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प्रमोशन में आरक्षण मिले या नहीं, अब 7 जजों की संविधान पीठ करेगी सुनवाई

संविधान पीठ का फैसला आने तक प्रमोशन में आरक्षण देने का आदेश दे चुका है सुप्रीम कोर्ट

Dainik Bhaskar

Jul 11, 2018, 11:18 PM IST
Hearing on constitution of 7 judges in Supreme Court on reservation in promotion
  • सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की दलील: सरकारी नौकरी कर रहे लाखों लोगों के प्रमोशन अटके, संविधान पीठ जल्द सुनवाई करे, पर नहीं मिली राहत

नई दिल्ली.भोपाल. सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण मामले में 2006 के अपने फैसले को लेकर अंतरिम आदेश देने से बुधवार को इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने कहा कि इस मामले की सुनवाई 7 जजों की संविधान बेंच में होगी। अगस्त के पहले हफ्ते में सुनवाई हो सकती है। प्रमोशन में आरक्षण को लेकर संविधान बेंच में कई याचिकाएं लंबित हैं।

जल्द सुनवाई हो, लाखों लोगों के प्रमोशन रुके हैं: केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा है कि संवैधानिक बेंच जल्द सुनवाई करे, क्योंकि रेलवे सहित सरकारी सेवाओं में लाखों लोगों के प्रमोशन रुके हैं। गर्मी की छुट्टियों में सुप्रीम कोर्ट केंद्र को एससी-एसटी के लोगों को प्रमोशन में आरक्षण देने की अनुमति दी थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकार कानून के हिसाब से आगे बढ़े।

मप्र में 35 हजार से ज्यादा लोग बिना प्रमोशन हो चुके रिटायर: 30 अप्रैल 2016 में जबलपुर हाईकोर्ट ने पदोन्नति के नियम को अवैधानिक करार दे दिया। इसके आधार पर गलत पदोन्नत अनुसूचित जाति/ जनजाति के शासकीय सेवकों को रिवर्ट करने का फैसला हुआ। इसके विरुद्ध ही मप्र सरकार सुप्रीम कोर्ट गई। प्रकरण में वर्तमान में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश हैं। लिहाजा अप्रैल 2018 तक यानी दो साल से प्रमोशन बंद है। 35 हजार से ज्यादा लोग बिना प्रमोशन रिटायर हो चुके हैं।

आरक्षण के विरोध में अभियान: एक करोड़ हस्ताक्षर कराएगा सपाक्स: प्रमोशन में आरक्षण का विरोध कर रहा सपाक्स संगठन 14 जुलाई से हस्ताक्षर अभियान चलाएगा। सभी जिलों से एक करोड़ हस्ताक्षर कराकर राष्ट्रपति को भेजा जाएगा। सपाक्स इसकी भी तैयारी कर रहा है कि संविधान पीठ के सामने अपना पक्ष रख सके।

पिछड़ापन है या नहीं, यह देखना जरूरी: 15 नवंबर को शीर्ण कोर्ट की 5 जजों की संविधान बेंच ने कहा था कि प्रमोशन में आरक्षण से पहले देखना होगा कि अपर्याप्त प्रतिनिधित्व और पिछड़ापन है या नहीं। कोर्ट ने कहा था कि अजा/अजजा के केस में क्रीमी लेयर का कान्सेप्ट लागू नहीं होता।

‘प्रमोशन में रिजर्वेशन की पॉलिसी’ का फिलहाल कोई मतलब नहीं : हमारा प्रयास है कि मप्र में 2002 का प्रावधान यथावत रहे। पर बीच में एम नागराज मामले में फैसला आ चुका है। जहां तक कैबिनेट सब कमेटी द्वारा बनाए जा रहे ‘प्रमोशन में रिजर्वेशन की पॉलिसी’ का सवाल है तो अब फिलहाल इसका कोई मतलब नहीं है। संविधान पीठ के फैसले पर सब निर्भर है। उम्मीद है पहली सुनवाई के बाद एक सप्ताह के भीतर कोई निर्णय हो जाएगा।- पुरुषेंद्र कौरव, मप्र के महाधिवक्ता

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