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वर्षों पुराने प्राकृतिक जल स्रोतों को दबाकर बना दीं सड़कें, संरक्षण पर नहीं दिया ध्यान

गर्मियां आते ही नगर में पेजयल को लेकर लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पेयजल योजनाएं शुरू होने के बाद...

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 06:45 AM IST
वर्षों पुराने प्राकृतिक जल स्रोतों को दबाकर बना दीं सड़कें, संरक्षण पर नहीं दिया ध्यान
गर्मियां आते ही नगर में पेजयल को लेकर लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पेयजल योजनाएं शुरू होने के बाद नगर के प्राकृतिक जल स्रोतों को लोगों ने नजर अंदाज कर दिया है। जिससे गर्मियां आते ही पेयजल संकट गहरा जाता है। नगर में ऐसे कई प्राकृतिक जल स्त्रोत हैं जो लोगों को आज भी पेयजल संकट से मुक्ति दिला सकते हैं, लेकिन इनको संरक्षित करने के लिए न तो जनप्रतिनिधियों और न ही समाजसेवियों द्वारा ध्यान दिया जा रहा है। जिससे नगर के अधिकांश जल स्त्रोत अब खत्म हो चुके हैं और जो बचे हैं उन्हें सरंक्षण की दरकार है।

जहां लोधीपुरा में पांच कुओं में से तीन ने दम तोड़ दिया है। रखरखाव के अभाव में इनमें लोग कचरा डालने लगे और कुछ समय पश्चात इनका अस्तित्व ही समाप्त हो गया। इसी प्रकार वार्ड नंबर 9 का प्रसिद्ध खारा कुआं सीमेंट की रोड में तब्दील हो चुका है। इस कुएं से कभी लोग पानी भरकर अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करते थे। इसी प्रकार हनुमान मंदिर के पास स्थित वार्ड नंबर 14 में मीठे कुआं के नाम से प्रसिद्ध कुएं का वर्तमान में अस्तित्व ही समाप्त हो चुका है। नगर में एकमात्र यह मीठा कुआं हुआ करता था जो पूरे नगर की प्यास बुझाता था,लेकिन इसके ऊपर से सीमेंट रोड बन गया। इसी प्रकार गल्ला बाजार में 15 वर्ष पूर्व एक कुआं हुआ करता था जिसका भी आज तक नामोनिशान नहीं बचा है।

नगर में 10 वर्ष पूर्व पुराने जल स्रोतों लगभग 12 थे, वर्तमान में एक-दो ही नजर आते हैं

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