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इंदौर फिर देश में सबसे साफ शहर भोपाल का दूसरा नंबर बरकरार

स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 का रिजल्ट बुधवार को जारी कर दिया गया। इसमें भोपाल ने फिर से देश में दूसरा स्थान हासिल किया है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 17, 2018, 04:25 AM IST

इंदौर फिर देश में सबसे साफ शहर भोपाल का दूसरा नंबर बरकरार
स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 का रिजल्ट बुधवार को जारी कर दिया गया। इसमें भोपाल ने फिर से देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। इसी प्रकार इंदौर भी फिर से पहले स्थान पर बरकरार है। हालांकि, इस बार तीसरे स्थान पर चंडीगढ़ को जगह मिली है। पिछले साल विशाखापट्टनम तीसरे स्थान पर था। जबकि पहले और दूसरे स्थान पर पिछले साल की तरह इस बार भी मप्र के दो बड़े शहरों ने कब्जा किया। केन्द्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने गुरुवार शाम ट्वीट कर स्वच्छ सर्वेक्षण के रिजल्ट जारी होने की सूचना दी। उन्होंने भोपाल और इंदौर समेत अन्य शहरों को भी बधाई दी है। पिछले साल जहां 434 शहरों से मुकाबला था, इस बार सर्वेक्षण में 4203 छोटे-बड़े शहरों ने हिस्सा लिया था।

(पढ़ें सिटी फ्रंट पेज)

स्वच्छ भारत मिशन को झटका

पॉलिटिकल रिपोर्टर . भोपाल | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन में मप्र के 14 जिले पिछड़ गए हैं। खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) करने का इन जिलों को अप्रैल में जो लक्ष्य दिया गया था, वे उसे एक तिहाई भी पूरा नहीं कर पाए। उमरिया जिले में स्थिति सबसे खराब है। यहां सिर्फ आठ फीसदी ही काम हो पाया है। इन स्थितियों के मद्देनजर एक-दो दिन में मुख्य सचिव इन जिलों की समीक्षा कर सकते हैं। चौदह जिलों में छतरपुर, सिंगरौली और दमोह जिले भी शामिल हैं, जिन्हें नीति आयोग ने हाल ही में देश के 100 पिछड़े जिलों में रखा था। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने इन बेहद कम प्रगति वाले जिलों की जानकारी शासन को भेज दी है। शेष | पेज 14 पर

साथ यह भी जोड़ा है कि ये 2 अक्टूबर 2018 तक लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकते। यहां बता दें कि केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री उमा भारती के पिछले सप्ताह 12 मई को भोपाल दौरे पर हुए राज्य-स्तरीय स्वच्छता पुरस्कार समारोह में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी कि 2 अक्टूबर 2018 गांधी जयंती तक मप्र के तमाम जिले ओडीएफ हो जाएंगे। उमा भारती ने कहा था कि देश को 2 अक्टूबर 2019 तक ओडीएफ कर देंगे। मुख्यमंत्री की इसी घोषणा के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग हरकत में आया और अप्रैल माह की ही रिपोर्ट टटोली गई तो सामने आया कि 14 जिले मुख्यमंत्री की घोषणा को पूरा नहीं कर पाएंगे। लिहाजा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने तुरंत शासन को इसकी जानकारी दी। बताया जा रहा है कि मुख्य सचिव इन 14 जिलों के कलेक्टरों व संबंधित अधिकारियों के साथ बात करेंगे। विभाग के अधिकारिक सूत्र बता रहे हैं कि अप्रैल माह में तो ये जिले पिछड़े ही हैं, पूरे साल के लक्ष्य में भी ये पीछे हैं।

ये काम हो जाते तो भोपाल हाे सकता था नंबर वन

1. वेस्ट टू एनर्जी प्लांट शुरू नहीं हो पाया। शुरू हो जाता तो बिजली बनती और कचरा भी निपट जाता।

2. कचरे के सेग्रिगेशन काे निगम अंजाम तक नहीं पहुंचा पाया।

3. कंपोस्ट यूनिट बने, लेकिन कचरे से खाद बनना शुरू ही नहीं हो पाया।

4. पीपुल कनेक्टिविटी कम रही, अभियान देर से शुरू हुए।

5. निगम की सक्रियता पिछले बार तुलना में कम रही। निगम आयुक्त भी मौके पर कम नजर आईं।

शिवराज की घोषणा के चार दिन बाद ही पता चला कि 2 अक्टूबर तक ओडीएफ नहीं हो पाएंगे 14 जिले

छोटे शहरों का प्रदर्शन निराशाजनक : एक भी अवाॅर्ड नहीं मिला

नेशनल कैटेगरी में भले ही प्रदेश के दो शहर पहले और दूसरे स्थान पर हों, पर इनके अलावा प्रदेश का एक भी शहर किसी भी कैटेगरी में जगह नहीं बना पाया। यहां 10 लाख से अधिक आबादी वाले, तीन लाख से 10 लाख और 1 लाख से 3 लाख तक की आबादी वाले शहर 20 कैटेगरी में से एक भी अवाॅर्ड नहीं जीत पाए। यही नहीं, पांच जाेन के एक लाख से कम आबादी वाले शहरों के बीच हुए कॉम्पटीशन की 20 कैटेगरी में भी एक भी शहर को अवॉर्ड नहीं मिला है।

पहला स्थान न मिल पाने की कसक

पहले मुकाबला 434 शहरों से था, लेकिन इस बार 4203 शहरों से। ऐसे में दूसरा स्थान बरकरार रखना बड़ी बात है। पहला स्थान न मिल पाने की कसक है। एस्सेल इंफ्रा कंपनी ने वेस्ट टू एनर्जी प्लांट शुरू नहीं किया। इस कारण हमारे ये नंबर कट गए। - आलोक शर्मा, महापौर

ऐसे हुआ सर्वेक्षण

4203 छोटे-बड़े शहर हुए शामिल

37.66 लाख सिटीजन फीडबैक मिले

बेस्ट परफॉर्मिंग स्टेट : 1. झारखंड, 2. महाराष्ट्र, 3. छत्तीसगढ़

53.58 लाख स्वच्छता एप्प हुए डाउनलोड

जो काम नहीं करेंगे, हटेंगे

मुख्य सचिव की समीक्षा के बाद इन 14 जिलों में कुछ अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। बताया जा रहा है कि शासन इन जिलों के कलेक्टरों को कुछ मोहलत देंगे। इसके बाद भी काम नहीं हुआ तो कार्यवाही की जाएगी।

1.18 करोड़ कंप्लेंट दर्ज हुईं एप्प पर

1.13 करोड़ कंप्लेंट का हुआ निराकरण

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