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भोपाल. साथी विधायकों ने खबर पहुंचाई थी कि वे हमसे मिलना चाहते हैं। मैं, लाखन सिंह, ग्वालियर वाले अशोक सिंह हाटपिपल्या के विधायक मनोज चौधरी के पिता नारायण चौधरी व भाई बलराम चौधरी को लेकर गुरुवार सुबह बेंगलुरू पहुंचे। बीएलवीडी रिसोर्ट में कड़ी सुरक्षा के बीच हम जैसे-तैसे मनोज के कमरे तक हम पहुंच गए।
मनोज ने पिता नारायण को देखा तो बात करने के लिए आगे बढ़ा। एक मिनट भी बात नहीं हुई थी। इतने में सुरक्षा में तैनात डीसीपी आ धमके। यहां एक-एक विधायक की सुरक्षा में एक डीसीपी स्तर का अधिकारी तैनात है। वे हमें बाहर निकलने को कहने लगे। हमने कहा कि बात करने में क्या दिक्कत है। पिता को तो बात करने दो बेटे से। लेकिन किसी ने हमारी बात नहीं सुनी। वो हमसे अभद्रता करने लगे। धक्का-मुक्की की और हमें हिरासत में ले लिया।
पुलिस की गाड़ी से हमें ले जाकर एक घंटे से ज्यादा समय तक थाने में रखा गया। वे हमसे ऐसे सलूक कर रहे थे, जैसे हम कोई अपराधी हों। इसके बाद भाजपा के ही कुछ नेताओं ने पुलिस को बताया कि जिन्हें हिरासत में लिया है, वो मध्यप्रदेश में मंत्री रहे हैं। इसके बाद पुलिस का रवैया बदला और हमें जाने दिया गया। हालांकि हम अब भी यहीं बेंगलुरु में डटे हैं। अपने साथियों को यहां अकेले कैसे छोड़ देंगे।
उधर, विधायक मनोज के भाई बलराम ने कहा, घर से साेमवार से गया है। माेबाइल बंद है। संपर्क नहीं हाे पा रहा है। हमें जानकारी लगी थी कि मनाेज बेंगलुरू के रिसॉर्ट में है। इसलिए हम उनसे मिलने के लिए फ्लाइट से बैंगुलरू पहुंचे। हमें लोगों और टीवी के माध्यम से ही पता चला कि मनोज ने इस्तीफा दे दिया है। हम ताे सिंधियाजी के ही साथ थे। भाजपा द्वारा बंधक बनाने के बारे में ताे कुछ नहीं कह सकता किनझे और मेरे पिता नारायणसिंह चाैधरी काे मनाेज की सुरक्षा की चिंता हाे रही थी, इसलिए यहां देखने चले आए।
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