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चंदेरी साड़ियों के बनने की कहानी "चंदेरीनामा'

हाल ही में घोषित 65वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री कैटेगरी में फिल्म चंदेरीनामा का चयन किया...

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 03:10 AM IST
चंदेरी साड़ियों के बनने की कहानी
हाल ही में घोषित 65वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री कैटेगरी में फिल्म चंदेरीनामा का चयन किया गया है। इस डॉक्यूमेंट्री का निर्माण प्रोआर्ट इंडिया द्वारा किया गया है। 13 मिनट की इस फिल्म की शूटिंग मप्र के चंदेरी शहर में की गई। गौरतलब है कि इससे पहले फिल्म को बेस्ट प्रमोशनल फिल्म अवॉर्ड-2017 से नवाजा जा चुका है। फिल्म के निर्देशक राजेंद्र जांगले ने बताया कि यह फिल्म मध्यप्रदेश हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम के लिए चंदेरी साड़ी और बुनकरों के प्रचार प्रसार के लिए बनाई थी। चंदेरी पत्थरों पर लिखी एक नजाकत है, जो सांस लेती है चंदेरी की साड़ियों में। फिल्म के स्क्रिप्ट राइटर सूरज प्रकाश की ये लाइन सटीक अहसास कराती है कि चंदेरी के बुनकर सदियों से पत्थरों पर बनी फूलों की बूटियों को साड़ियों में उकेरते आए हैं। इस फिल्म में ध्रुपद गायक गुंदेचा बंधुओं द्वारा गाया कबीर भजन झीनी-बीनी चंदरिया…, खास आकर्षण का केन्द्र है। फिल्म में सिनेमेटोग्राफी रजा मावल और राजेंद्र जांगले की है। फिल्म की एडिटिंग जी सेतु किरण और असित जैन की है। बैकग्राउंड स्कोर उमेश तरकसवार का है। फिल्म को आवाज दी आयुश्री सक्सेना ने।

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चंदेरी साड़ियों के बनने की कहानी
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