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बच्चों के व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण में सहायक साबित होते हैं पंचशील

केरवा डेम स्थित धम्मपाल विपश्यना केंद्र में आयोजित विपश्यना शिविर में बड़ी संख्या में 13 से 16 वर्ष के युवा शामिल...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:10 AM IST

बच्चों के व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण में सहायक साबित होते हैं पंचशील
केरवा डेम स्थित धम्मपाल विपश्यना केंद्र में आयोजित विपश्यना शिविर में बड़ी संख्या में 13 से 16 वर्ष के युवा शामिल हुए। इसमें 29 बॉयज़ और 22 गर्ल्स शामिल थीं। शिविर में बच्चों को कई महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बच्चों को बताया कि मन में शांति और खुशी चाहिए तो उन्हें पांच कामों से बचना होगा। जिन्हें पंचशील कहते है। जैसे झूठ नहीं बोलना, गंदी व कड़वी बात नहीं बोलना, चुगली और बुराई नहीं करना, चोरी नहीं करना, जीव हत्या नहीं करना, नशा नहीं करना और ब्रह्मचर्य का पालन करना आदि के बारे में बताया गया। शिविर में शिक्षक हेमंत पाटीदार ने बताया कि जहां पंचशील का मार्ग बच्चों के चरित्र निर्माण में सहायक होता है, वहीं मन भी शांत एवं सकारात्मक रहता है। इससे आती-जाती सांस स्वभाविक रहती है और आनापाना पुष्ट होता है। यह बच्चों की स्मरण शक्ति और मन की एकाग्रता में सहायक होता है। शिविर में बच्चों ने चंचल मन को एकाग्र करना सीखा, ताकि सभी प्रकार की क्षमताएं विकसित हो सके। अगला शिविर 8 से 12 वर्ष की लड़कियों और लड़कों के लिए 17 जून को रखा गया है।

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