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इंसान हो या जानवर हर किसी पर होता है संगत का असर

मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में बुद्धत्व की कथाओं के रंग महोत्सव पर केन्द्रित यशोधरा में बुधवार को बुद्ध की...

Dainik Bhaskar

May 03, 2018, 02:25 AM IST
इंसान हो या जानवर हर किसी पर होता है संगत का असर
मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में बुद्धत्व की कथाओं के रंग महोत्सव पर केन्द्रित यशोधरा में बुधवार को बुद्ध की जातक कथाएं एवं रंग संभावनाओं पर व्याख्यान हुआ। वहीं महिलामुख जातक पर आधारित नाटक जस संगत तस रंगत का मंचन संग्रहालय के मुक्ताकाश मंच पर हुआ। कथा के अनुसार वाराणसी में राजा ब्रह्मदत्त का राज था और उनके बहुत ही बुद्धिमान मंत्री थे बोधिसत्व। राजा ब्रह्मदत्त के पास एक सीधा-सादा हाथी था। एक दिन उस हाथी के ठिकाने के पास बैठकर कुछ चोर चोरी की योजना बनाते हैं। वो ये भी बातें करते हैं कि एक चोर का स्वाभाव कैसा होना चाहिए। जैसे की हमें बहुत साहसी और कठोर होना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर किसी के प्राण लेने से भी नहीं हिचकिचाना चाहिए। चोर प्रतिदिन वहां आकर इसी प्रकार की बातें किया करते। पास बैठा हाथी उनकी सारी बातें सुनता है और मान लेता है कि ये सारी शिक्षा उसे दी जा रही है। धीरे-धीरे हाथी का व्यवहार बदलने लगता है। वो बहुत ही क्रोधी और आक्रामक हो जाता है अपने ही महावत के प्राण ले लेता है। तब बोधिसत्व उसके इस प्रकार के परिवर्तित व्यवहार का कारण पता लगाते हैं और फिर उसे ठीक करने का उपाय सोचते हैं और सिद्ध कर देते हैं कि संगत का असर सभी पे होता है।

सिटी रिपोर्टर | भोपाल

मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में बुद्धत्व की कथाओं के रंग महोत्सव पर केन्द्रित यशोधरा में बुधवार को बुद्ध की जातक कथाएं एवं रंग संभावनाओं पर व्याख्यान हुआ। वहीं महिलामुख जातक पर आधारित नाटक जस संगत तस रंगत का मंचन संग्रहालय के मुक्ताकाश मंच पर हुआ। कथा के अनुसार वाराणसी में राजा ब्रह्मदत्त का राज था और उनके बहुत ही बुद्धिमान मंत्री थे बोधिसत्व। राजा ब्रह्मदत्त के पास एक सीधा-सादा हाथी था। एक दिन उस हाथी के ठिकाने के पास बैठकर कुछ चोर चोरी की योजना बनाते हैं। वो ये भी बातें करते हैं कि एक चोर का स्वाभाव कैसा होना चाहिए। जैसे की हमें बहुत साहसी और कठोर होना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर किसी के प्राण लेने से भी नहीं हिचकिचाना चाहिए। चोर प्रतिदिन वहां आकर इसी प्रकार की बातें किया करते। पास बैठा हाथी उनकी सारी बातें सुनता है और मान लेता है कि ये सारी शिक्षा उसे दी जा रही है। धीरे-धीरे हाथी का व्यवहार बदलने लगता है। वो बहुत ही क्रोधी और आक्रामक हो जाता है अपने ही महावत के प्राण ले लेता है। तब बोधिसत्व उसके इस प्रकार के परिवर्तित व्यवहार का कारण पता लगाते हैं और फिर उसे ठीक करने का उपाय सोचते हैं और सिद्ध कर देते हैं कि संगत का असर सभी पे होता है।

जातक कथाओं की संभावनाओं पर चर्चा

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. राधावल्लभ त्रिपाठी के व्याख्यान से हुई। उन्होंने जातक कथाओं पर चर्चा करते हुए बताया कि बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक के सुत्तपिटक अंतर्गत खुद्दकनिकाय के दसवें भाग में जातक कथाएं हैं। इनमें महात्मा बुद्ध के पूर्व जन्मों की कथाएं हैं। डॉ. त्रिपाठी ने जातक कथाओं और थिएटर में इन कथाओं की संभावनाओं पर चर्चा की।

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