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पलायन की तस्वीर / गुजरात से आने वाली साबरमती एक्सप्रेस में पैर रखने के लिए भी जगह नहीं और जाने वाली की जनरल बोगियां भी खाली



गुजरात से आने और जाने वाली सावरमती एक्सप्रेस की तस्वीर जो गुना में ली गई। गुजरात से आने और जाने वाली सावरमती एक्सप्रेस की तस्वीर जो गुना में ली गई।
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गुजरात से आने और जाने वाली सावरमती एक्सप्रेस की तस्वीर जो गुना में ली गई।गुजरात से आने और जाने वाली सावरमती एक्सप्रेस की तस्वीर जो गुना में ली गई।

Dainik Bhaskar

Oct 12, 2018, 04:51 PM IST

गुना। गुजरात से उत्तर प्रदेश के कामगारों का पलायन इन दिनों सुर्खियों में है। यह स्थिति वास्तव में कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा साबरमती एक्सप्रेस से लगाया जा सकता है, जो गुजरात जाने व वहां से आने वाले कामगारों की सबसे प्रमुख सवारी गाड़ी है। भास्कर ने आने-जाने वाली दोनों ट्रेनों का जायजा लिया। 

 

गुजरात से आने वाली ट्रेन में पैर रखने की भी जगह नहीं है। जबकि वहां जाने वाली ट्रेन की जनरल बोगियों में भी यह हालत थी कि सीटें खाली हैं। लोग उन पर सोते हुए जा रहे थे। जबकि किसी भी सीजन में गुजरात की ओर जाने वाली साबरमती की जनरल बोगी में पैर रखने की जगह नहीं मिलती है। उप्र से गुजरात जाने वाले कामगारों के लिए यह सबसे लोकप्रिय ट्रेन, पहले गुजरात की ओर जाने वाली ट्रेन के टॉयलेट तक यात्रियों से भरे रहते थे।  

 

अफवाहों से डरकर लौट रहे : ट्रेन से सफर कर रहे जिन लोगों से बातचीत हुई, उनमें से कोई सीधे तौर पर हिंसा का शिकार तो नहीं हुआ, लेकिन डर और असुरक्षा सभी को महसूस हो रही थी। सूरत में काम करने वाले बनारस जा रहे गया प्रसाद ने बताया कि त्योहार सीजन के बाद हम वापस लौटने के बारे सोचेंगे। अहमदाबाद के एक कारखाने में काम कर रहे शंभू सिंह यादव ने बताया कि हमें कहा गया था कि जब स्थिति सामान्य हो जाए तब लौट आना। 

 

लौटने के अलावा विकल्प नहीं : ऐसे ही कई अन्य कामगारों ने कहा कि हमारे पास लौटने के अलावा कोई विकल्प भी नहीं है, क्योंकि उप्र में रोजगार के अवसर सीमित हैं। 

 

इन दिनों में यह स्थिति नहीं रहती: गुजरात से आ रही ट्रेन के टीसी प्रदीप यादव ने बताया कि त्योहार सीजन में उप्र के लोगों का प्रवास बढ़ता है, लेकिन यह स्थिति दीपावली से एक हफ्ते पहले बनती है। इन दिनों इतना प्रवास नहीं होता। उन्होंने कहा कि गुजरात की ओर जाने वाली ट्रेनों में सवारियों की स्थिति यह होती है कि वेंडर और रेलवे का स्टाफ बोगियों में जाता ही नहीं है। क्योंकि उनमें आगे बढ़ने के लिए जगह ही नहीं बचती है। 

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