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महंगाई / जीएसटी से घटा रावण का कद, आतिशबाजी में भी कटौती



Increase in prices of fireworks from inflation
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Increase in prices of fireworks from inflation

  • 10 हजार रुपए तक बढ़े पुतलों के दाम, रावण दहन के स्थान बढ़े, लेकिन कम हुई पुतलों की संख्या 
  • बांस-बल्ली से लेकर कागज, कपड़ा और गोंद भी हुई महंगी

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 02:46 AM IST

राजेश चंचल, भोपाल.  दशहरा उत्सव 19 अक्टूबर को मनाया जाएगा। हर बार खास आकर्षण रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले ही होते हैं, लेकिन इस बार इन्हें जलाना उत्सव समितियों को महंगा पड़ने लगा है। कई स्थानों पर रावण का कद भी घटाया गया है। कारण- जीएसटी। पिछले साल से लागू जीएसटी के चलते पुतलों का निर्माण करने वाले कलाकारों ने इस साल भी इनके दामों में 8 से 10 प्रतिशत तक का इजाफा कर दिया है।

 

गत वर्ष 55 से 60 फीट ऊंचे जिस रावण के पुतले के दाम 60 से 65 हजार रुपए तक थे, वे इस बार 70 से 75 हजार तक पहुंच चुके हैं। कई उत्सव समितियों ने आतिशबाजी में भी कमी कर दी है। कहीं पुतलों की ऊंचाई को गत वर्ष की तरह ही रखा है। कई समितियां केवल रावण का ही पुतला बनवा रही हैं, मेघनाद व कुंभकर्ण के नहीं। नवाबी रियासत के दौरान सबसे पहले छोला दशहरा मैदान से रावण दहन की शुरुआत हुई थी, जो बढ़कर 21 स्थानों तक पहुंच चुकी है।


8 स्थानों पर निर्माण : रावण के पुतलों का निर्माण दशहरा से एक माह पहले शुरू हो जाता है। शहर में करीब 8 स्थानों पर निर्माण होता है। यहां के कई परिवार यह काम पुश्तैनी रूप से करते आ रहे हैं। इनमें से एक हैं छोला निवासी सुरेश साहू। वे बताते हैं कि जीएसटी के बाद से पुतला निर्माण सामग्री बांस, रस्सी, कागज, कपड़ा, गोंद, कील, लेई का मैदा-आटा आदि के भाव बढ़ने से पुतलों के दाम बढ़ाना पड़े हैं।

 

बिट्‌टन में हर साल घटाई जाती है रावण की ऊंचाई : बिट्टन मार्केट (अरेरा) दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष राजेश व्यास व महासचिव संजय सोमानी ने बताया कि वे हर साल रावण के पुतले का कद एक फीट कम करवा देते हैं। गत वर्ष 59 फीट का रावण था, इस बार यह 58 फीट का रहेगा।

 

टीटी नगर दशहरा समिति के राजेश वर्मा सोनी का कहना है कि पुतले बनाने वाले पिछले साल से भी अधिक कीमत मांग रहे हैं। भेल क्षेत्र में रावण बना रहे ओमप्रकाश साहू का कहना है कि कई समितियों ने पहले की अपेक्षा आतिशबाजी का ऑर्डर कम करवा दिया है। वहीं कुछ सिर्फ रावण के पुतले से ही काम चलाती हैं। 

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