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मप्र में नहीं हो पा रही एक हजार से ज्यादा दुष्कर्म व हत्या के आरोपियों की पहचान

अतिसंवेदनशील मामलों के लिए कुछ किट का स्टॉक, नई किट के लिए टेंडर जारी विशेष संवाददाता | भोपाल प्रदेश में...

Dainik Bhaskar

Sep 12, 2018, 02:25 AM IST
Bhopal - मप्र में नहीं हो पा रही एक हजार से ज्यादा दुष्कर्म व हत्या के आरोपियों की पहचान
अतिसंवेदनशील मामलों के लिए कुछ किट का स्टॉक, नई किट के लिए टेंडर जारी

विशेष संवाददाता | भोपाल

प्रदेश में दुष्कर्म और हत्या के आरोपियों की पहचान के लिए होने वाले डीएनए टेस्ट ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश में अभी एक हजार से ज्यादा ऐसे मामले हैं, जिनमें डीएनए टेस्ट से आरोपियों की पहचान होना हैं। दरअसल, डीएनए टेस्ट में इस्तेमाल होने वाली िकट ही खत्म हो चुकी है। केवल संवेदनशील मामलों के लिए चुनिंदा किट को बचाकर रखा गया है। नई किट के लिए टेंडर बुलाए गए हैं, लेकिन अमेरिका में बनने वाली इस किट को आने में दो महीने का वक्त लग सकता है। प्रदेश में रोजाना 12 से 14 केस तकनीकी शाखा के अंतर्गत संवेदनशील मामलों में डीएनए टेस्ट के लिए आते हैं। पिछले तीन महीने में लगभग 360 केस आ चुके हैं। वर्तमान में एक हजार से ज्यादा सैंपल एफएसएल लैब में डीएनए टेस्ट के लिए पड़े हुए हैं। हालांकि चुनिंदा किट एफएसएल लैब में हैं, जिनका इस्तेमाल बच्चियों से दुष्कर्म जैसे बेहद संवेदनशील मामलों के सामने आने पर किया जा रहा है। हत्या और पारिवारिक केस से जुड़े मामलों के सैंपल नई किट के आने तक रोक लिए गए हैं।

कोर्ट ने 13 मामलों में अहम सबूत माना डीएनए टेस्ट हाईकोर्ट ने दुष्कर्म और हत्या के गंभीर मामलों में डीएनए टेस्ट जरूरी कर दिया है। पुलिस आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत के लिए डीएनए टेस्ट करवाने लगी है। नाबालिग बच्चियों से दुष्कर्म के 13 मामलों में सजा होने में डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट सबसे कारगर साबित हुई है।

15 दिन में अगले एक साल का स्टॉक आ जाएगा


तीन घंटे में टेस्ट वाली तकनीक पर हो रहा काम

बच्चियों से दुष्कर्म के मामले में अव्वल है मप्र-नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट (2016) के मुताबिक देशभर में दुष्कर्म के कुल 38,947 मामले दर्ज हुए थे। इनमें से 4,882 मामले अकेले मध्यप्रदेश के थे। मप्र में नाबालिग बच्चियों से दुष्कर्म के कुल 2,479 केस दर्ज हुए हैं। इसके बाद महाराष्ट्र (2,310 केस) और उत्तर प्रदेश (2,115) का नंबर आता है।

प्रदेश की सागर पुलिस लैब में डीएनए टेक्नोलॉजी पर ट्रायल चल रहा है। इसमें कॉम्प्लेक्स किनशिप डीएनए टेस्ट किट से आरोपियों की पहचान केवल तीन घंटे की जांच में हो जाएगी। हालांकि यह किट केवल पारिवारिक मामलों को सुलझाने में ही मदद करेगी। यह किट चाइना में उपयोग में लाई जा चुकी है, जिसके परिणाण काफी अच्छे रहे हैं। भारत में भी पारिवारिक शंका से घिरे मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस तरह के मामलों में इस किट की मदद से जल्द ही हकीकत सामने आ सकेगी।

अमेरिका की किट से होता है डीएनए टेस्ट

विश्व में डीएनए टेस्ट और किट तैयार करने में अमेरिका सबसे आगे है। आधुनिक तकनीक से अमेरिका में ही डीएनए टेस्ट की किट तैयार हो रही है। भारत के सभी राज्यों में अभी अमेरिका की तकनीक वाली किट से डीएनए टेस्ट हो रहा है। चीन डीएनए के डाटा बेस में आगे है। दुनिया में भारत डीएनए टेस्ट में तीसरे नंबर पर है। देश में सबसे बड़ी कमजोरी सैंपल कलेक्शन करने के वक्त होने वाली लापरवाही की है। नमूने सही तरीके से कलेक्ट नहीं होने की वजह से टेस्ट में सही परिणाम मुश्किल हो जाते हैं। अभी डीएनए के डाटाबेस और उसको सुरक्षित रखने में भी काफी दिक्कतें आती हैं।

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