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सारंगी-सितार का मिश्रण है 17वीं शताब्दी का वाद्ययंत्र ताऊस, मयूरी वीणा भी है इसका नाम

उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी के दो दिनी दुर्लभ वाद्य प्रसंग समारोह की शुरुआत बुधवार से रवींद्र में...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 03, 2018, 02:25 AM IST

सारंगी-सितार का मिश्रण है 17वीं शताब्दी का वाद्ययंत्र ताऊस, मयूरी वीणा भी है इसका नाम
उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी के दो दिनी दुर्लभ वाद्य प्रसंग समारोह की शुरुआत बुधवार से रवींद्र में हुई। उस्ताद लतीफ खां के सम्मान में आयोजित इस कार्यक्रम की पहली शाम सारंगी वृंद, शहनाई और ताऊस की सुरलहरियां गुंजायमान हुईं। संगीत सभाओं का शुभारंभ अब्दुल लतीफ खां शिष्य मंडल के कलाकारों ने सारंगी वृंद की प्रस्तुति से किया। इससे पहले वर्ष 2016-17 और 2017-18 के उस्ताद लतीफ खां सम्मान से शहनाई वादक दयाशंकर और ताऊस वादक संदीप सिंह को सम्मानित किया गया। नई दिल्ली से आए दयाशंकर एवं साथी कलाकारों ने शहनाई वादन पेश किया। अंत में जालंधर के संदीप सिंह का ताऊस वादन हुआ। 17वीं शताब्दी के इस वाद्ययंत्र को मयूरी वीणा कहा जाता है। चूंकि मोर को पर्शियन में ताऊस कहा जाता है। इस वाद्ययंत्र में सारंगी और सितार का मिश्रण है।

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