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कथा श्रवण से पाप का शमन होता है

रामानुजाचार्य महाराज ने गुरुवार को कथा सुनाते हुए कहा कि जब भी जहां भी सत्संग करने का अवसर प्राप्त हो एेसे अवसर को...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 06:35 AM IST

रामानुजाचार्य महाराज ने गुरुवार को कथा सुनाते हुए कहा कि जब भी जहां भी सत्संग करने का अवसर प्राप्त हो एेसे अवसर को कभी भी नहीं छोड़ना चाहिए। सत्संग करने व कथा श्रवण करने से पापों का शमन होता है।

संगीतमयी रामकथा के प्रथम दिन बड़ी संख्या में श्रद्वालु कथा श्रवण करने पहुंचे। रामानुजाचार्य महाराज ने कहा कि कथा सुनना भी तपस्या करने के समान होता है। जिस भी श्रद्धालु ने कथा का श्रवण पूर्ण मनोयोग से स्वार्थ रहित होकर कर लिया मानो उसने दो से तीन घंटे की तपस्या पूर्ण कर ली। उन्होंने बताया कि भगवान सर्वज्ञ है। इसके बावजूद भी वह कथा श्रवण करने आते हैं। आपने चंद्र अमृत पीने के लाभ को बताते हुए कहा कि चंद्र अमृत पीने से 4 प्रकार के लाभ श्रद्धालु को प्राप्त होते हैं। जिसमें काल मृत्यु नहीं होती, पुनर्जन्म नहीं होता, कभी भी विनाश नहीं होता है तथा मृत्यु होने पर बैकुंठ को प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि जीवन रुपी सरिता के दो किनारे है। एक जन्म व दूसरा मृत्यु होता है। कर्म के अनुसार ही मानव के भाग्य का निर्धारण होता है। यहि मानव धर्म के अनुसार आचरण करता हुआ सात्विक जीवन जीता है तो वह स्वर्ग तक पहुंच सकता है। यदि मानव ने गलत आचरण अपनाया और व्याभिचार सहित अन्य पापों मे लिप्त रहा तो उसे नारकीय जीवन जीना पड़ेगा। कथा वाचक रामानुजाचार्य ने बताया कि भगवान को हासिल करने के लिए मानव को लक्ष्य का निर्धारण करना चाहिए। लक्ष्य बना कर किया गया कार्य ही सफलता दिलाता हैं 84 लाख योनियों में भटकने के बाद यह मानव तन प्राप्त होता है। प्राप्त हुए तन को भगवान की भक्ति में अर्पित कर देना चाहिए। ताकि भव सागर से पार हुआ जा सके।

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