49 2073.75
ग्रोथ 12.01% 20.80% 9.22% 10.30% 14.88% 9.20%


टैक्स कलेक्शन घटने के पीछे मप्र के तर्क : टैक्स कलेक्शन कम होने के पीछे तर्क दिए जा रहे हैं कि अतिवर्षा से सीमेंट कारोबार के प्रभावित होने और कोल माइंस का काम कम होने के कारण जीएसटी में कमी आई है। हाल ही में डीए के 5 फीसदी बढ़ने और अक्टूबर-नवंबर के कामकाज में तेजी की संभावना के मद्देनजर जीएसटी बढ़ सकता है।


केंद्र सरकार जीएसटी कलेक्शन की स्थिति

  • माह 2018-19 2019-20 ग्रोथ
  • अप्रैल 1 लाख 03 हजार 459 करोड़ 1 लाख 13 हजार 865 करोड़ 10.06%
  • मई 94 हजार 016 करोड़ 1 लाख 289 करोड़ 6.67%
  • जून 95 हजार 610 करोड़ 99 हजार 939 करोड़ 4.53%
  • जुलाई 96 हजार 483 करोड़ 1 लाख 2 हजार 83 करोड़ 5.80%
  • अगस्त 93 हजार 960 करोड़ 98 हजार 202 करोड़ 4.51%
  • सितंबर 94 हजार 442 करोड़ 91 हजार 916 करोड़ -2.67%
     
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