• Hindi News
  • Madhya Pradesh
  • Bhopal
  • News
  • ट्रांसफर स्टेशनों के पास कचरे के ढेर, सेग्रीगेशन हो ही नहीं रहा; 223 कंपोस्ट यूनिट में जैविक खाद बनना बंद

ट्रांसफर स्टेशनों के पास कचरे के ढेर, सेग्रीगेशन हो ही नहीं रहा; 223 कंपोस्ट यूनिट में जैविक खाद बनना बंद / ट्रांसफर स्टेशनों के पास कचरे के ढेर, सेग्रीगेशन हो ही नहीं रहा; 223 कंपोस्ट यूनिट में जैविक खाद बनना बंद

Bhaskar News Network

May 18, 2018, 03:35 AM IST

News - शहर से प्रतिदिन 850 मैट्रिक टन कचरा निकलता है। निगम का दावा है कि यह कचरा आदमपुर छावनी पहुंचाया जाता है। लेकिन, हकीकत...

ट्रांसफर स्टेशनों के पास कचरे के ढेर, सेग्रीगेशन हो ही नहीं रहा; 223 कंपोस्ट यूनिट में जैविक खाद बनना बंद
शहर से प्रतिदिन 850 मैट्रिक टन कचरा निकलता है। निगम का दावा है कि यह कचरा आदमपुर छावनी पहुंचाया जाता है। लेकिन, हकीकत यह है कि आज भी बहुतायत में कचरा शहर के अलग-अलग हिस्सों में बने ट्रांसफर स्टेशनों में सड़ता है। यही नहीं इन ट्रांसफर स्टेशनों पर ही आग लगाकर कचरा ढिकाने लगा दिया जाता है। इसी हफ्ते में दानापानी के पास ट्रांसफर स्टेशन और आरिफ नगर के ट्रांसफर स्टेशन में आग लगने से भारी तादाद में कचरा जला।

रियलिटी चैक

ट्रांसफर स्टेशनों में जल रहा कचरा

भोपाल| लगातार दूसरे साल स्वच्छता सर्वे में भोपाल ने दूसरा स्थान तो हासिल कर लिया, लेकिन आज शहर में सफाई व्यवस्था की जो हालत है, वह नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। सर्वे के ठीक पहले नवंबर में अमला सक्रिय हुआ और जमीन पर सर्वे टीम को दिखाने मात्र के लिए काम किया। इसके बाद फिर वही पुराना ढर्रा... जगह-जगह कचरे के ढेर दिखाई दे जाते हैं, डोर टू डोर कचरा कलेक्शन में ढिलाई हो रही है और करीब 80 फीसदी कंपोस्ट यूनिट में खाद बनना बंद हो चुकी है।

गीले कचरे का बिन गायब... यही हाल नगर निगम की व्यवस्था का भी, सेग्रीगेशन का सिस्टम ही नहीं बन सका

तस्वीर नानके पेट्रोल पंप के पास की है। कचरे का सेग्रीगेशन साइकल रिक्शा और डस्टबिन को हरा और नीला करने तक ही सीमित रहा। इसे लेकर जमीन पर कोई काम ही नहीं हुआ।

सिर्फ दिखावे की कार्रवाई

30 लाख खर्च, अब कंपोस्ट यूनिट बंद

निगम ने अन्य एजेंसियों आैर निजी कॉलोनियों के साथ मिलकर 273 पार्कों में कंपोस्ट यूनिट बनाईं। इस पर 30 लाख से अधिक राशि खर्च की। यहां पार्क से निकलने वाले कचरे से जैविक खाद बननी थी। टारगेट था रेाज पांच टन जैविक खाद बनाने का लेकिन अाज सिर्फ 50 यूनिट ही चालू हालत में हैं।

फिर पुराने ढर्रे पर व्यवस्थाएं


वेस्ट टू एनर्जी प्लांट को लेकर कोई काम नहीं

भानपुर खंती बंद करके आदमपुर छावनी की नई साइट बनाई गई। यहां एस्सेल इंफ्रा को वेस्ट टू एनर्जी प्लांट बनाना था। जहां कचरे से खाद बनाई जानी थी। करार के मुताबिक आठ महीने पहले यहां बिजली उत्पादन शुरू हो जाना था। आदमपुर में भानपुर खंती की तरह ही कचरा डंप किया जा रहा है।

मुझे तो सिर्फ दो महीने ही मिले


कमियों को दूर करेंगे


X
ट्रांसफर स्टेशनों के पास कचरे के ढेर, सेग्रीगेशन हो ही नहीं रहा; 223 कंपोस्ट यूनिट में जैविक खाद बनना बंद
COMMENT

किस पार्टी को मिलेंगी कितनी सीटें? अंदाज़ा लगाएँ और इनाम जीतें

  • पार्टी
  • 2019
  • 2014
336
60
147
  • Total
  • 0/543
  • 543
कॉन्टेस्ट में पार्टिसिपेट करने के लिए अपनी डिटेल्स भरें

पार्टिसिपेट करने के लिए धन्यवाद

Total count should be

543