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तीन मोहरा गेट से गिरे पत्थर, हादसा टला कोई एजेंसी मुआयना करने तक नहीं पहुंची

ऐतिहासिक ताजमहल का हिस्सा है यह तीन मोहरा गेट, इसके रखरखाव की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की इंफ्रास्ट्रक्चर...

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 03:35 AM IST
तीन मोहरा गेट से गिरे पत्थर, हादसा टला कोई एजेंसी मुआयना करने तक नहीं पहुंची
ऐतिहासिक ताजमहल का हिस्सा है यह तीन मोहरा गेट, इसके रखरखाव की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की

इंफ्रास्ट्रक्चर रिपोर्टर | भोपाल

शाहजहांनाबाद क्षेत्र में तीन मोहरा गेट पर एक बड़ा हादसा टल गया। जर्जर हो चुकी इन मोहरों के पत्थर सड़क पर आ गिरे। राजधानी के इस ऐतिहासिक प्रवेश द्वार से दिन भर वाहनों की आवाजाही लगी रहती हैं। नादरा बस स्टैंड से जाने वाली बसों के अलावा लो फ्लोर बसें भी यहां से गुजरती हैं। इससे हादसे की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

पत्थर गिरने के बाद ट्रैफिक पुलिस ने वहां बैरिकेट लगा कर अपना कर्तव्य पूरा कर लिया। लेकिन किसी भी अन्य एजेंसी ने बिल्डिंग का मुआयना करने तक की जरूरत नहीं समझी। यह तीन मोहरा गेट ऐतिहासिक ताजमहल का हिस्सा है। पर्यटन बोर्ड ने ताज महल को हेरिटेज होटल के रूप में डेवलप करने के लिए इंदौर की एक कंपनी को बिल्डिंग 90 साल की लीज पर दी है। यह कंपनी ताज महल के भीतर के जर्जर हिस्से का रिनोवेशन कर रही है। लेकिन मोहरा उपेक्षित ही रह गए हैं। बताया जाता है कि तीन मोहरा के रखरखाव की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की है, लेकिन हादसे के बाद भी पीडब्ल्यूडी ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। शहर में जर्जर इमारतों की सूची तैयार कर नोटिस आदि देने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। लेकिन नगर निगम ने वर्षों से इस सूची को अपडेट नहीं किया है।

13 साल में बना था ताजमहल : उल्लेखनीय है कि 1870 में भोपाल की तत्कालीन नवाब शाहजहां बेगम ने ताज महल का निर्माण शुरू कराया था। 17 एकड़ में फैला ताजमहल 13 साल में तैयार हो पाया था।

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