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पूर्व कुलपति की जांच करने वाले जस्टिस गोहिल ने BU काे लौटाया 40 हजार का चेक, कहा-80 सीटिंग की है, इस हिसाब से पेमेंट करो

राजभवन ने जांच अधिकारी नियुक्त कर पूर्व कुलपति के खिलाफ कराई थी जांच।

Dainik Bhaskar

May 02, 2018, 07:06 PM IST
Justice Gohil, who investigated the former Vice-Chancellor, gave the return of BU to the check of 40 thousand

भोपाल. बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ.एमडी तिवारी के खिलाफ जांच करने वाले हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस अभय गोहिल ने 40 हजार का मानदेय लेने से इनकार कर दिया है। इसका चेक को बीयू को वापिस लौटा दिया है। जस्टिस गोहिल ने कहा है कि यह उनकी प्रतिष्ठा व कार्य के अनुरूप नहीं है।

-बीयू के अधिकारियो के मुताबिक जस्टिस गोहिल ने 30 हजार रुपए प्रति सिटिंग के हिसाब से मानदेय मांगा है। जबकि राजभवन ने 40 हजार रुपए का भुगतान करने के आदेश दिए हैं। जस्टिस गोहिल ने रजिस्ट्रार को लिखे पत्र में हाईकोर्ट जाने को भी कहा है।

80 सीटिंग की है, उस हिसाब से पेमेंट चाहिए
-राजभवन ने बीयू में हुई भर्ती में गड़बड़ी सहित अन्य मामलों की जांच करने के लिए अक्टूबर 2015 को जांच अधिकारी नियुक्त किया था। इसके बाद इन्होंने आठ महीने में 80 सिटिंग कर करीब सौ पेज की रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद 30 हजार रुपए सिटिंग के हिसाब से करीब 24 लाख मानदेय की मांग की गई थी। जस्टिस गोहिल दो साल पहले जांच रिपोर्ट सौंप चुके हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर कुलपति डॉ. तिवारी को हटाया गया।

जस्टिस गोहिल का बीयू के रजिस्ट्रार को लिखा पत्र
-जस्टिस गोहिल ने पत्र में लिखा है कि, अचानक ही आपका पत्र 5 मार्च 2018 को मिला। इसके पूर्व ही मैं राज्यपाल व कुलाधिपति द्वारा स्वीकृत राशि लेने से अस्वीकार कर चुका हूं। इतनी लंबी जांच के लिए इतनी राशि आपकी और मेरी प्रतिष्ठता एवं कार्य के अनुरूप नहीं है। मैंने फिर राज्यपाल से इस प्रकरण में न्यायसंगत निर्णय लेने का अनुरोध किया है। यदि कोई सम्मानजनक निर्णय नहीं होगा तो मुझे हाईकोर्ट से इस हेतू आग्रह करना पड़ेगा। यह राशि मुझे स्वीकार नहीं है।
राजभवन ने बढ़ाए 10 हजार रुपए
-बीयू ने राजभवन के अगस्त 2016 मे दिए पहले आदेश के अनुसार 30 हजार रुपए मानदेय देने को कहा था। जस्टिस गोहिल ने इस आपत्ति दर्ज कराई तो राजभवन ने सितंबर 2016 को 10 हजार रुपए की बढ़ोतरी कर 40 हजार रुपए का भुगतान करने की स्वीकृति दी। बीयू ने यह राशि मार्च 2018 में संशोधित आदेश का हवाला देकर पहुंचाई तो उन्होंने इस राशि को लौटा दिया।
पहली जांच के लिए दिए 30 हजार रुपए प्रति सिटिंग
-बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी राजभवन के आदेश पर जांच अधिकारी को 40 हजार रुपए देने के नियम पेश कर रहा है। दूसरी ओर देखे तो यही विश्वविद्यालय जस्टिस गोहिल को ही एक अन्य जांच के मामले में 30 हजार रुपए प्रति सिटिंग के हिसाब से 4.50 लाख का भुगतान कर चुका है। यह भुगतान करते समय राजभवन के निर्देश नहीं देखे गए।

राजभवन भेज रहे हैं जानकारी
-बीयू के रजिस्ट्रार डॉ. यूएन शुक्ला ने बताया कि राजभवन द्वारा जांच कराई गई थी और उन्होंने ही जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था। इसलिए जस्टिस गोहिल के पत्र की जानकारी राजभवन को पहुंचाई जा रही है। जो भी निर्देश प्राप्त होंगे उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इससे हटकर हम कोई कार्रवाई नहीं कर सकते।

पहली जांच जैसा ही भुगतान करें
-पहली जांच के लिए ही इन्होंने 30 हजार रुपए प्रति सिटिंग के हिसाब से मानदेय का भुगतान किया था। इसी हिसाब से दूसरी जांच के भुगतान की मांग की गई थी। इसके बाद भी अन्य आप्शन भी दिया गया कि हाईकोर्ट के जज का जो वेतन होता है उसमें से पेंशन की राशि घटाकर भुगतान कर दिया जाए। -अभय गोहिल, रिटायर्ड जस्टिस हाईकोर्ट

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