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ज़िन्दगी से लबरेज़ एक गुलज़ार शाम 16 को रवींद्र भवन में, नज़्मों और अफसानों में मिलेंगे सवालों के जवाब

रवींद्र भवन में 16 जून को दैनिक भास्कर के साथ नज़्मों, अफ़सानों की एक गुलज़ार शाम'।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jun 14, 2018, 12:25 PM IST

ज़िन्दगी से लबरेज़ एक गुलज़ार शाम 16 को रवींद्र भवन में, नज़्मों और अफसानों में मिलेंगे सवालों के जवाब

भोपाल.रवींद्र भवन में 16 जून को दैनिक भास्कर के साथ नज़्मों, अफ़सानों और ज़िन्दगी से लबरेज़ "एक गुलज़ार शाम'। यहां अपने व्यापक नजरिये से संपूर्ण समां रोशन करने और आपसे मुखातिब होने खुद मौजूद रहेंगे प्रख्यात कवि, गीतकार और निर्देशक गुलज़ार साहब। कार्यक्रम शनिवार शाम 6 बजे शुरू होगा। इस इवेंट की मॉडरेटर होंगी समीना और उनके ही सवालों का जवाब गुलज़ार नज्मों और अफ़सानों में देंगे।

भोपाल की तहजीब से खासे प्रभावित हैं गुलज़ार साहब
- सम्पूर्ण सिंह कालरा यानी गुलज़ार। सारा हिंदुस्तान उन्हें इसी नाम से जानता है। भोपाल की गंगा-जमुनी तहजीब उन्हें इस शहर के काफी करीब रखती है।

जब उन्होंने दो घंटे के लिए मांगी कार

- भोपाल के रंगकर्मी हमीदउल्ला खान मामू बताते हैं कि गुलज़ार साहब करीब दो साल पहले इफ्तेखार नाट्य समारोह में शिरकत करने भोपाल आए थे। वे एयरपोर्ट से होटल गए और कुछ देर आराम करने के बाद आयोजकों से बोले मुझे दो घंटे के लिए एक गाड़ी चाहिए। शहर को देखना है।

बोट क्लब से शुरू हुआ सफर

- शाम के करीब 5:30 बजे थे। वे पहले बोट क्लब गए। कुछ देर बड़े तालाब को निहारने के बाद ताजुल मसाजिद, ताज महल होते हुए इतवारे पहुंच गए। यहां कुछ देर ठहरे, हाजी होटल पर लस्सी भी पी और बुधवारा, जहांगीराबाद होते हुए रात 8:30 बजे होटल लौटे। दूसरे दिन शाम को भारत भवन में एक सम्मान समारोह था, जिसमें गुलज़ार साहब मुख्य अतिथि थे।

हमसफर नाटक में दी थी अावाज

- कार्यक्रम के बाद जावेद सिद्दीकी द्वारा लिखित नाटक 'हमसफर' का मंचन हुआ। इस नाटक को आवाज दी थी गुलज़ार साहब ने। नाटक में कलाकार थे हर्ष, लुबना सलीम और किरण करमारिकर।

सुन सकेंगे ज़िन्दगी के ऐसे ही फलसफे


हवा के सींग न पकड़ो खदेड़ देती है
जमीं से पेड़ों के टांके उधेड़ देती है
आदमी बुलबुला है पानी का
और पानी की बहती सतह पर टूटता भी है, डूबता भी है
फिर उभरता है, फिर से बहता है
न समंदर निगल सका इसको, न तवारीख तोड़ पाई
वक्त की मौज पर सदा बहता आदमी बुलबुला है पानी का

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Web Title: ज़indgai se lbreज़ ek gauljeaar shaam 16 ko rvindr bhavan mein, nज़mon aur afsaanon mein milengae sawalon ke jawab
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