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पति कुछ न कमाता हो, फिर भी पत्नी को देना होगा गुजारा भत्ता

9 महीने पहले
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पारिवारिक विवाद या प्रताड़ना के चलते अलग रह रही पत्नी को कोर्ट द्वारा तय गुजारा भत्ता देने के लिए पति बाध्य है
  • भरण-पोषण के मामले में हाईकोर्ट का स्पष्ट निर्देश, शारीरिक रूप से सक्षम तो जिम्मेदारी से नहीं मुकर सकता पति

रजनीश शुक्ला | भोपाल . पारिवारिक विवाद या प्रताड़ना के चलते अलग रह रही पत्नी को कोर्ट द्वारा तय गुजारा भत्ता देने के लिए पति बाध्य है, भले ही वह एक पैसा भी नहीं कमाता हो। हाईकोर्ट ने ऐसे कई मामलों में स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी परिस्थिति में अलग रह रहा पति अपनी पत्नी और बच्चों की जिम्मेदारी उठाने से बच नहीं सकता।


जस्टिस जेपी गुप्ता ने ऐसे ही एक मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर शारीरिक रूप से पति सक्षम है तो अपनी पत्नी और नाबालिग बच्चों को पर्याप्त गुजारा भत्ता देना उसका दायित्व है भले ही वह एक पैसा भी नहीं कमा रहा हो। पति को भरण-पोषण की राशि जुटाने हर संभव प्रयास करना ही होगा। इसी तरह हाईकोर्ट के जस्टिस विष्णु प्रताप सिंह चौहान ने कहा है कि अगर पति की आय पर्याप्त है और वह अपनी आय स्रोत के प्रमाण पेश नहीं कर पा रहा है तो भी वह पत्नी को कोर्ट द्वारा तय भरण पोषण की राशि देने के लिए बाध्य है।
 
हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा कि आवेदक पति ने कहीं भी यह सिद्ध नहीं किया है कि वह पैसा कमाने में शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम है। आवेदक का दावा है कि वह मजदूरी करता है और इसका मतलब है कि वह मेहनत कर सकता है। वहीं दूसरी ओर वह कह रहा है कि उसकी पत्नी खुद कमाती है। इससे साफ जाहिर है कि पति अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहता है। 

ऐसे-ऐसे मामले...कुछ लोगों ने रकम कम करने को लेकर हाईकोर्ट में अपील की थी, जो खारिज हो गई

1 - भोपाल के हर प्रसाद साहू की प्रताड़ना से तंग आकर शादी के 12 साल बाद पत्नी अलग रहने लगी। कुटुंब न्यायालय में भरण पोषण का मामला लगाया। प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय भोपाल ने 21 अप्रैल 2017 को साहू को 7 हजार रुपए मासिक बतौर भरण पोषण अपनी पत्नी को हर माह अदा करने के निर्देश दिए। साहू ने रकम कम करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में अपील की, जो खारिज हो गई।

2 - सीहोर के बुधनी में रहने वाले अरविंद यादव के खिलाफ उनकी पत्नी ने गुजारा भत्ता का केस लगाया। जेएमएफसी कोर्ट ने 6 दिसंबर 2017 को अरविंद को आदेश दिए कि वह हर माह पत्नी को 2500 और बच्चे को 1500 रुपए बतौर गुजारा भत्ता दें। अरविंद ने हाईकोर्ट में अपील पेश कर कहा कि उसकी कुल आय ही 4 हजार रुपए है इसलिए गुजारा भत्ता की राशि कम कर दी जाए। हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर दी।

3 - खंडवा निवासी पंकज जाधव की पत्नी ने हरदा कुटुंब न्यायालय में भरण पोषण की अर्जी लगाई। कोर्ट ने 21 दिसंबर 2018 को आदेश दिए कि आवेदक अपनी पत्नी को 4 हजार प्रतिमाह गुजारा भत्ता अदा करे। पंकज ने हाईकोर्ट ने अपील दायर कर दलील दी कि उसकी मासिक आय ढाई से तीन हजार रुपए है। यह भी कहा कि पत्नी ब्यूटी पार्लर का संचालन करती है और 5 हजार रुपए कमाती है। हाईकोर्ट ने गुजारा भत्ता कम करने की मांग ठुकरा कर अपील निरस्त कर दी। 

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को बनाया आधार- सुप्रीम कोर्ट ने शमीमा फारुखी विरुद्ध शाहिद खान के मामले में 2015 में गुजारा भत्ता को लेकर गाइडलाइन जारी करते हुए कहा था कि जीविका का अर्थ केवल जीवित रहना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए कि भरण पोषण की उतनी राशि तय की जाए जितने में पत्नी उतनी अच्छी तरह से अपना जीवन यापन कर सके, जैसा वह पति के साथ रहने के दौरान करती। 

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