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इंदौर-उज्जैन का किराया Rs.400 टैक्सी वाले वसूल रहे एक हजार

राजधानी के रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के आसपास के टैक्सी संचालक यात्रियों से किराए के नाम पर खुली लूट कर रहे हैं।...

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2018, 03:15 AM IST
Bhopal - इंदौर-उज्जैन का किराया Rs.400 टैक्सी वाले वसूल रहे एक हजार
राजधानी के रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के आसपास के टैक्सी संचालक यात्रियों से किराए के नाम पर खुली लूट कर रहे हैं। इंदौर और उज्जैन का किराया 400 रुपए तय है, लेकिन यहां टैक्सी संचालकों और दलालों का गठजोड़ ऐसा है कि उज्जैन और इंदौर पहुंचने के लिए 3200 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं। ज्यादा किराया वसूलने के सवाल पर उनका जवाब है कि वापसी में सवारी मिलने की गारंटी नहीं होती, इसलिए आने-जाने का पूरा किराया जोड़ते हैं। रेलवे स्टेशन, हमीदिया रोड से लेकर बस स्टैंड तक सड़क पर प्रायवेट टैक्सी संचालकों का ऐसा गठजोड़ है कि बाहर से आने वाले यात्री इनके सामने बेबस हो जाते हैं।

खास बात यह है कि अल्पना तिराहे पर पुलिस के चैकिंग प्वॉइंट के सामने ही खुलेआम यह गोरखधंधा चल रहा है। सिंगरौली से आईं किरण सिंह तीन दिन पहले अपने भाई विवेक सिंह और मां कलावती सिंह के साथ उज्जैन जाने के लिए टैक्सी लेने पहुंचीं तो उन्हें टैक्सी वालों ने पहली तीन सीट्स के लिए 4 हजार रुपए किराया बताया। बड़ी मान-मनव्वल के बाद उन्होंने तीन यात्रियों का किराया 3200 रुपए लिया। उज्जैन से लौटते वक्त उनसे एजेंट ने तीन सीट के लिए 1800 रुपए लिए। टैक्सी ड्राइवर ने उन्हें बताया कि इसमें उसे सिर्फ 1000 रुपए ही मिले हैं, बाकी 800 रुपए एजेंट ने ले लिए। भोपाल पहुंचकर उन्होंने उज्जैन जाने का सही किराया पता किया तो उन्हें अपने ठगे जाने का अहसास हुआ।

पुलिस भी मौन... अल्पना तिराहे पर तो पुलिस के चैकिंग प्वाइंट के ठीक सामने ही खुलेआम यह गोरखधंधा चल रहा है। वहीं आरटीओ की लाचारी देखिए... उसे कार्रवाई के लिए किसी यात्री की शिकायत का इंतजार है।

इस गोरखधंधे की हकीकत

ऑटो चालक का कमीशन 30 रुपए, ट्रैवल संचालक का 70 रु.

यात्रियों से किराए के नाम पर हो रही इस लूटपाट में ऑटो चालक से लेकर ट्रैवल संचालक और एजेंट तक सब शामिल होते हैं। स्टेशन से ट्रेवल तक यात्रियों को पहुंचाने वाले ऑटो चालक को प्रति यात्री 30 रुपए, इसके बाद प्रति सवारी ट्रैवल संचालक का 70 रुपए कमीशन तय है। कोई यात्री ऑटो से न आकर पैदल पहुंचता है, तो उसे एजेंट अपना यात्री बताकर 50 रुपए कमीशन वसूलता है। टैक्सी मालिकों का कहना है कि यात्रियों को किराया इसलिए ज्यादा लगता है, क्योंकि कुल किराये का 30% तो कमीशन में ही चला जाता है।

हम सख्ती से कार्रवाई करेंगे


टैक्सी संचालकों का तर्क सुनिए

किराया तय हुआ था, तब डीजल 54 रु. लीटर था, अब 75 रु. है

भास्कर संवाददाता ने अलग-अलग टैक्सी संचालकों से पूछा कि आखिर वे यात्रियों से मनमाना किराया क्यों वसूल रहे हैं? इस सवाल पर उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए तर्क दिया कि जब किराया तय हुआ था तब डीजल की कीमत 54 रुपए प्रति लीटर थी। अब कीमत 75 रुपए प्रति लीटर है। टोल टैक्स के रेट बढ़ते जा रहे हैं। किराया तो बढ़ेगा ही। टैक्सी संचालकों का यह भी तर्क है कि वापसी में सवारी मिलने की भी पूरी गारंटी नहीं होती। यही वजह है कि कई बार यात्रियों को किराया ज्यादा लगता है।

रेलवे स्टेशन से बस स्टैंड तक सड़क पर टैक्सी संचालकों का गठजोड़

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