मार्गदर्शकों की छोटी-सी भूल से 28 किमी पथरीले रास्ते पर चलते रहे जैन मुनि विद्यासागरजी और अन्य संत, पैरों पर पड़े छाले, फिर भी नहीं रुके / मार्गदर्शकों की छोटी-सी भूल से 28 किमी पथरीले रास्ते पर चलते रहे जैन मुनि विद्यासागरजी और अन्य संत, पैरों पर पड़े छाले, फिर भी नहीं रुके

विद्यासागरजी को यूपी के ललितपुर से देवगढ़ पहुंचने के बाद मप्र के मुंगावली जाना था।

dainikbhaskar.com

Dec 05, 2018, 12:02 PM IST
Jain Muni Vidyasagar Maharaj was walking 28 km  on the rocky path

भोपाल, मप्र। जैन मुनि विद्यासागर महाराज और अन्य साधुओं को उनके व्यवस्थापकों की गलती की वजह से करीब 28 किमी ऊबड़-खाबड़ और पथरीले रास्ते पर चलना पड़ा। दरअसल, विद्यासागरजी को ललितपुर से देवगढ़ पहुंचने के बाद मुंगावली जाना था। व्यवस्थापकों से कहा गया कि वे नजदीक का रास्ता खोजें, जिससे जल्द पहुंचा जा सके। व्यवस्थापकों ने जो रास्ता ढूंढा, वो बेहद खराब था। इससे 10 संतों के पांवों में छाले पड़ गए। बावजूद इसके कोई भी संत न वापस हुआ और न आगे बढ़ने से रुका। यह देखकर भक्तों के आंसू निकल आए।


-व्यवस्थापकों ने इस बात को तो ध्यान में रखा कि आचार्य श्री जल्द मुंगावली पहुंच जाएंगे, परंतु वे यह भूल गए कि नए संतों को इस मार्ग पर चलने में कितनी कठिनाई होगी। मुंगावली निवासी जैन समाज के सदस्य रूपेश मुंगावली ने बताया कि व्यवस्थापकों से कहा गया था कि मुंगावली जाने के लिए जो रास्ता नजदीक हो, वे उसकी जानकारी पता कर बताएं। मुंगावली की दूरी मुख्य मार्ग से 48 किमी और वैकल्पिक मार्ग से 28 किमी है। मुंगावली ने बताया कि व्यवस्थापकों ने यह नहीं बताया कि छोटा रास्ता पथरीला है और नदी भी है, जिसे नाव से पार करना होगा।
-भोपाल के संजय मुंगावली ने बताया कि साधु व्यवस्थापकों द्वारा दी गई जानकारी पर भरोसा कर आगे बढ़ते गए। दरअसल, व्यवस्थापकों ने गाड़ियों पर बैठकर यह रास्ता देखा था, इसलिए उन्हें कठिनाइयों का आभास नहीं हुआ।
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Jain Muni Vidyasagar Maharaj was walking 28 km  on the rocky path
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