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ग्रंथों के अध्ययन से जीवन में आता है बदलाव: चेतनानंद गिरी महाराज

शास्त्रों का गहन अध्ययन करके उनका आचरण जीवन में हो। सुख चाहते हो तो किसी को दुख न दो तथा धर्म का आचरण जीवन में करो जो...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 14, 2018, 05:10 AM IST

ग्रंथों के अध्ययन से जीवन में आता है बदलाव: चेतनानंद गिरी महाराज
शास्त्रों का गहन अध्ययन करके उनका आचरण जीवन में हो। सुख चाहते हो तो किसी को दुख न दो तथा धर्म का आचरण जीवन में करो जो इंसान धर्म का पालन नहीं करते वह मूढ़ हैं। इस मूढ़ता को त्याग कर धर्ममय आचरण से जीवन यापन करना परम कर्तव्य है।

यह उद्गार स्वामी चेतनानंद गिरी महाराज ने व्यक्त किए। वह राम मंदिर जमुनियापुरा में आयोजित संगीतमयी सप्त दिवसीय भागवत कथा के समापन अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं को कृष्ण सुदामा की मित्रता का उदाहरण देकर मित्रता धर्म निभाने के लिए प्रेरित कर रहे थे। कथा का आयोजन कस्तूरी मांझी, रामलाल मांझी व परिजनों द्वारा कराया गया। बुधवार को कथा का समापन हुआ।

स्वामी चेतनानंद गिरी महाराज ने कृष्ण सुदामा चरित की मार्मिक व्याख्या करते हुए बताया कि वर्तमान में भी लोग कृष्ण सुदामा की मित्रता का उदाहरण देते हैं। द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण का स्नेही मित्र होने का गौरव उन्हें प्राप्त है। महर्षि सांदीपनी के आश्रम में जब कृष्ण व सुदामा साथ साथ विद्या अर्जन कर रहे थे तभी वाल्यकाल में दोनों में मित्रता हुई। उन्होंने बताया कि प्रत्येक मनुष्य इस चिंतन के साथ जीवन यापन करे कि मृत्यु निश्चित है यह होना है जिसे कि कोई टाल नहीं सकता है। इसी बात को ध्यान मे रख कर श्रेष्ठ कार्य करें। शरीर की शुद्धि आहार शुद्धि बुद्धि की पवित्रता जरुरी है। एेसा करने वाले मनुष्य का जीवन श्रेष्ठ बन सकता है। देवता भी मानव तन को प्राप्त करने के लिए हमेशा लालायित रहते हैं। यह अद्वितीय देन जीव को परमात्मा की है। आयुर्वेद के अनुसार मानव को आहार चर्या करनी चाहिए जिससे कि स्वास्थ्य ठीक रहे, इसके बाद परमात्मा का ध्यान चिंतन मनन करना चाहिए। जिससे परलोक का सुधार हो सके। शरीर, मन बुद्धि और जीवन को श्रेष्ठ बनाने के लिए धर्म के आश्रय से ही एकाग्रता बढ़ती है और जीवन सदाचार, संयम, सद्ज्ञान का समावेश होता है और इस मृत होने वाले नश्वर शरीर से परमात्मा को प्राप्त करना जीवन का ध्येय होना चाहिए।

भगवान कृष्ण व सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए पंडित चेतनानंद गिरी महाराज ने बताया कि बताया कि धर्म ग्रंथों को घर में रख लेने मात्र से ही ज्ञान प्राप्त नहीं होता। बल्कि धर्म ग्रंथों का अध्ययन, मनन, चिंतन किया जाना चाहिए। ग्रंथों में वर्णित कथाओं से मानव के जीवन में बदलाव आता है। साथ ग्रंथों को समझने के लिए सत्संग भी जरूरी है। कोई भी व्यक्ति धन के माध्यम से भागवत कथा का लाभ नहीं अर्जित कर सकता। मनुष्य को भागवत में अपने सभी दोष अर्पित कर देना चाहिए इसके बाद ही उसे जीवन का महत्व समझ में आएगा। बुद्धि मिली है तो इसका विवेक से उपयोग करें धन मिला है तो परोपकार में लगाएं, पद, प्रतिष्ठा मिली है तो सेवा में लगाएं। भागवत कथा के सुमिरन मात्र से ही मनुष्य का मन बुराइयों से दूर भागने लगता है।

धर्म

राम मंदिर जमुनियापुरा में आयोजित कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने खेली फूलों की होली

कथा के समापन पर बड़ी संख्या में पहुंची श्रद्धालु महिलाएं।

खेली गई फूलों की होली, श्रद्धालुओं ने किया नृत्य

भागवत कथा के समापन पर फूलों की होली खेली गई। यहां पर डीजे पर बज रहे भक्ति गीतों पर श्रद्धालुओं द्वारा भाव विभोर होकर नृत्य किया गया। समापन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं द्वारा भागवत पुराण की श्रद्धा पूर्वक आरती की गई तथा प्रसाद ग्रहण किया गया।

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