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दीपाली रस्तोगी का आदेश- शैक्षणिक कार्यक्रमों के अलावा अब कहीं नहीं जाएंगे आदिवासी छात्र

केंद्र सरकार की ओडीएफ स्कीम और ब्यूरोक्रेसी की कार्यशैली पर अपने लेख से सवाल खड़े करके सुर्खियों में आई मप्र कैडर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 13, 2018, 04:10 AM IST

दीपाली रस्तोगी का आदेश- शैक्षणिक कार्यक्रमों के अलावा अब कहीं नहीं जाएंगे आदिवासी छात्र
केंद्र सरकार की ओडीएफ स्कीम और ब्यूरोक्रेसी की कार्यशैली पर अपने लेख से सवाल खड़े करके सुर्खियों में आई मप्र कैडर की 1994 बैच की आईएएस व जनजातीय कल्याण विभाग की कमिश्नर दीपाली रस्तोगी अब एक नए आदेश के कारण चर्चा में हैं। इस नए आदेश में कहा गया है कि कोई भी आदिवासी हॉस्टल, आश्रम या संस्थान का छात्र पढ़ाई को लेकर होने वाली गतिविधियों के अलावा किसी अन्य कार्यक्रम में भाग नहीं लेगा। साफ है कि आदिवासी छात्र-छात्राओं को अब किसी भी राजनीतिक रैली या सभा में कोई नहीं ले जा पाएगा। बड़े-बड़े धार्मिक आयोजनों का भी वे हिस्सा नहीं बनेंगे।

दीपाली रस्तोगी ने सभी असिस्टेंट कमिश्नर और जिला संयोजकों को इस संबंध में निर्देश भेज दिए। यहां बता दें कि मप्र में 2 हजार 629 हॉस्टल व आश्रम तथा 139 संस्थाएं हैं। इसमें करीब दो लाख छात्र-छात्राएं हैं। अभी तक माध्यमिक व हायर सैकंडरी में पढ़ने वाले व हॉस्टल के छात्र-छात्राओं को धार्मिक आयोजन अथवा राजनीति से प्रेरित कार्यक्रमों में ले जाया जाता था। अब ऐसा नहीं हो पाएगा। बताया जा रहा है कि आदिवासी कर्मचारी अधिकारी संगठन (आकास) इंदौर के अध्यक्ष जगन सोलंकी ने मुख्यमंत्री हेल्प लाइन में शिकायत की थी। इसमें सोलंकी ने बताया, बड़वानी जिले की तहसील निवाली में मार्च के महीने में एक धार्मिक आयोजन किया गया। वार्षिक परीक्षाओं के दौरान तपती दोपहरी में हॉस्टल व अन्य संस्थाओं में पढ़ रही छोटी-छोटी छात्राओं को सिर पर कलश रखवाकर नंगे पांव शोभायात्रा निकाली गई। सोलंकी ने इसे गलत ठहराया। दीपाली रस्तोगी ने सीएम हेल्पलाइन में इस शिकायत को देखने के बाद आदेश निकाल दिए कि अब शैक्षणिक गतिविधियों के अलावा ऐसे कोई भी कार्यक्रम के लिए अनुमति न दी जाए। विभाग के प्रमुख सचिव एसएन मिश्रा का कहना है कि ऐसे किसी भी आदेश की जानकारी फिलहाल उन्हें नहीं है। वे शुक्रवार को बता पाएंगे।

दलित छात्रावासों में भी हो सकता है लागू

आदिवासी छात्र-छात्राओं के लिए तो कमिश्नर ने आदेश जारी कर दिए। अनुसूचित जाति (दलित) के छात्र-छात्राओं को भी गैर शैक्षणिक गतिविधियों में ले जाया जाता है। माना जा रहा है कि जल्द ही उनके लिए भी रोक लग सकती है। खासतौर पर चुनावी साल को देखते हुए राज्य सरकार यह फैसला ले सकती है।

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