• Hindi News
  • Mp
  • Bhopal
  • Gujarat Chief Minister said: MP Narmada is doing dirty politics in the matter of water

मप्र / गुजरात के मुख्यमंत्री रूपाणी का आरोप- कमलनाथ सरकार नर्मदा जल की सप्लाई में गंदी राजनीति कर रही



मप्र के मुख्यमंत्री कमलनाथ और गुजरात के सीएम विजय रूपाणी सरकार के बीच नर्मदा के पानी को लेकर रस्साकसी शुरू हो गई है। मप्र के मुख्यमंत्री कमलनाथ और गुजरात के सीएम विजय रूपाणी सरकार के बीच नर्मदा के पानी को लेकर रस्साकसी शुरू हो गई है।
X
मप्र के मुख्यमंत्री कमलनाथ और गुजरात के सीएम विजय रूपाणी सरकार के बीच नर्मदा के पानी को लेकर रस्साकसी शुरू हो गई है।मप्र के मुख्यमंत्री कमलनाथ और गुजरात के सीएम विजय रूपाणी सरकार के बीच नर्मदा के पानी को लेकर रस्साकसी शुरू हो गई है।

  • बोले- पिछले 40 साल में नर्मदा जल के बंटवारे को लेकर कभी कोई विवाद नहीं हुआ
  • आरोपों पर कमलनाथ ने कहा कि हम एग्रीमेंट के अनुसार ही गुजरात को पानी देंगे 

Dainik Bhaskar

Jul 20, 2019, 06:06 PM IST

भोपाल/गांधीनगर. गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने शनिवार को मप्र के मुख्यमंत्री कमलनाथ और वहां के नर्मदा घाटी विकास विभाग के मंत्री सुरेंद्र सिंह बघेल को नर्मदा पानी की सप्लाई के मामले में ‘गंदी राजनीति’ नहीं करने की चेतावनी दी है। 

 

इधर, गुजरात सरकार के आरोपों पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि परेशान नहीं होना चाहिए, एग्रीमेंट के अनुसार ही नर्मदा का पानी दिया जाएगा। जो एग्रीमेंट में है उससे अधिक भी नहीं देंगे। 

 

मध्य प्रदेश की ओर से गुजरात को नर्मदा के पानी की आपूर्ति रोके जाने की कथित धमकी के बाद शनिवार को रूपाणी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि "पानी की किल्लत के इस समय में कांग्रेस को पानी के नाम पर कोई गंदी राजनीति नहीं करनी चाहिए। यह बचकाना, दुर्भाग्यपूर्ण, शर्मनाक, राजनीति प्रेरित और बदनीयतीपूर्ण है।"

 

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों ने पहले नर्मदा परियोजना को रोकने का भरपूर प्रयास किया था और अब इसी को लेकर मप्र की कांग्रेस सरकार गंदी राजनीति खेलने का प्रयास कर रही है। लोकसभा चुनाव में जबरदस्त पराजय के बाद कांग्रेस हताश हो गयी है। 

 

40 साल से कोई विवाद नहीं था 
विजय रूपाणी ने कहा, "पिछले 40 साल में नर्मदा जल के बंटवारे को लेकर कभी कोई विवाद नहीं हुआ पर अब कांग्रेस नीत मध्य प्रदेश सरकार ऐसा करने का प्रयास कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित नर्मदा नियंत्रण प्राधिकार की ओर से निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप परियोजना से जुड़े चारों राज्यों गुजरात, मप्र, राजस्थान और महाराष्ट्र के पानी के हिस्से में वर्ष 2024 तक कोई बदलाव संभव नहीं है। किसी तरह का मुद्दा होने पर उस पर बातचीत का प्रावधान है। ऐसे में मप्र सरकार को हमे धमकी देने का प्रयास नहीं करना चाहिए।"

 

मुख्यमंत्री रूपाणी ने कहा कि "गुजरात सरकार ने आज तक ऐसा कुछ भी नहीं किया जो मप्र की जनता के हितों के विरूद्ध हो। मप्र को उसके हिस्से की 57 प्रतिशत पनबिजली भी मिल रही है। पुनर्वास का काम भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुरूप हुआ है। मप्र सरकार को माहौल को कलुषित करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। उसके अधिकारी हाल में आयोजित पुनर्वास संबंधी एक बैठक में शामिल ही नहीं हुए।"

 

हम किसी से भीख नहीं मांग रहे 
रूपाणी ने कहा कि "कांग्रेस की गुजरात इकाई को भी इस मामले में अपना पक्ष रखना चाहिए। हम किसी से भीख नहीं मांग रहे बल्कि पानी का अपना कानूनी और वाजिब हिस्सा मांग रहे हैं। मप्र सरकार को पानी की कमी वाले इस समय में इस मामले को सौहार्द्रपूर्ण तरीके से हल करना चाहिए। उसके बर्ताव से गुजरात की जनता भी दुखी है।"

 

गुजरात की जीवनरेखा कही जाती है नर्मदा 
गुजरात में जलापूर्ति की जीवन रेखा कही जाने वाली नर्मदा परियोजना के तहत यहां की आधी से अधिक यानी तीन करोड़ से अधिक आबादी (160 से अधिक शहरों और 10000 से अधिक गांवों) में पानी की आपूर्ति की जाती है। नर्मदा परियोजना के तहत पानी के साथ ही इसके तहत उत्पादित पनबिजली का बंटवारा उक्त चार राज्यों के बीच किया जाता है। 

 

मप्र के मंत्री ने ये कहा था 

मप्र के नर्मदा घाटी विकास विभाग के मंत्री सुरेंद्र सिंह बघेल ने कहा है कि पूर्व में वहां की भाजपा सरकारों ने गुजरात के दबाव के तहत उसे उसके लिए आवंटित से अधिक हिस्से में पानी की आपूर्ति की थी पर कांग्रेस की सरकार आने के बाद अब ऐसा नही होने दिया जायेगा। राज्य सरकार मप्र की जनता के हित का ध्यान रख कर ही कोई कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि गुजरात पर मप्र के हिस्से का बिजली का भुगतान भी बकाया है। 

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना