मप्र / भोपाल में सुबह से फिर तेज बारिश; एक-दो दिन में टूट सकता है 29 साल का रिकॉर्ड, कोलार डैम के 4 गेट खुले



भोपाल में कोलार डैम के गेट भी खोलने पड़े हैं। भोपाल में कोलार डैम के गेट भी खोलने पड़े हैं।
सीहोर और विदिशा जिलों में सोयाबीन की खड़ी फसल बर्बाद हो रही है। सीहोर और विदिशा जिलों में सोयाबीन की खड़ी फसल बर्बाद हो रही है।
Heavy rain in Bhopal since morning; 29-year record can be broken in a day or two
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भोपाल में कोलार डैम के गेट भी खोलने पड़े हैं।भोपाल में कोलार डैम के गेट भी खोलने पड़े हैं।
सीहोर और विदिशा जिलों में सोयाबीन की खड़ी फसल बर्बाद हो रही है।सीहोर और विदिशा जिलों में सोयाबीन की खड़ी फसल बर्बाद हो रही है।
Heavy rain in Bhopal since morning; 29-year record can be broken in a day or two

  • मप्र में लगातार बना है लो प्रेशर एरिया और झारखंड में साइक्लोनिक सर्कुलेशन
  • अगले 4-5 दिन तक भोपाल समेत 15 जिलों में बारिश के राहत की उम्मीद नहीं
  • भोपाल में अब तक हुई सबसे ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड भी टूट सकता है

Dainik Bhaskar

Sep 13, 2019, 06:22 PM IST

अनूप दुबोलिया, भोपाल. राजधानी समेत प्रदेश के 32 जिलों में भारी बारिश का सिलसिला थमा नहीं है। शुक्रवार को लगातार सातवें दिन भी सुबह से मूसलाधार बारिश होती रही। भोपाल में सुबह 5.30 से तेजी से पानी बरसा। सुबह 8.30 बजे तक 1605 मिमी (63.18 इंच) बारिश दर्ज की गई है। 


भोपाल और कैचमेंट एरिया में हो रही  भारी बारिश के चलते शहर के सबसे बड़े डैम कोलार के 4 गेट एक मीटर की हाइट के साथ खोल दिया गया है। इस सीजन में लगातार पांचवीं बार कोलार डैम के गेट खोले गए हैं। वहीं कलियासोत डैम के तीन गेट और भदभदा के दो गेट खोले गए हैं। कोलार के गेट 12 घंटे से लगातार खुले हुए हैं। सीहोर जिले में भारी बारिश से नीलकंठ गांव में सैंकडों एकड सोयाबीन की फसल गल गयी है। यही हाल विदिशा, रायसेन और अन्य जिलों में भी हजारों एकड़ सोयाबीन की खड़ी फसल बर्बाद हो रही है। 

 

4-5 दिन तक नहीं मिलेगी राहत : मप्र में बने लो प्रेशर एरिया और झारखंड में बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण अगले 4-5 दिन तक भोपाल समेत 15 जिलों में बारिश के राहत की कोई उम्मीद नहीं है। मौसम वैज्ञानिक उदय सरवटे का कहना है कि यदि बारिश की ये रफ्तार बनी रही तो 2006 में हुई सबसे ज्यादा बारिश 1684 मिमी (66.29 इंच) का रिकॉर्ड टूट सकता है। 1990 के बाद पिछले 29 साल में सीजन की सबसे ज्यादा बारिश है। 

 

भोपाल में बड़ी और छोटी झील में चल रहा विसर्जन : लगातार बारिश के बीच कल से गणेश प्रतिमा विसर्जन का कार्य बड़ी और छोटी झील के विभिन्न घाटों पर किया जा रहा है। हालाकि नगर निगम प्रशासन ने प्रतिमा विसर्जन के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी की हैं। 

 

भोपाल और आसपास के डैम लबालब : लगातार बारिश के कारण शहर की बड़ी और छोटी झील के अलावा आसपास के विभिन्न बांध जलाशय कलियासोत, केरवा और कोलार भी लबालब हैं। भोपाल के अलावा विदिशा, रायसेन, सागर और अन्य जिलों में भी बारिश होने के समाचार यहां पहुंचे हैं। 


