--Advertisement--

जेएएच: इलाज कराने जा रहे हैं तो पता कर लें, कहीं डॉक्टर छुट्टी पर तो नहीं हैं

विभागाध्यक्षों ने जो रोस्टर बनाए हैं, उसमें इस बात का ध्यान रखा गया है कि ओपीडी में मरीजों को विशेषज्ञ मिलें।

Danik Bhaskar | May 02, 2018, 06:13 AM IST

ग्वालियर. आप यदि जेएएच में अपने मरीज का इलाज कराने जा रहे हैं तो पहले यह पता कर लें कि जिस विशेषज्ञ से इलाज करवाना चाहते हैं, वह छुट्टी पर तो नहीं है। दरअसल, गजराराजा मेडिकल कॉलेज के करीब 40 फीसदी डॉक्टर छुट्टी पर हैं। हालांकि, विभागाध्यक्षों ने जो रोस्टर बनाए हैं, उसमें इस बात का ध्यान रखा गया है कि ओपीडी में मरीजों को विशेषज्ञ मिलें।


चिकित्सा शिक्षा विभाग मई व जून में चिकित्सा शिक्षकों को एक माह तक अवकाश देता है। हालांकि विभाग के नियम के मुताबिक किसी भी विभाग में एक साथ 50 फीसदी से अधिक चिकित्सा शिक्षक अवकाश नहीं ले सकते। फिर भी चिकित्सा शिक्षकों ने अपने स्तर पर रजामंदी कर छुट्टी लेना शुरू कर दिया है। कुछ डॉक्टर मंगलवार से ही अवकाश पर चले गए और ज्यादातर बुधवार से अवकाश पर रहेंगे। इनमें अधिकांश डॉक्टर मई के बाद ही ड्यूटी पर आएंगे।

ये प्रमुख डॉक्टर हैं अवकाश पर

- मेडिसिन: डॉ. सुषमा त्रिखा, डॉ. अर्चना गुप्ता, डॉ. संजय धवले, डॉ. धर्मेंद्र तिवारी, डॉ. प्रदीप प्रजापति, डॉ. श्वेता सहाय और डॉ. राकेश गहिरवार।
- गायनिक: डॉ. यशोधरा गौर, डॉ. अर्चना मौर्य, डॉ. अचला सहाय, डॉ. रेनू जैन अवकाश पर हैं। इससे पहले डॉ. नीलम राजपूत दो साल के अवकाश पर पहले से ही चल रही हैं।
- सर्जरी: डाॅ. प्रशांत श्रीवास्तव, डॉ. अजय गंगजी, डॉ. अनुराग चौहान, डॉ. आशीष श्रीवास्तव, डॉ. हिमांशु चंदेल, डॉ. संदीप ठाकरे, डॉ. नवीन कुशवाह।
- आर्थोपेडिक: डॉ. अभिलेख मिश्रा, डॉ. सुरेंद्र यादव और डाॅ. आशीष कौशल।
- पीडियाट्रिक: डॉ. घनश्यामदास।
- ईएनटी: डॉ. बीपी नार्वे, डॉ. अमित जैन।
- रेडियोलॉजी: डॉ. अक्षरा गुप्ता, डॉ. इंद्रकुमार बाथम, डॉ.राजेश बघेल, डॉ. रत्नेश जैन।
- पैथोलॉजी: डॉ. सुधा अयंगर, डॉ. राज लक्ष्मी शर्मा, डॉ. केएस मंगल।
- माइक्रो बायोलॉजी: डॉ.सरिता भरत, डॉ. केपी रंजन, डॉ. नीलिमा रंजन।
- नेत्र: डॉ. यूएस तिवारी व डॉ. रश्मि खुजूर।

मरीजों को परेशानी नहीं होने देंगे
जीआरएमसी डीन डॉक्टर एसएन अयंगर ने बताया कि डॉक्टरों के अवकाश को देखते हुए सभी विभाग अध्यक्षों से कहा गया है कि वह इस बात का विशेष ध्यान रखें कि मरीज परेशान न हो। सभी विभाग अध्यक्षों ने उसी हिसाब से रोस्टर तैयार किए हैं।