भोपाल नाव हादसा / नितिन ने बचाईं 8 जिंदगियां; चंद सेकेंड्स में छलांग लगाकर डूब रहे लड़कों के पास पहुंचा था

भोपाल के नितिन बाथम तैराक हैं। हादसे के दौरान कुछ ही सेकेंड्स में उन्होंने डूबते लड़कों को बचाया। भोपाल के नितिन बाथम तैराक हैं। हादसे के दौरान कुछ ही सेकेंड्स में उन्होंने डूबते लड़कों को बचाया।
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भोपाल के नितिन बाथम तैराक हैं। हादसे के दौरान कुछ ही सेकेंड्स में उन्होंने डूबते लड़कों को बचाया।भोपाल के नितिन बाथम तैराक हैं। हादसे के दौरान कुछ ही सेकेंड्स में उन्होंने डूबते लड़कों को बचाया।

  • जान जोखिम में डालकर नितिन ने एक-एक कर 8 लोगों को पानी से बाहर खींच कर नाव पर चढ़ाया था
  • नितिन ने कहा- उस वक्त दो-चार लोग बचाने के लिए पानी में कूदते तो ज्यादा जानें बचाई जा सकती थीं

दैनिक भास्कर

Sep 14, 2019, 03:15 PM IST

भोपाल. भोपाल नाव हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई। घटना के वक्त एक युवक फरिश्ता बनकर आया और उसने 8 जिंदगियां बचा लीं। जी हां, हम बात कर रहे हैं नितिन बाथम की। नितिन ने अपनी जान पर खेलकर एक-एक कर 8 लोगों की जिंदगी बचाकर बहादुरी दिखाई थी। नितिन की तारीफ की जा रही है। शुक्रवार तड़के गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए खटलाघाट पर दोनों नावों में 19 युवक सवार थे। 11 लड़के डूब गए थे।

 

प्रेमनगर निवासी नितिन चल समारोह की झांकी देखने के लिए खटला घाट पर शुक्रवार को सुबह 4.30 बजे तक मौजूद थे। अगर नितिन समय पर नहीं पहुंचे होते तो शायद मरने वालों की संख्या और ज्यादा होती। अब भाजपा ने नितिन को राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार दिलाने की मांग की है। इस सिलसिले में शनिवार को भाजपाई नितिन को लेकर मुख्यमंत्री हाउस पहुंचे हैं। 

 

दो-तीन मिनट में ही 11 लड़के डूब गए 
नितिन ने भास्कर मोबाइल एप से हादसे पूरा वाक्या शेयर किया। उन्होंने बताया- "गणेश विसर्जन का मेला देखने मैं भी गया था। सड़क पर खड़े होकर विसर्जन के लिए कश्तियों में सवार गणपति को ले जाते देख रहा था। तभी देखा कि गणपति की मूर्ति गिरी और एक कश्ती पलट कर डूब गई। कुछ सेंकेंड्स में लड़के डूबने लगे और बचाओ-बचाओ की आवाज लगाने लगे। इसके बाद दूसरी नाव पर चढ़ने की कोशिश की तो वह भी पलटी खा गई और लड़के डूबने लगे। मैंने अंधेरे में तालाब में डूबते लड़कों को देखा तो पानी में छलांग लगा दी। हादसे वाली जगह पर एक कश्ती थी, जिसमें डूबते लड़कों को चढ़ाया। डूबते लड़कों में दो को तैरना आता था, जिन्हें मैंने चिल्लाकर बाहर जाने के लिए कहा। हादसे में दो-तीन मिनट में ही सब कुछ खत्म हो गया। मैं जितने लोगों को बचा सका, वह चंद सेकेंड्स में किया।"

 

कोई नहीं आया, आते तो और लड़के बच जाते 
नितिन ने कहा- "पानी में छलांग लगाने से पहले मैंने और लोगों को कूदने के लिए कहा, लेकिन कोई नहीं आया। अगर कुछ लोग और कूदकर आते तो शायद हम ज्यादा लड़कों को बचा सकते थे। मैं छोटे तालाब की गहराई से वाकिफ था। भरोसा था कि लड़कों को बचा ले जाऊंगा। इस विश्वास ने ही मुझे लड़कों को बचाने में हिम्मत दी। मैं उन लड़कों को बचाने के बाद एकतरफ खड़ा हो गया। लोगों ने मीडिया से कहा कि लड़कों को इसने बचाया है, तब मेरा नाम आया। वरना पुलिस प्रशासन ने मुझसे कोई बात तक नहीं की।"

 

नौकरी की तलाश कर रहा हूं 
नितिन तैराक हैं। बचपन में स्वीमिंग कॉम्पिटीशन में भाग लिया करते थे। फिलहाल बेरोजगार हैं। कहने लगे- नौकरी की तलाश कर रहा हूं। घर पर मेरे अलावा मेरी पत्नी और दो बेटियां हैं। नौकरी की तलाश कर रहा हूं।

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