सागर में टापू पर फंसे महिला, पुरुष और बकरियों को निकाला 
गुरुवार को सागर जिले के बण्डा में बेबस नदी के किनारे बने पुल के पास एक टापू पर एक महिला और पुरुष सहित 20 बकरियां फंस गई। इनको चराने ले गए थे। सूचना पर पहुंची बचाव दल विनायका थाने की पुलिस के साथ मौके पर पहुंच गए। बचाव अभियान चलाया गया। गांव के लोगों की मदद से बचाव अभियान सफल रहा। सभी को महिला, पुरुष, बकरियों, जानवरों को सुरक्षित बाहर निकाला लिया गया है। 

 

विदिशा बाढ़ की स्थिति, नटेरन से 60 लोगों को सुरक्षित निकाला 

विदिशा जिले के विभिन्न हिस्सों में लगातार बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति बन गयी है। शहर की निचली बस्तियों में जलभराव हो गया है।  विदिशा का भोपाल और सागर के अलावा सभी स्थानों से सड़क संपर्क कट गया है। नदी और नालों पर बने पुल पुलियाओं पर पानी के कारण यह स्थिति बनी है। विदिशा जिले के नटेरन थाना क्षेत्र के पमारिया गांव में कल बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में फसे 60 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया। उन्हें  राहत शिविर में रखा गया है।

 

5 जिलों में रेड अलर्ट : मौसम विभाग ने खंडवा, खरगोन, अलीराजपुर, बुरहानपुर और धार में रेड अलर्ट।

3 जिलों में ऑरेंज अलर्ट : बड़वानी, झाबुआ और देवास में ऑरेंज अलर्ट दिया है। 
20 जिलों में यलो अलर्ट : उमरिया, डिंडौरी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, मंडला, छतरपुर, सागर, पन्ना, दमोह, गुना, रायसेन, विदिशा, सीहोर, उज्जैन, इंदौर, हरदा, राजगढ़, टीकमगढ़, होशंगाबाद और श्योपुरकलां में यलो अलर्ट किया गया है। 

 

मध्य प्रदेश एवं भोपाल के मौसम को प्रभावित करने वाले कारक 

 

  • कम दबाव का क्षेत्र उत्तर पूर्वी मध्य प्रदेश एवं उससे लगे दक्षिण पूर्वी उत्तर प्रदेश पर बना हुआ है। साथ ही हवा के ऊपरी भाग में चक्रवाती हवा का घेरा सेवन पॉइंट 6 किलोमीटर ऊंचाई तक बना है।  
  • मानसून द्रोणिका मीन सी लेवल पर अनूपगढ़ अलवर ग्वालियर कम दबाव के क्षेत्र से होते हुए डाल्टनगंज बरहमपुर से बंगाल की खाड़ी तक गया है। 
  • द्रोणिका हवा के ऊपरी भाग में कच्छ से पश्चिमी बंगाल के हिमालय वाले क्षेत्र तक बना हुआ है, जो दक्षिण पश्चिम मध्य प्रदेश से कम दबाव के क्षेत्र होते हुए बिहार के दक्षिण हिस्से के बीच गया है। 
  • हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात उत्तर-पूर्व अरब सागर और उससे लगे सौराष्ट्र और कच्छ के क्षेत्र में बना है जो 1.5 से 2.1 किलोमीटर के बीच पर स्थित है।

 

शाम को 8.30 बजे से सुबह 8.30 बजे तक बारिश 

 

जिले  रिकॉर्ड बारिश (मिमी में)
भोपाल 34.8
नरसिंहपुर 95.0

राजगढ़

76.2
अशोकनगर 63.0
धार 56.8
रायसेन 128.2
टीकमगढ़ 163.0
होशंगाबाद 78.6 
विदिशा 48.0
गुना 76.9
नौगांव 150.0 
खंडवा 59.0
कटनी 102.4
इंदौर 66.6
निवाड़ी 85.0
सीहोर 86.0
मंडला 53.0
उज्जैन 50.0
शाजापुर 44.0
जबलपुर 28.0
सागर 68.8
हरदा 38.1
खरगोन 41.2
खजुराहो 45.0
उमरिया 33.5
शिवपुरी 26.0
रतलाम 25.0
नीमच 43.0 43.0
मंदसौर 56.0

 

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