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नृत्य-नाटिका में दिखे बुद्ध के अनेक रूप

मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में बुद्धत्व की कथाओं के रंग महोत्सव पर केन्द्रित समारोह यशोधरा में सोमवार को...

Danik Bhaskar | May 01, 2018, 03:10 AM IST
मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में बुद्धत्व की कथाओं के रंग महोत्सव पर केन्द्रित समारोह यशोधरा में सोमवार को 'वंदना-ध्रुपद गायन' और नाटक 'स्वर्ण संहार' का मंचन हुआ। पहली प्रस्तुति में सुरेखा कामले निकोसे ने साथी कलाकारों के साथ गायन की शुरुआत पारंपरिक बुद्ध वंदना 'बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, संघं शरणं गच्छामि..' से की। पाली भाषा की इस वंदना में गौतम बुद्ध के त्रिशरण (बुद्ध, धम्मं, संघ तथा पंचशील, अहिंसा, अस्तेय, सत्य, अत्याभिचार एवं अपरिग्रह) स्वरूपों का नमन किया गया। दूसरी प्रस्तुति में सुमन साहा के निर्देशन में मोर जातक पर आधारित नाटक 'स्वर्ण संहार' का मंचन हुआ।