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पहले किसानों को नहीं भेजे मैसेज, अब तीस हजार को बुलाया, 5-5 दिन कर रहे इंतजार

प्रदेश सरकार समर्थन मूल्य पर इस चना, सरसों और मसूर की खरीदी शुरू की है। पहले तो इन किसानों को समय रहते मैसेज देकर...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 05:45 AM IST

पहले किसानों को नहीं भेजे मैसेज, अब तीस हजार को बुलाया, 5-5 दिन कर रहे इंतजार
प्रदेश सरकार समर्थन मूल्य पर इस चना, सरसों और मसूर की खरीदी शुरू की है। पहले तो इन किसानों को समय रहते मैसेज देकर बुलाया नहीं। अब 10 दिन पहले थोक में किसानों को मैसेज भेजे गए। इससे किसानों की भीड़ खरीदी केंद्रों पर लग गई। अब खराब मौसम के दौरान किसानों को पांच-पांच दिन से खरीदी केंद्र पर उपज बेचने का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद भी किसानों का नंबर तुलाई के लिए नहीं लग पा रहा है। ऐसे में भूखे-प्यासे किसान रातभर केंद्र पर फसलों की निगरानी करने पर मजबूर है। इसके बाद भी खरीदी केंद्रों पर फसल खरीदी की व्यवस्था जिला प्रशासन नहीं बना पा रहा है। इसी अव्यवस्था से गुरुवार शाम पचोर मंडी में किसानों ने हंगामा शुरू कर दिया, जो देर रात तक जारी रहा।

एक तरफ किसान पिछले डेढ़ माह से उपज बेचने मैसेज का इंतजार कर रहे हैं। 10 दिन पहले प्रशासन ने 25 से 30 हजार किसानों को एक साथ मैसेज भेज दिए, इसलिए सभी किसान एक साथ खरीदी केंद्रों पर पहुंच गए हैं। व््यवस्था बिगड़ गई है।

किसानों को रातभर भूखे-प्यासे फसल की करना पड़ रही है रखवाली

खराब मौसम के दोरान रातभर जागकर खरीदी केंद्र पर उपज की रखवाली करते किसान।

लाइव:पांच-पांच दिन इंतजार करने के बाद भी नहीं लग रहा उपज खरीदी का नंबर

भास्कर टीम द्वारा छापीहेड़ा खरीदी केंद्र का बीती रात पड़ताल की। इस दौरान अधिकांश किसान खुले आसमान के नीचे फसल लेकर जाग रहे थे। किसानों ने बताया कि वह पांच-पांच दिन से खरीदी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उनका नंबर नहीं आया। आंधी तूफान के साथ बारिश के आसार दिख रहे है। ऐसे में फसल ढकने का इंतजाम भी नहीं है। किसान रामबाबू, कुशाल सिंह, रमेश दांगी, रामेश्वर ने बताया कि भूखे-प्यासे दिनभर तो हम खरीदी का इंतजार करते हैं, वहीं रातभर पशुओं के साथ ही बारिश से बचने फसल की रखवाली करते हैं। इसके बाद भी फसल खरीदी का नंबर नहीं आ रहा है।

खरीदी के अब सिर्फ 12 दिन शेष

इस साल भावांतर भुगतान योजना के तहत लहसुन की खरीदी 30 मई तक की जानी है। लेकिन अभी तक आधे किसानों की भी उपज नहीं खरीदी जा सकी। जबकि 9 जून तक चना मसूर और सरसों की खरीदी की जानी है। ऐसे में किसानों की भीड़ एक साथ केंद्र पर लग गई, अब इंतजाम नहीं होने से किसानों को यहां परेशान होना पड़ रहा है। किसान प्रेमनारायण दांगी, रामकिशन नोकड़ आदि ने बताया कि केंद्र पर आधे समय तो किसानों को अनाज साफ करने में लगा दिया जाता है, बाकी समय रुक-रुक कर अनाज तौला जा रहा है।

48 हजार में से 31 हजार किसानों की हुई खरीदी

शनिवार और रविवार को अवकाश के चलते समर्थन मूल्य गेहूं खरीदी का शुक्रवार को अंतिम दिन है। गुरुवार शाम तक 48 हजार किसानों में से 32 हजार किसानों से डेढ़ लाख एमटी गेहूं खरीदा जा सका। ऐसे में 16 हजार से अधिक किसान उपज बेचने से वंचित रह जाएंगे। इसको लेकर किसान आक्रोशित भी है कि प्रशासन को खरीदी की तारीख़ बढ़ा देना चाहिए।

आधे किसानों की भी नहीं हो सकी खरीदी

इस साल समर्थन मूल्य पर चना के लिए 13 हजार 956 किसानों ने पंजीयन कराया था, इसमें से पांच हजार किसानों की उपज खरीदी जा सकी। इसी तरह मसूर के लिए 48 हजार 251 किसानों में से तीन हजार, सरसों के 4 हजार 961 किसानों में से एक हजार किसानों की उपज खरीदी जा सकी। लहसुन के 12 हजार 750 किसानों में से 500 किसानों की ही उपज खरीदी गई।

मैसेज के बाद भी पहले तो किसान केंद्रों पर नहीं आए, अब एक साथ किसान खरीदी केंद्रों पर पहुंचे हैं। इसलिए भीड़ लगी है। जल्द ही केंद्रों पर व्यवस्था सुधार दी जाएगी। राखी रघुवंशी, जिला विपणन अधिकारी राजगढ़।

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