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बिना हल फसल उगाते हैं बैगा, पहाड़ी कोरवा लोग

गांधी भवन में किताब जंगल के हकदार का विमाेचन व जनजातीय समुदाय के पुरखौती बीज व जंगल आधारित खाद्य सामग्री की...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 03, 2018, 02:25 AM IST

बिना हल फसल उगाते हैं बैगा, पहाड़ी कोरवा लोग
गांधी भवन में किताब जंगल के हकदार का विमाेचन व जनजातीय समुदाय के पुरखौती बीज व जंगल आधारित खाद्य सामग्री की प्रदर्शनी का आयोजन बुधवार को किया गया। प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के पहाड़ी कोरवा, मध्यप्रदेश की बैगा जनजाति, उत्तराखंड की टेहरी गढ़वाल, पातालकोट और छत्तीसगढ़ की कमार व बिरहोर जनजाति के रहवासी क्षेत्र में मिलने वाले खाद्य बीजों को प्रदर्शित किया गया। इसे निर्माण संस्था ने आयोजित किया।

150 तरह के अनाज

मध्यप्रदेश की बैगा और छत्तीसगढ़ की कोरवा जनजाति के लोगों ने यहां करीब 150 तरह के अनाज और बीज प्रदर्शित किए। खास बात यह है कि दोनों ही जनजाति के लोग खेतों में हल नहीं चलाते। बिना जुताई और बिना किसी रासायनिक खाद के यह फसल उगाते हैं। खाद्य सामग्री के तौर पर इस्तेमाल होने वाली करीब 60 प्रतिशत सामग्रियां जंगलों से सीधे लेते हैं। दोनों ही जनजातियों की मान्यता है कि धरती मां है और खाने के लिए इस पर जुताई की गई, तो मां को तकलीफ होगी। वहीं उत्तराखंड से विजय जड़धरी यहां पर ऐसे रेयर बीजों का कलेक्शन लेकर आए। उन्होंने बताया, हमारे क्षेत्र में पिछले तीस साल से बीज बचाओ आंदोलन चल रहा है, जिसमें हमने धान की 350 प्रजातियां, गेहूं की 32 प्रजातियां, राजमा की 220 प्रजातियां और नौरंगी दालों की 25 प्रजातियां संरक्षित कीं।

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