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झाबुआ में है प्रदेश का एकमात्र बावन जिनालय, जहां हैं 52 शिखर और 251 प्रतिमाएं, जिसे देखने प्रदेशभर से आते हैं लोग

1850 में दादा गुरुदेव की प्रेरणा से छोटे से मंदिर को 52 जिनालय में परिवर्तित करने का काम चालू हुआ। 5 साल में निर्माण...

Dainik Bhaskar

Sep 10, 2018, 03:15 AM IST
Bhopal - झाबुआ में है प्रदेश का एकमात्र बावन जिनालय, जहां हैं 52 शिखर और 251 प्रतिमाएं, जिसे देखने प्रदेशभर से आते हैं लोग
1850 में दादा गुरुदेव की प्रेरणा से छोटे से मंदिर को 52 जिनालय में परिवर्तित करने का काम चालू हुआ। 5 साल में निर्माण हुआ।

1978 में जिनालय में आचार्य जयंतसेन सूरिश्वरजी की निश्रा में गुरु मंदिर बनाया गया।

2011-13 के बीच लाल पत्थरों के मंदिर का जीर्णोद्धार कर मार्बल लगाया गया।

भोपाल से झाबुआ इस तरह पहुंचें

बावन जिनालय को देखने के लिए भोपाल से पहले इंदौर जाना पड़ेगा। यह दूरी 190 किलोमीटर की है। इंदौर से झाबुआ की दूरी 150 किलोमीटर है। झाबुआ बस स्टैंड से मंदिर की दूरी 300 मीटर की है। यानी वाकिंग डिस्टेंस पर मंदिर है।

झाबुआ | यह है झाबुआ स्थित प्रदेश का एकमात्र बावन जिनालय। यहां 52 शिखर हैं और 251 प्रतिमाएं। 122 साल पहले इसकी स्थापना दादा गुरुदेव राजेंद्र सूरिश्वरजी ने की थी। स्थानीय जैन समाज के वरिष्ठ धरमचंद्र मेहता बताते हैं-ऐसी मान्यता है कि नंदीश्वर द्वीप आठवां द्वीप है, जहां 52 शाश्वत जिनालय हैं। द्वीप पर चार दिशाओं में चार पर्वत हैं और एक-एक पर्वत पर 13-13 मंदिर हैं। ऐसा माना जाता है कि इस द्वीप पर केवल देवता जा सकते हैं, मनुष्य नहीं। झाबुआ का बावन जिनालय इसी द्वीप की परिकल्पना है। कई लोगों के मन में भाव होते हैं कि वे भी नंदीश्वर द्वीप जा पाते, बावन जिनालय के दर्शन कर वे लोग द्वीप के दर्शन की अनुभूति कर सकें, इस उद्देश्य से दादा गुरुदेव राजेंद्रसूरिश्वर ने झाबुआ में इस मंदिर की स्थापना की थी।

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