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वो नादान खुदा को चिट्ठी लिखती थी मैं उसकी चिट्ठी पहुंचाया करता था

लिटरेचर ग्रुप की ओर से शनिवार को सोज-ए-सुखन का आयोजन किया गया। इस इब्तेदा मुशायरे में शहर के कई कॉलेज गोइंग...

Dainik Bhaskar

Apr 08, 2018, 03:35 AM IST
वो नादान खुदा को चिट्ठी लिखती थी मैं उसकी चिट्ठी पहुंचाया करता था
लिटरेचर ग्रुप की ओर से शनिवार को सोज-ए-सुखन का आयोजन किया गया। इस इब्तेदा मुशायरे में शहर के कई कॉलेज गोइंग स्टूडेंट्स ने अपनी प्रतिभा दिखाई। युवाओं ने अपनी गजलों और शायरी से फिजा में रुमानियत और सूफियाना रंग घोल दिया। योगेश पांडे ने "वो नादान खुदा को चिट्‌ठी लिखती थी, मैं उसकी चिट्‌ठी पहुंचाया करता था'..., शेर पढ़ा। शशांक पटेरिया ने वर्तमान व्यवस्था पर प्रहार किया। युवा कवि मानस भारद्वाज ने रिश्ते को यह कहते हुए व्यक्त किया कि "बहन जब बड़ी हो जाती है तो उम्र में उससे बड़ा भाई उससे छोटा हो जाता है'…, सुनाया। कुमार विश्वास के साथ मंच साझा कर चुके शायर निवेश साहू ने मैं तो पानी में बहा आया मुझे क्या, जिसके हाथों में दिये जाते हैं, जाएं…, शायरी सुनाई। सुभाष अंजाना ने मैं एक शख्स जिसे रास्ता ही सब कुछ है, मैं एक शख्स जिसे रास्ता नहीं मिलता..., गज़ल सुनाई। भारत की धार्मिक विरासत की ओर इशारा करते हुए जितेन्द्र परमार ने पढ़ा कि अगर ठीक से पढ़ पाओ तो बस गीता का सार बहुत है...,। अंत में चित्रांश खरे ने अपनी गजल से दाद बटोरी।

सोज़-ए सुखन के मुशायरे में चला शेर-ओ- शायरी का दौर, किसी ने बयां किया अपना हाल-ए-दिल तो किसी ने बताई जिंदगी की जद्दोजहद

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