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इकबाल मैदान... युवा पूरे रमजान माह में करवाएंगे रोजा इफ्तार

पवित्र रमजान-उल-मुबारक माह के पहले दिन गुरुवार को मुस्लिम धर्मावलंबियों ने पूरी शिद्दत के साथ पहला रोजा रखा। पहला...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 03:40 AM IST

इकबाल मैदान... युवा पूरे रमजान माह में करवाएंगे रोजा इफ्तार
पवित्र रमजान-उल-मुबारक माह के पहले दिन गुरुवार को मुस्लिम धर्मावलंबियों ने पूरी शिद्दत के साथ पहला रोजा रखा। पहला ही रोजा सेहरी से इफ्तारी होने तक 15 घंटे 11 मिनट का था, दोपहर साढ़े 3 बजे गर्मी का आलम यह था कि तापमान 43. 7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। बावजूद इसके गर्मी न तो रोजेदारों के रोजे में खलल डाल सकी और न इबादत में। नमाज के बाद बंदों ने खुदा से सभी पर रहमत व बरकत नाजिल करने के लिए दुआ मांगी। पहले रोजे की शुरुआत अलसुबह हुई, जिसका समापन शाम को इफ्तार के साथ हुआ। माहे रमजान के दूसरे दिन ही जुमा होने पर कई बड़ी मस्जिदों में विशेष नमाज अदा की जाएगी। संभावना है कि ईद 16 या 17 जून को मनेगी। इस स्थिति में इस बार माहे रमजान में पांच जुमा होंगे। इसके पूर्व लगातार दो वर्षों में रमजान में 4 चार जुमा ही रहे।

गुरुवार को मुस्लिम समाज के लोगों ने पहला रोजा रखा। इनमें महिलाएं, युवा व कई किशोर भी शामिल थे। अधिकांश लोग सेहरी करने काफी पहले जाग गए थे। तड़के 3.50 बजे रोजे की शुरुआत हो गई थी। इसके बाज फजिर, जौहर व मगरिब की नमाज के वक्त मस्जिदोें में खासी भीड़ दिखाई दी। शाम 7.1 बजे इफ्तारी की गई। इसमें छोटे-बड़े लोग एक साथ शामिल थे।

इकबाल मैदान पर इस बार भी पूरे रमजान माह में रोजाना सामूहिक रोजा इफ्तार का आयोजन होगा। इसकी शुरुआत गुरुवार को पहले रोजे के साथ हुई। शहर में यह अपने तरीके का संभवत: यह पहला ऐसा आयोजन है, जिसमें पहले ही रोजे से सामूहिक रोजा इफ्तारी शुरू कर दी जाती है। इसकी शुरुआत नौजवानों की एक टीम ने पिछले साल से की है, जो रोजाना यहां रोजा इफ्तार कराएगी।

तरावीह : मस्जिदों में तरावीह और कुरान की तिलावत का सिलसिला चलता रहा। लोगों ने नमाज के साथ अमनो-अमान, रहमत और बरकत के लिए दुआ की। कई स्थानोें पर मजलिसे हुईं। इनमें उलेमा और मौलवियों ने लोगों को रमजान के महत्व और रोजे रखने के तौर-तरीकों पर रोशनी डाली।

पहला जुमा आज : जुमा (शुक्रवार) की नमाज को जामा मस्जिद में पढ़ने का कुछ ज्यादा महत्व माना जाता है। यह और बात है कि अब नमाजियों की संख्या अधिक होने के कारण लोगों को जामा मस्जिद में भी जगह नहीं मिल पाती है और उन्हें अन्य मस्जिदों में जाना पड़ता है।

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